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टीम में वापसी के लिये बहुत मेहनत की थी: गांगुली

कोलकाता। पूर्व भारतीय कप्तान सौरभ गांगुली ने कहा है कि जब उन्हें कप्तान होने के बावजूद राष्ट्रीय टीम से बाहर किया गया था तो वापसी के लिये उन्होंने बहुत पसीना बहाया था। गांगुली ने यहां इंडिया टुडे कान्क्लेव ईस्ट 2017 कार्यक्रम में शुक्रवार को कहा कि जब वह भारतीय टीम के कप्तान बने थे तो उन्हें लगता था कि दुनिया उनके पैरों में है लेकिन फिर उन्हें ही अचानक टीम से बाहर होना पड़ा। भारतीय टीम के सबसे सफल कप्तान माने जाने वाले गांगुली ने कहा“ मुझे टीम से बाहर किये जाने पर ही मैं बेहतर इंसान बन पाया।”
गांगुली को उस समय टीम से बाहर किया गया था जब वह भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान थे। उनकी जगह फिर राहुल द्रविड़ को कप्तान बनाया गया। उन्हें सितंबर 2005 में टीम से बाहर किया गया और 2006 में भी वह वापसी नहीं कर पाये थे और 11 सीरीज़ से लगातार बाहर रहे। हालांकि उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ जनवरी 2007 में वापसी की और 2008 में संन्यास तक टीम में उनकी जगह बनी रही।

उन्होंने कहा“ आपके पास जब बड़ी नौकरियां होती हैं तो दबाव भी आता है। लेकिन यदि आप लगातार इसी के बारे में सोचते रहेंगे तो काम नहीं कर पाएंगे। मुझे टीम से यह कहकर बाहर किया गया था कि मैं फिट नहीं हूं। लेकिन आपके पास कोई विकल्प नहीं होता है। लेकिन जीवन में आये मौकों का फायदा उठाकर आगे बढ़ना ही अहम है।”
पूर्व क्रिकेटर ने कहा“ जब मैं कप्तान था तो मुझे लगता था कि दुनिया मेरे पैरों में है। लेकिन फिर मैं ही टीम से बाहर हो गया। अधिकतर कप्तानों के साथ ऐसा नहीं हेाता है। महेंद्र सिंह धोनी ने खुद ही कप्तानी छोड़ी लेकिन विराट कोहली ने उनकी जगह को बेहतरीन ढंग से संभाला है। लेकिन उस मुश्किल दौर ने मुझे बेहतर इंसान बनाया।”
गांगुली ने साथ ही कहा कि पाकिस्तान के विश्व विजेता कप्तान इमरान खान ने उनका बहुत मनोबल बढ़ाया। उन्होंने कहा“ इमरान और मेरा रिश्ता बहुत मजबूत है। उन्होंने मुझे कहा कि जब आप विमान में बादलों को नीचे देखते हैं तो लगता है कि हमें और ऊपर उड़ना है। मैंने उनके शब्दों को याद रखा और बहुत मेहनत की।”
पूर्व कप्तान ने कहा“ मुझे नहीं चुने जाने पर बहुत गुस्सा आता था लेकिन मुझे कारण नहीं पता था। मैंने उन 10 वर्षाें में सचिन तेंदुलकर के वनडे से अधिक रन बनाये। मैंने 2006 में गुस्से में आकर एक दिन ईडन गार्डन के 21 चक्कर मारे। ”
13 जुलाई 2002 को ऐतिहासिक लार्ड्स मैदान पर नेटवेस्ट ट्राफी के फाइनल में जीत हासिल करने के बाद अपनी शर्ट निकालकर लहराने के क्षण को याद करते हुये गांगुली ने कहा“ यह उस समय अचानक हो गया था। टीम जीत गयी थी हम खुश थे और मैंने वह काम कर डाला। लेकिन मैं ऐसा दोबारा नहीं करूंगा।”
गांगुली ने कहा“ मैं ऐसा कभी नहीं करूंगा। जब भी कोई खेल चैनल इस फुटेज को दिखाता है तो मैं प्रोड्यूसर को फोन कर कहता हूं कि मैंने 20 हजार से अधिक अंतरराष्ट्रीय रन और कई शतक बनाये हैं लेकिन प्रोड्यूसर कहता है कि वह यही दिखाना चाहता है। हालांकि वह क्षण मेरे संतोष का नतीजा था लेकिन यह मत भूलिये कि लार्ड्स में टेस्ट पदार्पण में शतक बनाने के कारण मेरा नाम वहां बोर्ड पर अंकित है। वह बात मेरे लिये अधिक अहम है।”

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