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गुर्जरों को आरक्षण देने का बिल पारित

जयपुर। राजस्थान विधानसभा ने गुरुवार को एक बार फिर गुर्जरों और पांच अन्य पिछड़ी जातियों को पांच फीसद आरक्षण देने का बिल पारित कर दिया। हालांकि, सत्तारू ढ़ भाजपा के ही कुछ विधायक और खुद गुर्जर समुदाय इस बिल के प्रावधानों से संतुष्ट नहीं है। गुर्जरों का कहना है कि सरकार ने समझौते के अनुरू प बिल नहीं बनाया और अब हम फिर एक बार समाज के बीच जाकर आगे की रणनीति तय करेंगे।

यह किया सरकार ने-
सरकार ने विधानसभा में जो बिल पारित कराया है, उसके जरिए गुर्जरों और पांच अन्य पिछड़ी जातियों को ओबीसी कोटे में पांच फीसद आरक्षण देने के लिए अधिसूचना जारी करने की शक्तियां प्राप्त की हैं। बिल कहता है कि सरकार ओबीसी कोटे का आरक्षण एक अधिसूचना के जरिए बढ़ा सकती है। बिल में कहीं नहीं कहा गया है कि आरक्षण बढ़ाकर कितना किया जाएगा। आरक्षण कितना बढ़ाया गया, इसकी वास्तविक जानकारी तब सामने आएगी, जब इसकी अधिसूचना जारी होगी।

विधायकों ने जताई आपत्ति-
विधानसभा में जब यह बिल चर्चा के लिए रखा गया तो भाजपा विधायक प्रहलाद गुंजल ने कहा कि सरकार को सिर्फ अधिसूचना जारी करने की शक्ति लेने के लिए बिल लाने की जरूरत नहीं थी। सरकार ओबीसी का कोटा बढ़ाना चाहती थी तो इसे विधेयक में शामिल करना चाहिए था।
असंतुष्ट विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि सरकार जब भी अधिसूचना जारी करेगी तो वह कोर्ट में टिक नहीं पाएगी, क्योंकि अधिसूचना के कारण राज्य में आरक्षण 50 फीसद की सीमा से ज्यादा हो जाएगा। फूलचंद भिंडा ने कहा कि सरकार इतना ध्यान रखे कि इस आरक्षण के कारण ओबीसी में पहले से शामिल जातियों पर कोई प्रभाव न पड़े।

गुर्जर बोले, सरकार ने की वादाखिलाफी-
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रवक्ता हिम्मत सिंह गुर्जर ने कहा कि हमारा सरकार से जो समझौता हुआ था, उसमें साफ कहा गया था कि सरकार जब बिल लाएगी तो उसमें साफ तौर पर लिखा जाएगा कि ओबीसी का कोटा 21 से बढ़ाकर 26 फीसद किया जाता है और इसमें गुर्जर सहित पांच अति पिछड़ी जातियों को अति पिछड़ा वर्ग में अलग से पांच फीसद आरक्षण मिलेगा।
लेकिन सरकार ने मूल विधेयक में इसका उल्लेख ही नहीं किया। सरकार अधिसूचना के जरिए आरक्षण देना चाहती है जो कोर्ट में टिक ही नहीं पाएगा और गुर्जरों को फिर निराश होना पड़ेगा। सरकार ने वादा खिलाफी की है।

बिल सामाजिक न्याय के सिद्धांत पर-
सरकार के सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री अण चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार यह बिल सामाजिक न्याय के सिद्धांत के आधार पर लेकर आई है और कोर्ट ने जो कमियां बताई थीं, उन्हें दूर किया गया है। सुप्रीम कोर्ट अपने कई निर्णयों में आरक्षण 50 फीसद से अधिक करने की बात कह चुका है, इसलिए जो आशंकाएं बताई जा रही हैं, वे निर्मूल हैं।

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