National Hindi Daily Newspaper
ब्रेकिंग न्यूज़

क्रिसलिस ने भारत में प्रत्येक बच्चे के लिए ‘मानवीय संभावना के लिए शिक्षा’ लागूकिया

भारत मे ंइस आन्दोलन की व्यापकता बढ़ाने, सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के 15 लाख से अधिकस्कूलों के प्रचलित पाठ्यक्रम के साथ मानवीय संभावना संरचना के एकीकरण के लिए एक बहुप्रणालीय दृष्टिकोण

दिल्ली : शैक्षणिक सुधार के क्षेत्र में सक्रिय अग्रणी संगठन, क्रिसलिस ने एक नई शैक्षिक प्रणाली विकसित की है, जो प्रत्येक बच्चे में छिपी मानवीय संभावना को जाग्रत करने पर केन्द्रित है। इससे मौजूदा ‘नौकरी की तैयारी के लिए शिक्षा’ की जगह ‘मानवीय संभावना के लिए शिक्षा’ के नए युग की शुरुआत होगी।
मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में बहुत हुआ तो शैक्षणिक सिद्धान्तों की समझ और अनुप्रयोग पर फोकस किया जाता है। इसे देखते हुए हाल में क्रिसलिस ने ”ड्रीमफाॅर द चाइल्ड“ नामक राष्ट्रव्यापी आन्दोलन की शुरुआत करके बच्चों के प्रति फिक्रमंद प्रत्येक व्यक्ति से इसकी खराब अवस्था के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान किया है।
इस पुकार का जबर्दस्त समर्थन करते हुए 1420 स्कूल के प्रधानों, 800 अभिभावकों, 350 शिक्षकों और अन्य हित धारकों ने एकजुट होकर प्रत्येक बच्चे की असाधारण मानवीय संभावना कोप्रस्फुटित करने के सपने के साथ चलने का संकल्प किया है।
क्रिसलिस के सीईओ और संस्थापक, चित्रा रवि ने कहा कि, ”भारत में 15,00,000 से अधिक स्कूल हैं, फिर भी प्रत्येक बच्चे की असाधारण मानवीय संभावना को जाग्रत करने मेंसफलता नहीं मिली है। इसके पहले कि बच्च ेपर ध्यान केन्द्रित करने के बजाए नौकरी की तैयारी पर फोकस करने वाली शिक्षा व्यवस्था में एक और पीढ़ी नष्ट हो जाए, इस व्यवस्था मे ंसुधार करना अत्यंत आवश्यक है। हमारी आँखों में एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था का सपना है जो बच्चे को नौकरी के लिए तैयार करने के डर पर आधारित न होकर, प्रत्येक बच्चे में छिपी अनंत सुंदरता को प्रगट करने पर आधारित हो। हम एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था लाना चाहते हैं जो उद्योगों के लिए नहीं, बल्कि बच्चे के लिए बनाई गई हो।“
क्रिसलिस ने 16 वर्षों के शैक्षणिक और क्षेत्र अनुसंधान के बाद मानव संभावना संरचना (ह्यूमन पटेंशन फ्रेमवर्क) तैयार किया है। यह अपनी तरह की पहली एकीकृत शैक्षणिक संरचना है जिसमें बच्चे की रचनात्मक उम्र में चिंतन शीलता के संज्ञानात्मक, सामाजिक, भावनात्मक और सूक्ष्म संज्ञानात्मक पहलुओं पर फोकस किया जाताहै। एक औसत बच्चे का 75ः समय उसके क्लास रूम में बीतता है जिसे देखते हुए इस संरचना को केजी से लेकर छठी कक्षा तक के मुख्य शैक्षणिक विषयों के साथ एकीकृत किया गया है, जो किसी भी स्कूल के एक-एक बच्चे के लिए सुलभ है।
क्रिसलिस का लक्ष्य एक बहुप्रणालीय दृष्टिकोण के सहारे शिक्षा की इस पद्धति के साथ भारत में प्रत्येक बच्चे तक पहुँचना है। इस दृष्टिकोण में एक ओपन सोर्स फ्रेमवर्क सम्मिलित है जिसे 2018 में लाँच किया जाएगा। इसे स्कूलों में मुख्य पाठ्यक्रम के साथ जोड़ा जा सकता है और उनका लक्ष्य केन्द्रीय एवंराज्य सरकारों के साथ घनिष्ठतापूर्वक काम करना है। निजी स्कूल और अभिाभाव अपने लिए थिंकरूम नामक तत्काल उपलब्ध एकीकृत पाठ्यक्रम मँगा सकते हैं।

क्रिसलिस के विषय में :
क्रिसलिस (पूववर्ती ईजेड विद्या) स्कूली शिक्षा में शैक्षणिक पारिस्थिति की तंत्र की साधारण पद्धतियों के मुकाबले में एक अग्रणी मूलभूत सुधार आन्दोलन है। इस आन्दोलन के साथ 16 वर्षों के अत्याधुनिक अनुसंधान और नवाचार के साथ-साथ 150 क्रिसलिसियनों की साहसी और जुनूनी टीम की शक्ति सम्मिलित है। संपूर्ण भारत में लगभग 450 स्कूलों ने अपने क्लास रूम्स को थिंकरूम में अपग्रेड किया है, जो स्कूलों के लिए एक परिवर्तन कारी शिक्षण रूपांतरण पाठ्यक्रम है। आइबीएम, माइक्रोसाॅफ्ट और डेल जैसे अग्रणी काॅर्पोरेट कंपनियों ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सीएस आर अभियानों पर रणनीतिक विशेषज्ञता के लिए क्रिसलिस के साथ समझौता किया है। शिक्षा में नवाचार के लिए क्रिसलिस (ईजेड विद्या) को लगभग 63,000 संगठनों में से चुनकर इटी-नाऊका प्रतिष्ठित ‘गेमचेंजर’ पुरस्कार दिया गया है।

Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar