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तलाक को तलाक‚ तलाक‚ तलाक

देश के सर्वोच्च न्यायलय ने आखिरकार तीन तलाक को अमानवीय एवं असंवैधानिक करार देकर एक अभूतपूर्व कदम बढाते हुए ऐतिहासिक निर्णय सुनाई ही दिया। बेशक‚ इस फैसले का मुस्लिम महिलाओं को बेस्रबी से इंतजार था। आखिर वह इंतजार उनके हक में आये फैसले ने खत्म कर ही दिया। निश्चित ही मंगलवार‚ 22 अगस्त का दिन मुस्लिम महिलाओं के लिए आजादी के दिन से कमत्तर नही आंका जायेगा। सालों के लंबे संघर्ष और शोषण की बेडियों से आजाद होकर मुस्लिम महिलाओं को अपने अधिकारों का आसमां मिल ही गया। धर्म और धर्मग्रंथ का सहारा लेकर तीन तलाक को जायज बताने वाले उलेमाओं और मौलवियों के मुंह पर यह एक जोरदार तमाशा है। कोई धर्मग्रंथ किसी महिला का हक नहीं छिनता। उस पर अनावश्यक पुरुष आधिपत्य को स्वीकार नही करता। जहां तक कुरान में वर्णित तीन तलाक की बात की जाये तो बिलकुल ही उसके अल्पबुद्धि जानकारों की दकियानूसी सोच का नमूना जगजाहिर होता है। कुरान में जिस तीन तलाक की बात कही गई है वो मर्यादित और महिला सहमति के अनुकूल प्रतीत होती है। निकाह उपरांत आपसी रिश्तों के टकराव व बिगड़ते संबंधों के बाद मियां और बीवी के सहर्ष रजामंदी‚ परामर्श‚ सुलह-समझौते के बाद यह बिछड़न भरा कदम उठाने की सख्त हिदायत दी गई है। जबकि इसकी अलग-थलग व्याख्या करने वाले बुद्धिपिशाच जानकार न केवल मजहब का मजाक उड़ाते बल्कि अपनी संकीर्णता का परिचय भी दे जाते है।

अत्याधुनिकता के इस दौर में तीन तलाक को फोन‚ एसएमएस‚ फेसबुक और वाट्सप पर लाने वालों के लिए कोर्ट का फैसला किसी झटके से कम नहीं है। महिलाओं को मजदूर समझकर इस्तेमाल करने वाले और तीन तलाक की धमकी देकर औरत को ऐडियों के नीचे दबाकर रखने वालों के निर्मम अन्याय का अब अंत हो चुका है। शादी को गुड्डे-गुड़िया का खेल समझने वालों को अब किसी हालात में बख्शा नही जायेगा। दरअसल‚ कोई समझदार पुरुष किसी महिला को तुरंत तीन बार तलाक‚ तलाक और तलाक कहकर एक पल में सारे संबंध खत्म नही कर सकता। जो ऐसा करता है वो निश्चित ही हवस और जिस्म का पुजारी है। ऐसे लोगों के लिए महिला खिलौने की तरह है। जिनके साथ मर्जी आये तब खेला और फेंक दिया। ऐसे लोग इंसानियत के नाम पर कलंक है। गौरतलब है कि सदियों से समाज में चली आ रही मुस्लिम महिलाओं के विरूद्ध प्रतीगामी परंपरा को गलत करार देकर असंवैधानिक बताने के लिए लोकतांत्रिक मुल्क में इतना वक्त बीत जाना राजनीतिक कमजोर इच्छाशक्ति को जाहिर करता है। तीन तलाक के अंत की खबर सुनकर कई नेता और धर्मगुरु मातम मना रहे होंगे या फिर किसी मदिरायल में जाकर शोक मना रहे होंगे। क्योंकि जिस चीज को लेकर जिनकी दाल गलती थी और जिनके घर की गाड़ी चलती थी आज उनका काम तमाम हो गया है। वाकई में मुस्लिम महिलाओं के लिए यह दिन किसी ईद से कम नहीं है। मुबारकबाद !

– देवेन्द्रराज सुथार

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