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कुपोषण पर जागरुकता जरूरी: मोदी

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाज में कुपोषण के बारे में जागरुकता फैलाने पर जोर देते हुए कहा है कि इससे निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की सभी योजनाओं तथा कार्यक्रमों में समन्वय किया जाना चाहिए। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार कुपोषण से निपटने के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों की समीक्षा के लिए कल देर शाम बुलाई गयी उच्च स्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि पोषण के संबंध में समाज में व्यापक स्तर पर जागरुकता फैलाई जानी चाहिए और इसके लिए अनौपचारिक तरीके अपनाए जाने चाहिए। बैठक में प्रधानमंत्री कार्यालय, नीति आयोग और संबद्ध मंत्रालयों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

The Prime Minister, Shri Narendra Modi chairing the high-level review meeting on the progress and efforts being made to prevent and reduce under-nutrition and related problems in India, in New Delhi on November 24, 2017.

बैठक में देश में कुपोषण की मौजूदा स्थिति और इससे निपटने में आ रही विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गयी। इस समस्या के समाधान के लिए विकासशील देशों में चल रहे विभिन्न कार्यक्रमों पर भी विचार विमर्श किया गया।

श्री मोदी ने कुपोषण, अल्पपोषण, कम वजन जन्म और रक्ताल्पता से निपटने के लिए एकजुट होेने पर भी बल दिया। उन्होेंने कहा कि वर्ष 2022 में आजादी की 75 वीं वर्षगांठ पर इन समस्याओं से निपटने के उपायों का असर जमीन पर दिखना चाहिए।
श्री मोदी ने कहा कि कुपोषण से सर्वाधिक प्रभावित जिलों पर खास जोर दिया जाना चाहिए और इनकी नियमित निगरानी की जानी चाहिए।
बैठक के दौरान संबंधित अधिकारियों ने बताया कि कुपोषण से निपटने के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों स्वच्छ भारत अभियान, मिशन इंद्रधनुष, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना आदि का समाज में सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
शरीर के लिए आवश्यक सन्तुलित आहार लम्बे समय तक नहीं मिलना ही कुपोषण है। कुपोषण के कारण बच्चों और महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे वे आसानी से कई तरह की बीमारियों के शिकार बन जाते हैं। एक अध्ययन के अनुसार बच्चों और महिलाओं के अधिकांश रोगों की जड़ में कुपोषण ही होता है।

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