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गोरखपुर मामलाः डॉ. कफील खान को STF ने गिरफ्तार किया

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने बीआरडी मेडिकल कालेज के एईएस वार्ड में नोडल अधिकारी रहे डॉ. कफील खान को आज गिरफ्तार कर लिया। पिछले महीने बीआरडी मेडिकल कालेज में दो दिन के दौरान 30 बच्चों की मौत के बाद खान को पद से हटा दिया गया था। खान मेडिकल कालेज के 100 बेड वाले एईएस वार्ड के नोडल अधिकारी थे। उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के महानिरीक्षक अमिताभ यश ने खान के पकड़े जाने की पुष्टि करते हुए बताया कि उसे सुबह नौ बजे पकड़ा गया और अब उसे गोरखपुर पुलिस के हवाले किया जा रहा है।

गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अध़ीक्षक अनिरूद्ध सिद्धार्थ पंकज ने बताया कि कफील को गोरखपुर के बाहरी इलाके से पकड़ा गया है। इससे पहले एसटीएफ ने 29 अगस्त को मेडिकल कालेज के प्राचार्य रहे राजीव मिश्र और उनकी पत्नी को पकड़ा था। मिश्र और उनकी डॉक्टर पत्नी पूर्णिमा शुक्ल का नाम मेडिकल कालेज में बच्चों की मौत के प्रकरण में दर्ज प्राथमिकी में है। दोनों को कानपुर में पकड़ा गया, जहां वे कथित रूप से किसी वकील से सलाह मशविरा करने गये थे।

उधर अपर सत्र न्यायाधीश शिवानंद सिंह ने एफआईआर में नामित नौ में से सात लोगों के खिलाफ शुक्रवार को गैर जमानती वारंट जारी किया था। इससे एक दिन पहले ही राजीव और पूर्णिमा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। वारंट एईएस वार्ड के प्रभारी कफील खान, एनेस्थीसिया के डॉ. सतीश, फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल, लेखाकार सुधीर पाण्डेय, सहायक क्लर्क संजय कुमार और गैस आपूर्तिकर्ता उदय प्रताप सिंह एवं मनीष भंडारी के खिलाफ जारी हुआ है। मिश्र और उनकी पत्नी को ​उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने मंगलवार को कानपुर से गिरफ्तार किया गया था। उन्हें अदालत के समक्ष पेश किया गया और अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। मिश्र को मेडिकल कालेज के​ प्रिंसिपल पद से 12 अगस्त को निलंबित कर दिया गया था। उन्होंने हालांकि बच्चों की मौत की घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उसी दिन अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

आरोप है कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन आपूर्ति में बाधा के कारण हुई क्योंकि आपूर्तिकर्ता को कई महीनों से भुगतान नहीं किया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने ऑक्सीजन की कमी से मौतों की बात से इंकार किया लेकिन मुख्य सचिव राजीव कुमार की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय जांच समिति ने मिश्र और अन्य पर लापरवाही और अन्य आरोप लगाये।

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