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जीएसटी के कारण लगातार देश में व्यापार पिछड़ रहा है,

फतेहाबाद। हरियाणा प्रदेश व्यापार मण्डल के प्रान्तीय अध्यक्ष व अखिल भारतीय व्यापार मण्डल के राष्ट्रीय महासचिव बजरंग दास गर्ग ने पत्रकार सम्मेलन में कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा देश में जीएसटी लागू करने से देश व प्रदेश में व्यापार पूरी तरह पिछड़ा है, क्योंकि सरकार ने जीएसटी को बहुत जटील बनाकर व टैक्सों में अनाप-शनाप बढ़ोतरी करके जनता की कमर तोड़ कर रखी दी है, जबकि सरकार ने जीएसटी लागू करने से पहले घोषणा की थी कि जीएसटी में एक टैक्स प्रणाली होगी, मगर जीएसटी में टैक्स फ्री के अलावा 5 प्रकार के टैक्स 3, 5, 12, 18 व 28 प्रतिशत टैक्स लगा दिया है। जिन वस्तुओं पर 5 व 12.5 प्रतिशत टैक्स था, उसे बढ़ाकर 28 व 18 प्रतिशत भारी भरकम टैक्स लगा दिया है। जबकि 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने के बाद सरकार की घोषणा के अनुसार मार्केट फीस व सैस समाप्त होनी थी। वह एक साल बितने के बाद भी सरकार ने समाप्त ना करके देश के व्यापारी, किसान व आम जनता के साथ धोखा किया है। प्रान्तीय अध्यक्ष बजरंग दास गर्ग ने कहा कि जिन वस्तुओं पर टैक्स कम था, उन वस्तुओं पर केन्द्र सरकार ने टैक्स बढ़ा दिया, अनेकों वस्तुओं पर टैक्स नहीं था उन पर टैक्स लगा दिया और पैट्रोल व डीजल जैसी आम उपयोग में आने वाले आईटम जिस पर भारी भरकम टैक्स है, उस पर सरकार ने अभी तक टैक्स कम नहीं किया। जो जनता के साथ ज्यादति है। जीएसटी को इतना जटिल बनाया गया है, कि आम व्यापारी रिर्टन भरने व लेखा-जोखा रखने में सारा दिन लगा रहा है। केन्द्र सरकार ने एक साल में लगभग 100 बार जीएसटी में संशोधन कर के अधिसूचना जारी करने के बाद भी जीएसटी को सरल नहीं बना पाई है, जिसके कारण जीएसटी से देश का व्यापारी व आम जनता परेशान है। प्रान्तीय अध्यक्ष बजरंग दास गर्ग ने कहा कि जीएसटी के कारण एक साल में लगभग सरकार को 4 लाख करोड़ रुपये की टैक्स की प्राप्ती ज्यादा हुई है। सरकार का जनता से ज्यादा टैक्स वसूलने के साथ-साथ अच्छी सुविधा देने का फर्ज बनता है, मगर सरकार देश की आम जनता को किसी प्रकार की सुविधा व रियायतें देने में विफल रही है। प्रान्तीय अध्यक्ष बजरंग दास गर्ग ने कहा कि केन्द्र सरकार को जीएसटी में पूरी तरह सरलीकरण करके टैक्स की दरें टैक्स फ्री के अलावा आम उपयोग में आने वाली वस्तुओं पर 5 प्रतिशत व जनरल आईटमों पर अधिकतम 15 प्रतिशत टैक्स से ज्यादा नहीं होना चाहिए। जबकि प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी व केन्द्री मन्त्री अरूण जेटली ने खुद ब्यान दिया था कि 28 व 18 प्रतिशत टैक्स की दरें ज्यादा हैं, उसे कम किया जाएगा। बड़े अफसोस की बात है कि एक साल में भी सरकार जीएसटी में टैक्स की दरें कम नहीं कर पाई है जो जनता के साथ अन्याय है। सरकार को अपने वायदे के अनुसार जीएसटी लगाने के बाद मार्केट फीस व सैस को समाप्त किया जाए व पैट्रोल व डीजल में टैक्स की दरें कम करके उसे भी जीएसटी के दायरे में लाया जाए व 25 लाख रुपये तक की बिक्री करने वाले छोटे व्यापारियों को कर मुक्त रखा जाए ताकि देश में पिछड़ा हुआ व्यापार पूर्ण पटड़ी पर आ सके।

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