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कृष्ण भक्ति का परिचायक है इस्कॉन मंदिर

भगवान कृष्ण के मंदिर को इस्कॉन मंदिर भी कहा जाता है। इस्कॉन के मंदिर सारी दुनिया में है। इस मंदिर का नाम एक विशेष अंग्रेजी भाषा के शब्दों को बनाकर किया गया .इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्ण कांशसनेस (इस्कॉन)। इस अध्यात्मिक संस्थान की स्थापना भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपद ने 1966 में न्यूयॉर्क में की थी। इस्कॉन के जितने भी भक्त है वो भगवान कृष्ण को सबसे बड़ा भगवान मानते है और देवता के जितने भी अवतार हुए वो सभी भगवान कृष्ण के है ऐसा उनका मानना है।
पूरे विश्व में सैंकड़ों की संख्या में इस्कॉन मंदिर है। लंदन यात्रा के दौरान ऐसे ही एक इस्कॉन मंदिर की चर्चा सुनी। यह मंदिर लंदन से करीब 33 किमी दूर वाटफोर्ड शहर के पास स्थित है। राधाकृष्णन के दर्शन की अभिलाषा के साथ परिवार के साथ हम भी इस स्थल पर पहुँच गए।
भक्तिवेदान्त मनोर के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर इंग्लैंड के हर्टफोर्डशायर ग्रामीण इलाकों में वाटफोर्ड शहर के पास अल्देनहम गांव में स्थित है। यह मनोर इस्कॉन द्वारा संचालित है जो हरे कृष्ण आंदोलन के रूप में दुनियाभर में विख्यात है। यह यूनाइटेड किंगडम में इस्कॉन की सबसे बड़ी संपत्ति है और यूरोप में सबसे अधिक बार जाने वाले राधा कृष्ण मंदिरों में से एक है। 70 एकड़ में फैला यह स्थल प्राकृतिक दृश्यों और हरे भरे बाग बगीचों और कृत्रिम झील से भरपूर है। यह इंग्लैंड के लिए राष्ट्रीय विरासत सूची ग्रेड दो पर सूचीबद्ध है। 1973 में बने इस इस्कॉन मंदिर में राधा कृष्ण के साथ राम लक्ष्मण और सीता की भव्य और मनमोहक मूर्तियां स्थापित है। यह इंग्लैंड के मशहूर पर्यटक स्थलों में शुमार है। मंदिर की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां देश विदेश से बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। मंदिर के अन्दर प्रवेश करते ही चैन और सुकून की भावना आत्मा को शुद्ध करती है।

बाल मुकुन्द ओझा

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