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चीनी सामान की ऑनलाइन खरीदारी की तय होगी सीमा

नई दिल्ली । चीनी सामान की ऑनलाइन खरीदारी से घरेलू उत्पादों पर पड़ रहे असर से सरकार चिंतित है। लिहाजा, सरकार चाइनीज ई-कॉमर्स साइट्स और ऐप्स के जरिए सामान की ऑनलाइन खरीदारी पर बंदिश लगाने का प्लान बना रही है। वह चाइनीज माल की ऑनलाइन खरीदारी के चलते डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग पर पड़ रहे नकारात्मक असर से चिंतित है। सरकार का यह भी मानना है कि ऐसी खरीदारी से घरेलू कानून का उल्लंघन हो रहा है। डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन ने ऐसी खरीदारी (आमतौर पर गिफ्ट के तौर पर आते हैं) की लिमिट तय करने का सुझाव दिया है। उसका कहना है कि हर साल अधिकतम चार नग प्रति व्यक्ति की खरीदारी की इजाजत दी जानी चाहिए।
एक वरिष्ठ अधिकारी, ‘लिमिट लगाने का सुझाव दिया है लेकिन अंतिम फैसला कस्टम अथॉरिटीज को लेना होगा। हालांकि जरूरी दवाओं की खरीदारी पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं होगी।’ उन्होंने कहा कि इस रूट से बड़े पैमाने पर इंपोर्ट हो रहा है और उससे इंपोर्ट डेफिसिट में बढ़ोतरी हो रही है। 2017-18 में चीन को 33 अरब का एक्सपोर्ट हुआ था जबकि वहां से 76.2 अरब का सामान मंगाया गया था। मौजूदा रूल्स के मुताबिक 5000 रुपये तक के पर्सनल यूज के गिफ्ट पर कस्टम्स ड्यूटी नहीं लगती। हालांकि ड्यूटी चुकाए बिना ऐसी शॉपिंग को गिफ्ट बताकर सीधे कस्टमर को डिलीवरी दी जाती है। ईकॉमर्स मामले के एक विशेषज्ञों ने कहा, ‘प्रॉब्लम यह है कि चीन से बड़ी संख्या में ऑनलाइन गिफ्ट आ रहे हैं। चाइनीज वेबसाइट्स सस्ते प्रोडक्ट्स के लिए मशहूर हैं। कस्टमर्स उनसे सीधे इंपोर्ट कर सकते हैं और इंडिया में जहां चाहे डिलीवरी ले सकते हैं। इंडियन इंडस्ट्री ने क्लब फैक्टरी जैसी चाइनीज ईकॉमर्स साइट्स, अली एक्सप्रेस और शीइन जैसी चाइनीज ईकॉमर्स साइट्स के खिलाफ 5,000 रुपये तक के गिफ्ट के ड्यूटी फ्री होने से जुड़े फॉरेन ट्रेड नॉर्म्स का उल्लंघन की शिकायत की है।
कुछ महीने पहले भारत में पहली वर्षगांठ मनानेवाली शीइन टीयर 1 और टीयर 2 शहरों में 15000 पिन कोड पर सामान डिलीवर कर रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में शीइन का बिजनेस एक साल में तीन गुना हो गया है। यह रोजाना 10 हजार से ज्यादा ऑर्डर ले रही है और 10 लाख डेली एक्टिव यूजर्स को अपनी सर्विस दे रही है। महिलाओं के लिए वेस्टर्न फैशन प्रोडक्ट्स की सेल से बिजनेस शुरू करनेवाली शीइन को मिलनेवाले ऑर्डर्स का साइज 1000 से 1500 रुपये के बीच है। क्लब फैक्टरी ने सितंबर में बयान जारी कर कहा था कि उसके दुनियाभर में 7 करोड़ से ज्यादा यूजर हैं जिनमें से 4 करोड़ इंडिया के हैं। दूसरे सरकारी अधिकारी ने कहा कि चीन को छोड़ बाकी दूसरे देशों की ईकॉमर्स साइट्स ट्रांजैक्शन के लिए गवर्नमेंट आईडी प्रूफ मांगती हैं लेकिन चाइनीज कंपनियां ऐसा नहीं कर रही हैं। इसके चलते ऐसे ट्रांजैक्शंस पर नजर रखना आसान नहीं होता। विशेषज्ञों का कहना है कि बंदिश लागू कराना आसान नहीं होगा क्योंकि सामान कूरियर और पोस्टल गिफ्ट शिपमेंट के जरिए सीधे कस्टमर के घर भेजा जाता है।

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