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डेंगू के जहरीले डंक के खौफ ने की लोगों की नींद हराम

सरकारी व निजी अस्पतालों में बढ़ी डेंगू पीडि़त मरीजों की संख्या

फरीदाबाद। बल्लभगढ़ सहित पूरे जिले में डेंगू के जहरीले डंक के खौफ ने लोगों की नींद हराम कर दी है। सामान्य बुखार होने पर भी मरीजों को डेंगू की जांच के लिए टेस्ट करवाना पड़ रहा है। बुखार पीडि़त मरीजों के कारण सरकारी व निजी अस्पतालों के बेड फुल हो चुके हैं और मरीजों को भर्ती होने की भी जगह नहीं मिल रही है। विवश होकर मरीजों ने फरीदाबाद व दिल्ली के अस्पतालों का रुख कर लिया है। लोगों में डेंगू के खौफ का कुछ निजी अस्पताल भी खूब फायदा उठा रहे हैं। बल्लभगढ़ के सिविल अस्पताल में प्रतिदिन बुखार पीडि़तों की लम्बी कतारें लगी रहती है। बुखार के मामले आने पर डाक्टर तुरंत उन्हें ब्लड टेस्ट की सलाह देते है और खासकर डेंगू टेस्ट की। डेंगू के मरीजों की संख्या के मामले में निजी अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग सभी चुप्पी साधे हुए हैं। निजी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती होने वाले बहुत से लोगों के ब्लड टेस्ट में डेंगू पॉजीटिव मिल रहा है। बल्लभगढ़ के सिविल अस्पताल में प्रतिदिन 350 से 400 के बीच मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं, इनमें बुखार से पीडि़त मरीज की संख्या 140 से 160 के बीच है, लेकिन भर्ती केवल 10-12 ही मरीज हो रहे हैं। सुविधाओं और देखरेख की कमी को देखते हुए अधिसंख्य मरीज निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं, जिसके चलते निजी अस्पतालों में बेड़ भी नहीं मिल रहे हैं। कई मरीज को मजबूरीवश नर्सिंग होमों में भी अपना इलाज करवाने को मजबूर हो रहे है। वरिष्ठ चिकित्सक डा. डी.सी. पाण्डेय के अनुसार डेंगू तीन तरह का होता है। डेंगू मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। ये मच्छर दिन में, खासकर सुबह काटते हैं। एडीज इजिप्टी मच्छर बहुत ऊंचाई तक नहीं उड़ पाता। डेंगू क्लासिकल (साधारण) डेंगू बुखार, डेंगू हैमरेजिक बुखार व डेंगू शॉक ङ्क्षसड्रोम तीन प्रकार का होता है। इनमें दूसरे व तीसरे तरह का डेंगू ज्यादा खतरनाक होता है। बुखार में आमतौर पर प्लेटलेट्स कम होती हैं। यदि प्लेटलेट्स एक लाख से कम हो जाएं तो अस्पताल में भर्ती करवाना चाहिए। डा. पाण्डेय ने डेंगू हैमरेजिक बुखार के लक्ष्णों के बारे में बताया कि इसमें नाक और मसूढ़ों से खून आना, शौच या उलटी में खून आना, स्किन पर गहरे नीले-काले रंग के छोटे या बड़े चिकत्ते पड़ जाना वहीं डेंगू शॉक ङ्क्षसड्रोम में मरीज का  बेचैन होना,  तेज बुखार के बावजूद स्किन ठंडी महसूस होना,  नाड़ी कभी तेज और कभी धीरे चलना -ब्लड प्रेशर एकदम लो हो जाना आदि शामिल है। उन्होंने बताया कि पहले स्तर पर एंटीजन ब्लड टेस्ट (एनएस-1) डेंगू शुरू में ज्यादा पॉजिटिव आता है, जबकि बाद में धीरे-धीरे पॉजिविटी कम होने लगती है। इसके तीन-चार दिन बाद एंटीबॉडी टेस्ट (डेंगू सिरॉलजी) कराना बेहतर है। डेंगू की जांच कराते हुए वाइट ब्लड सेल्स का टोटल काउंट और अलग-अलग काउंट करा लेना चाहिए। इस टेस्ट में प्लेटलेट्स की संख्या पता चल जाती है। डेंगू के टेस्ट ज्यादातर सभी अस्पतालों और लैब्स में हो जाते हैं। टेस्ट की रिपोर्ट 24 घंटे में आ जाती है। अच्छी लैब्स तो दो-तीन घंटे में भी रिपोर्ट दे देती हैं। ये टेस्ट खाली या भरे पेट, कैसे भी कराए जा सकते हैं।

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