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जाकिर पर कसेगा शिकंजा ?

विवादास्पद धार्मिक उपदेशक जाकिर नाइक के मलेशिया में होने की खबर के सामने आने के साथ ही भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण को लेकर विचार विमर्श शुरू कर दिया है ,वैसे अभी सरकार के भीतर ही इसके तमाम कानूनी व अन्य पहलुओं पर विचार किया जा रहा है । विचार विमर्श और अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में अपने केस की स्थिति का जायजा लेने के बाद भारत , मलेशिया सरकार से इस बारे में आग्रह करेगा। मलेशिया से आ रही सूचना के अनुसार उससे अब इसमें कोई दो राय नहीं है कि जाकिर नायक वहीं पर है ,इस बारे में सरकार विचार कर रही है और जल्द ही आधिकारिक तौर पर अनुरोध भेजा जाएगा। दरअसल भारत यह नहीं चाहता कि आनन फानन में प्रत्यर्पण के लिए अनुरोध भेज दिया जाए इसके पहले भारत मलेशिया के बीच मौजूदा प्रत्यर्पण समझौतों के स्वरूप को देखना होगा कि उस के तहत नायक को भारत लाने की कोशिश की जा सकती है? या नहीं वैसे दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि फरवरी 2011 से लागू है , इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि दोनों देश एक दूसरे में जांच एजेंसियों की तरफ से वंचित व्यक्तियों के प्रत्यर्पण की मांग कर सकते हैं।अब देखना ये होगा कि आखिर कबतक जाकिर नाइक भारत के शिकंजे से बचा रहता है?
देखने वाली बात यह भी रहेगी कि भारत में जो जाकिर नाइक के समर्थक हैं क्या सरकार उनपर भी शिकंजा कसने में कामयाब होगी?अगर उस समय कानून व्यवस्था को दुरुस्त नही रखा गया तो कोई नया काला अद्याय भी भारत के साथ जुड़ सकता है।इसलिए भारत सरकार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच सामंजस्य स्थापित करते हुए नाइक को उसकी सही जगह पहुचाना है।

पंकज तिवारी
बीएचयू

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