न्यूज के लिए सबकुछ, न्यूज सबकुछ
ब्रेकिंग न्यूज़

गुजरात चुनाव के सर्वे में भाजपा के पक्ष में फतवा

सर्वे का सीधा अर्थ है किसी भी वस्तु को खोजना या संभावनाओं का पत्ता लगाना। यह शब्द अधिकतर चुनावों के दौरान सुना जाता है और जबसे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का प्रादुर्भाव हुआ है तब से लोकप्रिय हो रहा है। चुनाव पूर्व सर्वे वास्तव में कला, विज्ञान और राजनीति का अद्भुत संयोग है। इसके लिए उन मतदाताओं के छोटे, लेकिन संख्या के लिहाज से प्रतिनिधि सैंपल के साथ जुड़ने और उसके विश्लेषण की जरूरत है, जो सही तरीके से भविष्य में निर्णय लेने जा रहे लाखों लोगों के निर्णय को प्रतिबिंबित करते हैं। ये लोगों के विश्वास की महत्वपूर्ण और विश्वसनीय कड़ी का काम भी करते है।
भारत में सर्वे का अर्थ चुनावों के दौरान होने वाले सर्वेक्षणों से ही लगाया जाता है। सर्वे करनेवाली एजेंसी इस दौरान मतदाताओं का मिजाज जानने की कोशिश करती है। कई बार सर्वे सटीक और सही साबित होते है और कई बार फैल भी हो जाते है। ये सर्वे किसी टीवी चैनल के सहयोग से आयोजित किये जाते है जो सर्वे का परिणाम चर्चा और बहस करते हुए जारी करते है। खूब मीर्च मसालों का उपयोग भी इसमें किया जाता है। देश में कई नामी गिरामी सर्वे एजेंसियां कार्यरत है उनमें सीएसडीएस ,लोक नीति ,सी-वोटर, वीएमआर , एक्सिस नील्सन ,सीफोर का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। सर्वे के जन्मदाता एनडीटीवी मीडिया समूह के मुखिया प्रणव राय ने 80 के दशक के अंत में भारत में पहली बार वोटरों का मिजाज भांपने के लिए ओपिनियन पोल किया था तब किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि आने वाले समय में हर चुनाव में ऐसे ओपिनियन पोल या कहें चुनावी सर्वे लोकप्रियता की सभी सीमाएं तोड़ देंगे। हमारे देश में दो चीजों का विकास करीब-करीब एक साथ ही हुआ है। पहला इन चुनावी सर्वेक्षणों और दूसरा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या कहें समाचार चैनलों का। समाचार चैनलों की भारी भीड़ ने चुनावी सर्वेक्षणों को पिछले दो दशक से हर चुनाव के समय का अपरिहार्य बना दिया है। आज बिना इन सर्वेक्षणों के भारत में चुनावों की कल्पना भी नहीं की जाती। बल्कि कुछ समाचार चैनल तो साल में कई बार ऐसे सर्वेक्षण करवाते हैं और इसके जरिये सरकारों की लोकप्रियता और समाज को प्रभावित करने वाले मुद्दों की पड़ताल करते रहते हैं। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि आखिर भारत में इन सर्वेक्षणों का अर्थशास्त्र क्या है? आखिर इन सर्वेक्षणों को करवाने से किसका भला होता है।
टीवी चैनल टीआरपी के चक्कर में अपनी लोकप्रियता दांव पर लगा देते है। यदि सर्वे सही जाता है तो बल्ले बल्ले अन्यथा साख पर विपरीत असर देखने को मिलता है। चुनाव के पहले और मतदान के बाद कई एजेंसियां सर्वेक्षण कराती हैं और संभावित जीत- हार के अनुमान पेश करती हैं. कई बार इन सर्वेक्षणों के नतीजे चुनावी नतीजों के करीब बैठते हैं तो कई बार औंधे मुंह गिर जाते हैं । मतदाताओं का मूड भांपने का दावा करने वाले ऐसे सर्वेक्षणों में कई बार लोगों और राजनीतिक दलों की दिलचस्पी दिखाई देती है । कोई दावा नहीं कर सकता कि हमारे देश में चुनाव पूर्व सर्वेक्षण तरह विश्वसनीय होते हैं ।
देश में कई प्रमुख मीडिया घरानों ने सर्वे एजेंसियों के सहयोग से ओपिनियन पोल को अंजाम देकर अपनी भविष्यवाणी की है। अधिकतर टीवी चैनलों ने बहुचर्चित गुजरात चुनाव में भाजपा के जीतने की घोषणा करदी है। आजतक, एबीपी , सहारा ,इंडिया टीवी ,टाइम्स नाउ रिपब्लिक और न्यूज नेशन ने भाजपा के पक्ष में अपना फतवा जारी कर दिया है। इंडिया टीवी के सर्वे में भाजपा को 106 से 116 और कांग्रेस को 63 से 73 ,एबीपी ने भाजपा को 91 से 99 और कांग्रेस को 78 से 86, सहारा ने भाजपा को 106 से 116 और कांग्रेस को 63 से 73 ,टाइम्स नाउ ने भाजपा को 118 से 134 और कांग्रेस को 49 से 61 रिपब्लिक टीवी ने भाजपा को 110 से 125 और कांग्रेस को 53 से 68 तथा न्यूज नेशन ने भाजपा को 131 से 141 और कांग्रेस को 37 से 47 सीटें दी है। सट्टा बाजार में भी भाजपा का बोलबाला है। भारत के इस बढ़ते बाजार ने भाजपा को 103 हुए कांग्रेस को 73 सीटों की भविष्यवाणी की है।
गुजरात में विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले सियासी घमासान तेज हो गया है। जहां एक ओर पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की प्रतिष्ठा इस चुनाव से जुड़ी हुई है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी राज्य में पूरी ताकत झोंक दी है। पटेल समाज को अपने पक्ष में लामबंद करने के लिए कांग्रेस ने जोर-आजमाइश तेज कर दी है। गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। दोनों ही पार्टियों के लिए ये अस्तित्व की लड़ाई है। गुजरात में फिर से खिलेगा कमल या फिर 22 सालों के बाद कांग्रेस के हाथ सत्ता लगेगी।
गुजरात विधानसभा की 182 सीटों के लिए दो चरणों में मतदान होने है। 9 दिसंबर को पहले चरण के तहत 19 जिलों में मतदान होंगे। वहीं 14 दिसंबर को दूसरे चरण के तहत 14 जिलों में वोट डाले जाएंगे। 18 दिसंबर को मतगणना होगी और फैसला हो जाएगा कि गुजरात की गद्दी पर कौन बैठेगा। गौरतलब है कि गुजरात में 4.3 करोड़ मतदाता है जो 182 सीटों पर प्रत्याशियों के भविष्य का फैसला करेंगे। कुल 50 हजार 128 पोलिंग बूथों पर मतदान संपन्न कराया जाएगा।

– बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
डी-32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
मो.- 9414441218

Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar