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कविता : मैं ना कोई नेता हूँ

 

 

मैं ना कोई नेता हूँ या,
ना कोई अभिनेता हूँ !
लहू रंग कुरबानी देता ,
भारत माँ का बेटा हूँ!
सत्य बोलना पाप जहाँ अब ,
चाटुकारिता फलती है !
कुन्दन’ के हृदय में पल पल ,
बात यही तो खलती है !
सच्ची कड़वी बातों को मैं ,
कविता में कह देता हूँ !
लहू रंग कुरबानी देता,
भारत माँ का बेटा हूँ!
—-+
तीस वर्ष में रैंक तीन का,
सरकारी अनुमोदन है !
मगर अभी तो विभागों में,
हुआ नही संशोधन है !
अनुशासन के शोषण को भी ,
आदेशों में लेता हूँ !
लहू रंग कुरबानी देता,
भारत माँ का बेटा हूँ!
—–
तेइस चौबीस वर्षों तक भी
मिलता नही प्रमोशन है !
औ कर्तव्यों की राहों में ,
अड़चन बस अवरोधन है !
सदा भँवर मझधारों में ही
जीवन नैइयाँ खेता हूँ !
लहू रंग कुरबानी देता,
भारत माँ का बेटा हूँ!
—-
उपर बैठे पदाधिकारी ,
पद की झोली भर लेते !
नीचे वालों को होमियो
पैथिक गोली दे देते !
दीपक तले अन्धेरों का भी
खूब नजारा देखा हूँ!
लहू रंग कुरबानी देता,
भारत माँ का बेटा हूँ!

राष्ट्र भक्ति संरक्षक सीखें
जवानों जैसा त्याग करें !
पाँच वर्ष में नहीं रैंक लें
बीस तीस का ख्याल करें !
जीवन अर्पित राष्ट्र शक्ति को
सदा शपथ यह लेता हूँ!
लहू रंग कुरबानी देता,
भारत माँ का बेटा हूँ!

स्वाभिमान है रैंक हमारा
क्यों समझौता करते हो !
दिल में दर्द बहुत उठता जब
निष्ठा रौंदा करते हो !
घुट घुटकर बस चुप चुप कर हर
कष्टों को सह लेता हूँ!
लहू रंग कुरबानी देता
भारत माँ का बेटा हूँ!
—–
ठुल मुल नीति कुरीति मिटाकर,
मर्यादित व्योस्थापन हो!
सेवा श्रम निष्पक्ष तुला पर,
आदर्शित अनुशासन हो!
रंग भूमि के कर्म पटल पर,
स्वर्णिम अक्षर लेखा हूँ!
लहू रंग कुरबानी देता,
भारत माँ का बेटा हूँ!

जयहिन्द!
कुन्दन कुमार उपाध्याय
सेवारत- के० औ० सु० बल

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