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कांग्रेस को बड़ा झटका, सुखराम परिवार भाजपा में शामिल

मंडी। संचार क्रांति के मसीहा रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम का परिवार शनिवार को कांग्रेस से नाता तोड़ भाजपा में शामिल हो गया। पंडित सुखराम, उनके बेटे अनिल शर्मा व पोते आश्रय शर्मा ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। हिमाचल प्रदेश सरकार में पंचायती राज व ग्रामीण विकास मंत्री अनिल शर्मा ने मंडी में देर शाम घोषणा की कि उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है और भाजपा की तरफ से मंडी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। सुखराम परिवार के भाजपा का दामन थामने से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। मंडी जिले में 10 सीटें हैं और कई सीटों पर परिवार का प्रभाव है। देर शाम अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में अनिल ने कहा कि कांग्रेंस ने उनके परिवार को हाशिये पर धकेलने का प्रयास किया। मंडी हमारे परिवार की कर्मभूमि रही है और यहां उन्हें लगातार अपमानित किया गया। सुशील कुमार शिंदे के सामने उनके पिता को खरी-खोटी सुनाई गई। यहां तक कि उन्हें आयाराम, गयाराम कहा गया। मंडी में हाल ही में राहुल गांधी की रैली में उन्हें प्रवेश तक नहीं करने दिया गया। कांग्रेस द्वारा एक दिन पहले विभिन्न समितियों के गठन में भी परिवार की अनदेखी की गई। उन्हें हर जगह अपमान झेलना पड़ा चाहे वह मंत्री के रूप में हो या अन्य जिम्मेदारी के मामले में। परिवार ने पार्टी के लिए लिए कर्मठ कार्यकर्ता की तरह सब कुछ किया, लेकिन कांग्रेस से अपमान के अलावा कुछ नहीं मिला। अनिल ने कहा कि प्रदेश सरकार में उनकी अनदेखी की जाती रही। उनके काम नहीं होने दिए गए।

वीरभद्र से रहा छत्तीस का आंकड़ा-

पंडित सुखराम व हिमाचल प्रदेश मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बीच छत्तीस का आंकड़ा रहा है। सुखराम 1986 में घर पर सीबीआइ की दबिश में अपनी ही पार्टी के नेताओं का हाथ बताते थे। उन्होंने 1998 में हिविकां का गठन कर चुनाव लड़ा और पांच सीटें जीतीं। 31 सीटें जीतने वाली भाजपा को समर्थन देकर पांच साल तक सरकार चलाई।

2003 के चुनाव से पहले वह फिर कांग्रेस में लौट गए थे। पुराने गिले-शिकवे भुला वह कई बार वीरभद्र सिंह से मिलने शिमला भी पहुंचे। 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रतिभा सिह को मंडी संसदीय क्षेत्र में मिली हार के बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिह ने इसके लिए ब्राह्माणवाद को जिम्मेदार बता अप्रत्यक्ष रूप से सुखराम पर हमला बोला था।

सुखराम सक्रिय राजनीति से लगभग किनारा कर चुके हैं। पिछले दिनों उन्होंने मंडी में प्रदेश प्रभारी सुशील कुमार शिंदे के स्वागत के लिए हुए कार्यक्रम में भाग लिया था। यहां वीरभद्र सिह ने उनको खरी-खोटी सुनाई थी।

1990 के बाद नहीं जीती भाजपा-

मंडी सदर में 1990 के बाद से भाजपा जीत नहीं पाई है। उसके बाद से सुखराम के परिवार के पास ही यह सीट रही है। 1998 में सुखराम हिविकां के टिकट पर जीते थे। 2003 से अनिल शर्मा इस सीट प्रतिनिधित्व कर रहे थे। ——–

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