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गौड़संस रियलटेक के मालिक मुनाफाखोरी के दोषी, 33 परियोजनाओं की होगी जांच

नई दिल्ली: माल एवं सेवा कर (जीएसटी) मुनाफाखोरी रोधक प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की कंपनी गौड़संस रियलटेक को 19.72 करोड़ रुपये की मुनाफाखोरी का दोषी पाया है. कंपनी ने घर के खरीदारों को कर की निचली दरों का लाभ हस्तांतरित नहीं किया.
राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधक प्राधिकरण (एनएए) ने मुनाफाखोरी की राशि को सही ठहराते हुए मुनाफाखोरी रोधक महानिदेशालय (डीजीएपी) को गौड़संस रियलटेक की 33 अन्य परियोजनाओं की जांच करने को कहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर कर की निचली दरों का लाभ फ्लैट खरीदारों को दिया गया है या नहीं.
इस शिकायत के बाद कि कंपनी ने यमुना एक्सप्रेसवे (ग्रेटर नोएडा) की ‘16वीं पार्क व्यू’ परियोजना में फ्लैटों की बिक्री के दौरान मुनाफाखोरी की है, डीजीएपी ने इस मामले की जांच शुरू की थी.
आवेदक ने आरोप लगाया था कि एक जुलाई, 2017 को जीएसटी लागू होने से पहले गौड़संस ने उससे 12 प्रतिशत का जीएसटी लिया था. फ्लैट खरीदार ने दावा किया कि उसने फ्लैट का पूरा भुगतान 30 जून, 2017 या उससे पहले कर दिया था. लेकिन रीयल्टी कंपनी ने नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था लागू होने से पहले किए गए भुगतान पर 12 प्रतिशत जीएसटी की मांग करते हुए फ्लैट का दाम 28.78 लाख रुपये से बढ़ाकर 30.68 लाख रुपये कर दिया.
डीजीएपी ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि कंपनी ने मूल कीमत में 5.77 प्रतिशत की कटौती नहीं कर 2,349 फ्लैट खरीदारों को 19,72,09,203 रुपये के इनपुट कर क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ नहीं दिया. गौड़संस रियलटेक ने भी दावा किया है कि उसने 908 फ्लैट खरीदारों को 28,22,65,749 रुपये का लाभ हस्तांतरित किया है.
एनएए ने अपने आदेश में कहा कि गौड़संस रियलटेक को जुलाई, 2017 से मार्च, 2019 के दौरान अतिरिक्त इनपुट कर क्रेडिट से कारोबार के 5.77 प्रतिशत का लाभ हुआ, जो उसने खरीदारों को नहीं दिया.

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