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जीडीपी वृद्धि से भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत

जीडीपी ने गुजरात चुनाव से पहले मोदी सरकार को बड़ी राहत दी है। देश की जीडीपी में 0.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में आई उछाल को इस वृद्धि का कारण बताया जा रहा है। जुलाई-सितंबर त्रैमास में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का प्रदर्शन शानदार रहा है। इस अवधि में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ 1.2 प्रतिशत से बढ़ कर 7 प्रतिशत पहुंच गई है। ग्रामीण इलाकों के साथ शहरी इलाकों में मांग बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की परफॉर्मेंस में जबरदस्त उछाल आया है। गुरुवार को सरकार की ओर से जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े जारी किए गए। सितंबर तिमाही में 6 फीसदी से अधिक की वृद्धि दर्ज करने वाले क्षेत्रों में विनिर्माण, बिजली, गैस, जल आपूर्ति और अन्य उपयोगिता सेवाएं और व्यापार, होटल, परिवहन और संचार और प्रसारण से संबंधित सेवा शामिल हैं। जीएसटी के लागू होने के बाद ये आंकड़ा संतोषजनक है। इससे उम्मीद की जा सकती है कि अब जीएसटी के बुरे नतीजे हटने शुरू हो गये हैं। यही वजह है कि दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर का जो विकास दर बढ़कर सामने आया है, वो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत हैं। लगातार 5 तिमाही के गिरावट के बाद जीडीपी में ग्रोथ बेहद उत्साहित करने वाला है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड ने फिस्कल ईयर 2017-18 के लिए जीडीपी ग्रोथ 6.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। वहीं, एशियन डेवलपमेंट बैंक ने फिस्कल ईयर 2017-18 के लिए जीडीपी ग्रोथ 7 फीसदी और इकोनॉमिक कॉपरेशन एंड डेवलपमेंट ने 6.7 फीसदी ग्रोथ रहने का अनुमान जताया है।
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार पिछले साल की दूसरी तिमाही में भारत की कुल जीडीपी 29.79 लाख करोड़ की थी, इस बार बढ़कर 31.66 लाख करोड़ की हो गई है। यानी पिछले साल की तुलना में 1 लाख 87 हजार करोड़ बढ़ गया है जो बताता है कि विकास दर 6.3 प्रतिशत हो गई है। जीडीपी में बढोतरी दर्ज किये जाने पर उद्योग जगत ने प्रसन्नता जताते हुये कहा है कि इससे आर्थिक गतिविधियों के पटरी आने और उपभोग बढ़ने का पुख्ता प्रमाण मिला है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि भारतीय इकोनॉमी में लगातार सुधार हो रहा है और अभी जीडीपी बढ़कर 7-8 फीसदी तक जाने की उम्मीद है। लगभग तीन सालों में पहली बार ऐसा हो रहा है जब भारतीय इकोनॉमी पॉजिटिव डायरेक्शन में है। मतलब साफ है कि अब नोटबंदी और जीएसटी का प्रभाव खत्म होने लगा है । माना जा रहा है कि बीजेपी को गुजरात चुनावों में इस अच्छी खबर का फायदा मिल सकता है।
नोटबंदी और जीएसटी के बाद जीडीपी में आई गिरावट की देश में खासी आलोचना हो रही थी। जुलाई से सितम्बर की त्रैमासिक गणना में जीडीपी ग्रोथ 6.3 फीसदी दर्ज की गई है। इससे पूर्व के त्रैमास में जीडीपी ग्रोथ 5.7 फीसदी थी। यह तीन साल में सबसे कम जीडीपी ग्रोथ थी। 1 जुलाई से देश में जीएसटी लागू होने के बाद जीडीपी का यह पहला आंकड़ा है। पिछले कुछ समय से देश की अर्थव्यवस्था में जारी गिरावट को लेकर सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था। मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर थी। पूर्व प्रधानमंत्री और विख्यात अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह भी लगातार सरकार के रवैये से नाखुश थे। मगर इस बार जीडीपी ग्रोथ रेट यानी सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर में वृद्धि देखने को मिली है। इससे देश और विदेश में सरकार की साख में वृद्धि हुई है।
जीडीपी को लेकर देश में भारी चर्चा हो रही है। आखिर ये जीडीपी है क्या और इसकी इतने व्यापक स्तर पर चर्चा क्यों हो रही है। यह जानना देशवासियों के लिए बहुत जरुरी है। कहां से आया इसका विचार। जीडीपी को सबसे पहले अमेरिका के एक अर्थशास्त्री साइमन ने 1935-44 के दौरान इस्तेमाल किया था। इस शब्द को साइमन ने ही अमेरिका को परिचय कराया था। यह वह समय था जब विश्व की बैंकिंग संस्थाएं आर्थिक विकास का अनुमान लगाने का काम संभाल रहीं थी उनमें से ज्यादातर को एक शब्द इसके लिए नहीं मिल पा रहा था। जब साइमन ने इस शब्द से अमेरिका की कांग्रेस में इस जीडीपी शब्द को परिभाषित करके दिखाया तो उसके बाद अंतरराष्ट्री मुद्रा कोष ने इस शब्द को इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। तभी से यह शब्द सब के उच्चारण में आगया।
जीडीपी को सरल भाषा में हम सकल घरेलू उत्पाद कहते है। किसी भी देश की आर्थिक स्थिति को मापने का सबसे जरूरी पैमाना है जीडीपी। जीडीपी किसी निश्चित अवधि के दौरान वस्तु और सेवाओं के उत्पादन की कुल कीमत है। भारत में जीडीपी की गणना हर तीसरे महीने यानी तिमाही आधार पर होती है। ये उत्पादन या सेवाएं देश के भीतर ही होनी चाहिए। भारत में कृषि, उद्योग और सर्विसेज यानी सेवा तीन प्रमुख घटक हैं जिनमें उत्पादन बढ़ने या घटने के औसत के आधार पर जीडीपी दर होती है। ये आंकड़ा देश की आर्थिक तरक्की का संकेत देता है। सरल शब्दों में अगर जीडीपी का आंकड़ा बढ़ा है तो आर्थिक विकास दर बढ़ी है और अगर ये पिछले तिमाही के मुकाबले कम है तो देश की माली हालत में गिरावट का रुख है।
यदि हम कहते हैं कि देश की जीडीपी में प्रति वर्ष तीन फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। तब यह समझा जाना चाहिए कि अर्थव्यवस्था तीन फीसदी की दर से बढ़ रही । लेकिन अक्सर इस आंकड़े में महंगाई दर को शामिल नहीं किया जाता है। भारत में जीडीपी की गणना प्रत्येक तिमाही में की जाता है। जीडीपी का आंकड़ा अर्थव्यवस्था के प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में उत्पादन की वृद्धि दर पर आधारित होता है।
रेटिंग एजेंसी मूडी, जिसने इस महीने के शुरू में भारत के सार्वभौम रेटिंग को अच्छा बताया था । अब इससे उम्मीद है कि इस वित्तीय वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.7 फीसदी की दर से बढ़ेगी और 2018-19 में बढ़कर 7.5 फीसदी हो जाएगी ।
लेखक वाणिज्य एवं अर्थशास्त्र की व्याख्याता है

डॉ मोनिका ओझा
134 गुरु नानक पुरा, राजा पार्क
जयपुर – 302004 राजस्थान

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