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कहानी : मुखौटा

माया और प्रेम दोनों एक ही कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई कर रह थे। माया प्रारंभ से ही प्रेम से प्रेम कर बैठी थी। लेकिन, प्रेम माया को देखता तक नहीं था। माया पढ़ने में इतनी माहिर नहीं थी, जितना प्रेम था। लेकिन, इसके बावजूद भी माया की सादगी, विनम्रता और चेहरे की मधुर मुस्कान उसकी ओर हर किसी को मोहित करती थी। वह व्यवहारशील और मिलनसार स्वभाव की बड़ी संवेदनशील लड़की थी। इसके विपरीत प्रेम दंभी और अमित्रवत था। वह हर किसी को बुलाता भी नहीं था। उसके लिए पैसा ही सबकुछ था। तो फिर वह माया जैसी सीधी-साधी मध्यमवर्गीय कन्या को क्यों देखता भला ? खैर ! समय के साथ दोनों ने बीटेक की डिग्री हासिल कर ली। अब बारी थी जॉब के लिए इंटरव्यू की। दोनों इंटरव्यू के लिए पहुंच गये। परिणाम यह रहा कि माया को जॉब मिल गई। और प्रेम के पास अधिक काबिलियत होने के बाद भी उसे कंपनी ने नौकरी नहीं दी। शायद ! कारण था उसकी घमंडी और अव्यवहारिक प्रवृत्ति। सबको सम्मान न देनी उसकी आदत अधिक योग्यता के बाद भी उसे पीछे छोडती गई।
माया के जॉब से और खुद की नौकरी नहीं लगने के कारण उसके अहम को बड़ा ही धक्का लगा। अब उसने मन ही मन ठान लिया कि वह कंपनी के मालिक को सबक सिखाकर ही रहेगा। इसके लिए उसने एक खुराफाती विचार को जन्म दिया और योजना बना डाली। उसने इस काम के लिए माया को ढाल बनाया। चुंकि माया तो पहले से ही प्रेम को पसंद करती थी। प्रेम ने माया को यह जताने का पूर्ण प्रयास किया की वह उसे बहुत ही प्यार करता है। दोनों शाम को मिलने लगे। अब माया को यकीन होने लगा था कि प्रेम सचमुच में बदलकर उसकी ओर आकर्षित होने लगा। एक दिन प्रेम माया के ऑफिस में गया। माया के टेबल पर जाकर उससे बातें करने लगा। प्रेम कॉलेज के दिनों की बातों में माया को फंसाता गया। तभी माया को उसके बॉस का फोन आया। वह प्रेम से कुछ देर के लिए इजाजत लेकर बॉस से मिलने के लिए चली गई। वहीं, प्रेम ने अपने प्लान को अंजाम देने के लिए इसे उचित अवसर समझा। उसने माया के टेबल का कंप्यूटर ओपन करके हैकिंग सिस्टम को टाइमर के साथ एक्टिव कर दिया। थोडी देर बाद माया आ गई। तब तक प्रेम ने अपना काम कर लिया। प्रेम माया से गले मिलते हुए शाम को मिलना का कहकर चला गया।
प्रेम के जाने के कुछ देर बाद ऑफिस के सारे कंप्यूटरों का सिस्टम ऑटोमेटिक ही रुक गया। कंपनी के मालिक को पता चल गया कि कंप्यूटर हैकिंग एक्टिव हो गया। तभी मालिक के मोबाइल पर एक वीडियो मैसेज आया। वीडियो में एक शख्स मुखौटा पहने हैकिंग की जानकारी देते हुए फिरौती की पेशकश कर रहा था। वह शख्स प्रेम ही था। वह वीडियो भी प्रेम ने ही बनाया था। वीडियो बनाकर उसने मुखौटा अपने बैड के नीचे रख दिया था। मालिक ने तत्काल ऑफिस के सदस्यों की बैठक बुलायी और उस वीडियो को दिखाया। मालिक के साथ सारे मैंबर परेशान होने लगे। हैकर द्वारा दिया गया समय बीता जा रहा था। मालिक को कुछ नहीं सुझ रहा था। अंत में मालिक ने हैकर को फिरोती के पैसे पहुंचा ही दिए। हैकिंग सिस्टम हैकर ने अनएक्टिव कर दिया। अब प्रेम के पास दो करोड की फिरोती आ गई थी। उसने दो करोड से अपने लिए कार खरीदी। उसी कार में वह माया को घुमाने लगा। इस सबके बीच प्रेम को माया से सच में प्यार होने लगा था। प्रेम आजकल ज्यादा ही खुश था।
वहीं, कंपनी का मालिक मुसीबत से छुटकारा मिलने के बाद भी परेशान था। उसे यह बात खाये जा रही थी कि आखिर कंप्यूटर हैक हुए कैसे ? उसने एक एक्सपर्ट को बुलाया और पता लगाया। तब पता चला कि माया के कंप्यूटर से हैकिंग सिस्टम हैकर ने एक्टिव किया था। मालिक ने तुरंत माया को बुलाया और सारी बात बतायी। और साथ में धमकी भी दी कि यदि अगले 24 घंटे में तुम हैकर का पता नहीं लगा पाती तो तुम अपनी नौकरी से हाथ धो बैठोगी। माया धमकी से बहुत ही डर और सहम गई। इस समस्या का तोड निकालने के वह प्रेम के घर गई। माया ने प्रेम को सारी बात बतायी। प्रेम ने सारी बात सुनकर कहा – देखो ! माया सबकुछ ठीक हो जायेंगा। तुम्हें आइसक्रीम पसंद है ना। मैं तुम्हारे लिए आइसक्रीम लेकर आता हूं। यह कहकर प्रेम आइसक्रीम लेने चला गया। तभी माया की हाथों में से घर की चाबियों का गुच्छा नीचे घिर गया। वह गुच्छे को उठाने के लिए नीचे झुकी तो प्रेम के बैड के नीचे मुखौटा मिला। वह वहीं मुखौटा था जिसको हैकर ने वीडियो में पहना था। माया को सब समझ में आ गया। हैकर कोई ओर नहीं प्रेम ही है। साथ मैं माया को यह भी पता चला कि प्रेम के पास कार आना और उसका अचानाक प्रेम जताना सब इस प्लान का हिस्सा था।
माया ने तुरंत पुलिस को फोन किया। और थोडी देर बाद प्रेम जब आइस्क्रीम लेकर आया तो उसका पुलिस इंतजार कर रही थी। पुलिस ने प्रेम को हैकिंग करने व फिरौती वसूल करने के अपराध में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की वेन में जाते-जाते प्रेम ने माया से रोते हुए कहा कि यह सच है कि मैंने ही हैकिंग की थी। मेरे पास ओर कोई रास्ता भी नहीं था। लेकिन, यह भी सच है कि इस बीच मैं तुम्हें चाहने भी लगा हूं। माया ने प्रेम से मुंह फेर लिया। और पुलिस की गाडी चल पडी।

देवेंद्रराज सुथार
संपर्क – गांधी चौक, आतमणावास, बागरा, जिला-जालोर, राजस्थान। 343025
mob 8107177196

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