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गोलमाल : प्रशासनिक लापरवाही के चलते 108 परिवार 3 माह से जोह रहे है बिजली कनेक्शनों की बाट

  • दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम, फरीदाबाद में घोटाला
  • खुले दरबार में 6 लाख 70 हजार 680 रुपए प्रशासन ने किए थे एकत्रित
  • जनता से घरेलू बिजली का मीटर लगाने के नाम पर एकत्रित किया गया लाखो रुपया सरकारी खजाने में जमा करने की वजाये अधिकारी अपने इस्तेमाल में लेते रहे

फरीदाबाद ब्यूरो। मनोज तोमर

फरीदाबाद। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मनोहर लाल देश-प्रदेश से भ्रष्टाचार के खात्मे को लेकर नई-नई योजनाएं क्रियान्वित कर रहे है वहीं उनके मताहत अधिकारी व कर्मचारी उनके इन प्रयासों को धत्ता बताने में लगे हुए है। ऐसे ही एक बड़े भ्रष्टाचार का मामला फरीदाबाद जिले के गांव मवई में देखने को मिला। यहां करीब तीन माह पहले लगे खुले दरबार के माध्यम से 108 परिवारों से बिजली कनेक्शन के नाम पर लाखों रुपए ले तो लिए गए परंतु अभी तक उनके घरों में बिजली के कनेक्शन नहीं लगे है। हैरानी की बात तो यह है लोगों से बिजली कनेक्शन के नाम पर ली गई लाखों की राशि दो महीने तक सरकारी खजाने में भी जमा नहीं हुई। यह राशि दो महीने क्यों सरकारी खजाने में जमा न होकर अधिकारियों व कर्मचारियों के हाथों में घूमती रही? इसका जवाब वह 108 परिवार जानना चाहता है, जो आज भी बिजली कनेक्शन की बाट जोह रहे है। गौरतलब है कि 24 जुलाई, 2017 को फरीदाबाद जिले के गांव मवई में जिला उपायुक्त समीरपाल सरों द्वारा खुले दरबार का आयोजन किया गया था।

24 जुलाई 2017 को मवई गावं फरीदाबाद में डीसी खुला दरबार में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के अधिकारिओं ने घरेलु बिजली कनेक्शन देने के नाम पर 108 परिवारों से मौके पर ही 6210 प्रत्येक से जमा किये।कनेक्शन अप्लाई करने वालो को उपरोक्त स्लिप देकर खानापूर्ति की गई।

इस खुले दरबार में बिजली विभाग के अधीक्षक अभियंता भी मौजूद थे। खुले दरबार में मवई गांव के 108 लोगों को बिजली कनेक्शन देने के लिए प्रति व्यक्ति 6210 रुपए लिए गए थे, जिसकी बकायदा रसीद भी दी गई थी। उस दौरान ग्रामीणों को यह बताया गया था कि एक सप्ताह से 15 दिन के अंदर उनके यहां बिजली कनेक्शन लग जाएंगे परंतु अभी तक उनके यहां बिजली कनेक्शन नहीं लगा है, जिससे साबित होता है कि सरकार पर अफसरशाही पूरी तरह से हावी है। यहां यह सोचनीय विषय है कि 108 लोगों से लिए गए 6 लाख 70 हजार 680 रुपए सरकारी खजाने में जमा न होकर दो महीनों तक किन-किन हाथों में घूमते रहे और उन गरीब ग्रामीणों को तीन माह बीतने के बाद भी बिजली कनेक्शन क्यों नहीं दिया गया। उधर जब इस बाबत जिला उपायुक्त का तबादला होने के कारण फिलहाल किसी भी अधिकारी व कर्मचारी इस मामले में जानकारी देने से इंकार कर दिया वहीं जब बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता से बात करने का प्रयास किया गया तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

क्या कहते है क्षेत्रीय कांग्रेसी विधायक
तिगांव विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेसी विधायक ललित नागर का कहना है कि यह गंभीर मामला है और यह जांच का विषय है कि दो महीने तक लोगों की खून-पसीने की कमाई किस अधिकारी व कर्मचारी के पास रही। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता से बात करके ग्रामीणों को बिजली कनेक्शन दिलाने का प्रयास करेंगे।

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