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‘चिड़ियाघर’ में बाबूजी मिटायेंगे धार्मिक अंधविश्वास

‘चिड़ियाघर’ हमेशा से ही अपने दर्शकों को नैतिक पाठ और मूल्यों को सिखाता आया है। इसके आने वाले एपिसोड में, बाबूजी ‘चिड़ियाघर’ के सदस्यों को उन सामाजिक अंधविश्वासों के बारे में बताने वाले हैं, जिन्हें समाज से बाहर करने की जरूरत है। ‘चिड़ियाघर’ का प्रसारण सोमवार-शुक्रवार, शाम 7.30 बजे केवल सोनी सब पर किया जाता है।

इस ट्रैक में दिखाया जाता है कि गधा प्रसाद (जीतू श्विारे) तरबूज खरीदता है, लेकिन जल्द ही कोयल को तरबूज के बाहरी हिस्से में भगवान की आकृति दिख जाती है। धार्मिक और अंधविश्वासी (अदिति सजवान) होने के कारण कोयल सबको तरबूज खाने से रोक देती है और वो कहती है कि यह साक्षात् भगवान का प्रसाद है। इस मौके का फायदा उठाते हुए घोटक (परेश गनात्रा) तुरंत ही इस स्थिति से लाभ कमाने की सोचता है। चिड़ियाघर मोहल्ले में हर कोई उसका आर्शीवाद लेना चाहता है। यह देखकर बाबूजी (राजेंद्र गुप्ता), नाराज हो जाते हैं और घोटक के इस स्थिति से पैसा कमाने का विरोध करते हैं। लेकिन घोटक उनकी बात नहीं सुनता। उसके इस काम का सबक सिखाने के लिये, बाबूजी तरबूज खा लेते हैं। जब भक्तों को इस बात का पता चलता है, सभी गुस्से में भर जाते हैं और चिड़ियाघर पर हमला कर देते हैं।

इस बार बाबूजी चिड़ियाघर को किस तरह बचायेंगे?

घोटक की भूमिका निभा रहे, परेश गणात्रा ने इस ट्रैक के बारे में बताते हुये कहा, ‘‘चिड़ियाघर’ हमेशा ही बड़ी ही सावधानी से समाज के संवदेनशील मुद्दों पर चर्चा करता आया है और सही समय पर सही बात सिखाई है। हमारा समाज जिस अंधविश्वास का सामना कर रहा है, यह ट्रैक उस पर केंद्रित है, जहां हम आंखें मूंदकर दूसरों के विश्वास को मान लेते हैं। हम लोगों को अंधविश्वासी होने से बचाना चाहते हैं।’’

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