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ताज संरक्षण पर विस्तृत योजना बनाये उप्र सरकार : उच्चतम न्यायालय

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में आगरा के ऐतिहासिक ताजमहल के आसपास पर्यावरण संरक्षण को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की रिपोर्ट को फौरी उपाय करार देते हुए विस्तृत योजना तैयार करने का आज उसे निर्देश दिया। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश की योगी योगी सरकार से कहा है कि वह ताज़महल को 100 सालों तक सुरक्षित रखने का दृष्टिकोण पत्र सौंपे।

न्यायमूर्ति लोकुर ने कहा कि योगी सरकार ऐसा दृष्टिकोण पत्र सौंपे, जिससे ताजमहल 100 सालों तक सुरक्षित रहे। न्यायालय ने कहा कि ताज संरक्षित क्षेत्र (टीटीजेड) छह जिलों में फैला हुआ है, जिसमें करीब 10,400 वर्ग किलोमीटर का इलाका आता है। इसमें उत्तर प्रदेश में आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस और इटावा के अलावा राजस्थान का भरतपुर भी आता है। सरकार उसे संरक्षित करने के लिए दृष्टिकोण पत्र भी दे।

न्यायालय ने योगी सरकार को कहा कि उसे ईमारत को 15 या 20 साल के लिए सुरक्षित नहीं करना है, बल्कि 300, 400 साल के लिए सुरक्षित करना है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अस्थायी योजना से काम नहीं बनेगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार की योजना सिर्फ नौकरशाहों द्वारा तैयार की गयी है, लेकिन इसके लिए विशेषज्ञों की जरूरत होगी, जिसमें इतिहास, संस्कृति, पर्यावरण से जुड़े लोगों को शामिल किया जाना चाहिए। न्यायालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि सरकार योजना बनाने में नागरिक समुदाय के लोगों की भी मदद लें।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने हलफनामे में टीटीजेड के संरक्षण के बारे में कई उपायों की बात की है, जिनमें पेड़ लगाने, इलेक्ट्रिक बसों का इस्तेमाल करने, यमुना में रबर डैम बनाकर ताजमहल के लिए पानी का स्तर बनाये रखने जैसे कई उपाय बताये गये हैं। हलफनामें में टीटीजेड के संरक्षण को लेकर अगले तीन साल का ब्योरा दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई आठ हफ्ते बाद होगी।

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