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जैविक कचरे से बनी मीथेन गैस से रसोईयों में पकेगा खाना

फरीदाबाद। रसोई से निकलने वाला जैविक कचरा अब महिलाओं की परेशानी का सबब बनने की बजाए उनकी रसोई को चलाने में सहायक साबित होगा। जैविक कचरे से बनी मीथेन गैस से अब महिलाएं रसोई में गैस स्टोव पर खाना पका सकेगी। काबिले गौर यह है कि रसोई से निकलने वाला जैविक कचरा अभी तक देश की महिलाओं के लिए सबसे बड़ा चिंता का सबब बना हुआ था। रसोई से निकलने वाले जैविक कचरे का ठीक से निष्पादन न होने की स्थिति में अक्सर देखने को मिलता था कि इस कचरे के चलते रसोई में जीवाणु पनप जाते थे। जिससे घर का माहौल भी प्रदूषित हो जाता था और घर के सदस्य बीमार तक पड़ जाते थे। देश की महिलाओं के समक्ष पैदा हो रही इस स्थिति से निपटने के लिए इंडियन ऑयल ने एक कारगर योजना पर काम करना शुरू कर दिया है। पहले अक्सर देखने को मिलता था कि गांवों में गोबर के निष्पादन के लिए गोबर गैस प्लांट लगाए गए जिससे गोबर का ठीक से निष्पादन तो हुआ ही साथ-साथ गोबर गैस प्लांट से निकलने वाली गैस का उपयोग रसोई में भी किया जाने लगा। रसोई से निकलने वाले जैविक कचरे के संदर्भ में भी ठीक इसी पैटर्न पर काम किया जा रहा है। कार्ययोजना के तहत शहर में स्थित रेस्टोरेंटों, होटलों, ढाबों, मंदिरों के अलावा घर की रसोईयों से निकलने वाले जैविक कचरे को एक स्थान पर एकत्र कर उससे प्लांट में मीथेन गैस बनाई जाएगी और फिर इस गैस को रसोईयों तक उपयोग के लिए पहुुंचाया जाएगा। इस कार्य योजना के अमल में आ जाने के बाद रसोईयों में गृहणियों के लिए एक समस्या बन रहे जैविक कचरे का तो निष्पादन हो ही सकेगा साथ ही साथ उनकी गैस की मांग की पूर्ति भी हो सकेगी।  एक अनुमान के अनुसार अकेले औद्योगिक नगरी फरीदाबाद की रसोईयों से ही छह सौ से सात सौ टन के करीब जैविक कचरा निकलता है और अगर इस कचरे को ठीक से निष्पादन कर गैस में रूपातंरित किया जाए तो शहर की गैस संबंधी समस्या का भी बड़े स्तर पर निदान हो सकेगा। हाल फिलहाल इस कार्य योजना को अमली जामा पहनाने के लिए बाईपास रोड़ पर प्रोजेक्ट साइड का चयन किया जा रहा है।

महिलाओं की जैविक कचरा निष्पादन संबंधी समस्या का होगा समाधान

क्या कहते हैं आर एण्ड डी के निदेशक

इंडियन ऑयल आर एण्ड डी के निदेशक डा. एसएसबी रामाकुमार का कहना है कि देश के महारत्नों में शामिल इंडियन ऑयल ने हमेशा ही देश की प्रगति में अहम योगदान दिया है। जैविक अवशिष्ट का बायोमीथेनेसन तकनीकी से ऊर्जा में रूपातंरण किया जाएगा। इससे जैविक अवशिष्ट से पनपने वाली समस्या का निदान तो हो ही सकेगा। साथ ही साथ महिलाओं को रसोई में उपयोग के लिए गैस भी उपलब्ध हो सकेगाी।

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