न्यूज के लिए सबकुछ, न्यूज सबकुछ
ब्रेकिंग न्यूज़

कविता : हवा के झोंके

ये हवा के झोंके बनकर दिल से.
शिकायत करते है चाहत की नजरों से।
जाने कौन सी दुनियां से आते है वो.
गुजरे लम्हें याद कराने आते है ।
कुछ याद नहीं आता कौन है वो.
दिल पे दस्तक दें जगाते है ।
कुछ समझ नहीं आता कैसा रिश्ता.
जो रात के अधेंरे में जगाते है ।
सफेद लिबास पहने घर की दहलीज में
चले आते घर के कोने कोने में नजर आते हैं।
मगर कुछ कहते सुनते नहीं इधर उधर.
घूमते रहते कुछ ढूंढते नजर आते हैं।
ये अक्स किसका बस रात दिन यही.
ख्याल आते रहते मुझे सताते रहते हैं।
कितनी बार पूछा कौन है कहां से आये.
मगर जबाब न मिलता मुझे सताते रहते हैं।
तंग आ गया जिन्दगी से तो पूछा.
हकीकत में क्यूं नहीं आते हो सामने।
कहें भारती हवा के झोंके हकीकत में नहीं आते.
ये हवा के झोंके आने का अहसास दिलाते सामने।

मंगल व्यास भारती
चूरू राज.

Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar