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गुजरात विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव 2019 के लिए महत्वपूर्ण

गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 के लिए चुनाव आयोग द्वारा तारीखों का ऐलान करने के साथ ही पार्टियों की राजनीतिक रणनीतियां जोरों शोरों से शुरू हो गई हैं। गुजरात में दो दशक से भी अधिक समय तक भारतीय जनता पार्टी का शासन रहा है। जिसमें एक दशक से भी अधिक समय तक नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री रहे। गुजरात में पार्टी की मजबूत स्थिति की वजह से ही नरेंद्र मोदी को इतनी लोकप्रियता मिली। इससे पहले 2012 में जिस तरह भाजपा नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक तरफा चुनाव जीता था। उसने साफ कर दिया था कि अभी भी नरेंद्र मोदी गुजरात के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। इसी लोकप्रियता के दम पर नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के दम पर कांग्रेस को 40 सीटों पर समेट कर रख दिया था। वही कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियां भाजपा के इस अभेद्य गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश कर रही हैं। केंद्र में जिस तरह से 3 वर्ष से अधिक समय मोदी सरकार का बीता है।तथा तमाम मुद्दों पर मोदी विपक्ष के निशाने पर हैं। पाटीदार आंदोलन की वजह से भी भाजपा को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इस प्रकार मौजूदा विपक्ष सरकार को कडी चुनौती देने की कोशिश कर रहा है। क्योंकि नतीजे अगर अपेक्षा के अनुकूल नहीं रहे, तो यह सब पीएम मोदी की साख और विकास कार्यों पर सीधा सवाल खड़ा करेगा। यह मुद्दे 2019 के लोकसभा चुनावों को प्रभावित कर सकते हैं। वही विपक्ष इसे चुनावी मुद्दा बनाकर भुनाने की कोशिश करेगा। इस हिसाब से सभी पार्टी के लिए लोकसभा चुनाव 2019 के लिए गुजरात विधानसभा चुनाव महत्वपूर्ण हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के राज्य गुजरात में भाजपा 1995 से सत्ता में है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह के केंद्र में आने के बाद गुजरात विधानसभा का ये पहला चुनाव होगा।
लेकिन पिछले साढ़े तीन सालों में ये दोनों नेता अपने राज्य को भूले नहीं हैं।ये गुजरात का कई बार दौरा कर चुके हैं।
अक्टूबर के महीने में ही ‘गौरव यात्रा’ के अंतर्गत प्रधानमंत्री ने गुजरात का कई बार दौरा किया और वो 23 अक्टूबर को भी गुजरात में थे। इन दौरों में वो पार्टी के हज़ारों कार्यकर्ताओं से मिले और चुनाव की तैयारियों का जायज़ा लिया।
ऐसा लगता है, कि पार्टी चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार है। गुजरात का चुनाव प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष की प्रतिष्ठा का सवाल है।
लेकिन इस सम्भावना से भी कम ही लोग इनकार करेंगे, कि पार्टी की सीटें कम हो सकती हैं। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2012 के चुनाव में बीजेपी को विधानसभा की 182 सीटों में से 116 सीटें मिली थीं। और कांग्रेस को 60 मिली थीं ।
अगर कांग्रेस 80 सीटें भी लाने में कामयाब होती है। तो ये मोदी-शाह जोड़ी के लिए शिकस्त की तरह होगा।
कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गाँधी पिछले कुछ हफ़्तों से जोश में नज़र आते हैं। पिछले आम चुनाव में उनकी पार्टी चारों ख़ाने चित हो गई थी। जिसके बाद से मोदी-शाह ने एक कांग्रेस-मुक्त भारत का आक्रामक नारा देना बुलंद कर दिया था।
कुछ समय तक तो लगा कि उनका नारा रंग ला रहा है लेकिन पंजाब विधानसभा की हालिया जीत के बाद ये नारा अब सुनाई नहीं देता।
कुछ समय से ऐसे संकेत मिल रहे हैं। कि पार्टी में दोबारा जान फूंकने की कोशिश कामयाब हो रही है।

पंजाब के गुरदासपुर लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस की जीत, महाराष्ट्र लोकल इलेक्शन में प्रदर्शन, राहुल गाँधी के सोशल मीडिया पर मोदी-विरोधी तानों पर प्रतिक्रियाएं और हाल में उनकी गुजरात यात्रा के दौरान लोगों के उत्साह इस बात की तरफ़ इशारा हो सकता है। की पार्टी एक बार फिर से अपना सिर उठा रही

राहुल गाँधी की गुजरात यात्रा के दौरान मंदिरों में जाने से भाजपा नेता घबराए नज़र आते हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ‘ये एक ढोंग है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बोले कि ‘राहुल बाबा ने कभी पूजा की थाली नहीं उठायी और वो अब तिलक और माला पहन रहे हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक़, अगर भाजपा ‘हार्ड हिंदुत्व’ को आगे बढ़ाने में जुटी है तो कांग्रेस अब ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ को लेकर आगे बढ़ रही है।
गुजरात के दौरे में राहुल गाँधी का एक साधारण हिन्दू की तरह मंदिरों में जाना और पूजा-पाठ में हिस्सा लेना कांग्रेस की बदलती नीतियों की एक कड़ी नज़र आती है।

पंकज तिवारी
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय

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