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तीन तलाक विधेयक पर मुस्लिम नेताओं ने की आपत्ति

नयी दिल्ली। देश के कुछ प्रमुख मुस्लिम नेताओं ने संसद के शीतकालीन सत्र में तीन तलाक से सम्बन्धित विधेयक लाने के सरकार के फैसले की यह कहकर कड़ी आलोचना की है कि उसने मुस्लिम समुदाय से सलाह -मशविरा किये बगैर यह विधेयक तैयार किया है जिसमें तीन साल की कैद की सजा का सख्त प्रावधान किया गया है।
वरिष्ठ नौकरशाह एवं सच्चर कमेटी के विशेष कार्याधिकारी डा सैयद जफर महमूद ने कहा कि हिंदू समुदाय में भी कई ऐसी रूढ़िवादी प्रथाएं हैं जो लोकतंत्र और मानवाधिकारों के सिद्धान्तों का उल्लंघन करती हैं , सरकार को चाहिए कि वह सिर्फ मुस्लिम समुदाय का ही नहीं बल्कि इनका भी समाधान करे ।
डा महमूद का कहना था कि वह तीन तलाक की प्रथा के खिलाफ हैं जो पूरीतरह गैर इस्लामिक है लेकिन सरकार जिसतरह मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ सलाह -मशविरा किये बगैर सम्बन्धित कानून में संशोधन करने जा रही है ,वह इसका पुरजोर विरोध करते हैं । यदि सरकार ने विधेयक तैयार करते समय समुदाय के विभिन्न पक्षों से विचार -विमर्श किया हाेता तो बेहतर होता ।
मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य डा एस क्यू आर इलयास ने कहा कि सरकार ने पर्सनल ला कानून से जुड़ा विधेयक तैयार करते समय मुस्लिम उलेमाओं के साथ विचार -विमर्श करने की परंपरा को तोड़ा है ।
श्री इलयास ने कहा कि मुसलमानों से जुड़े अब तक सिर्फ तीन बड़े कानून बने हैं और उन्हें तैयार करने की पूरी प्रक्रिया में मुस्लिम समुदाय के लोगों को शामिल किया गया था । ये कानून हैं -द मुस्लिम पर्सनल ला (शरीयत) ऐप्लीकेशन कानून 1937, मुस्लिम विवाह विच्छेद विवाह कानून ,1939 और मुस्लिम महिलाएं (तलाक के अधिकार की रक्षा) सम्बन्धी 1986 का कानून ।
मोदी सरकार ने मंत्री समूह के विचार -विमर्श के बाद तीन तलाक सम्बन्धी विधेयक तैयार किया है । इस समूह में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ,कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ,वित्त मंत्री अरूण जेटली और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज शामिल थीं ।
विधेयक में तीन तलाक को ‘गैर जमानती’ और ‘संज्ञेय अपराध’ बनाया गया है और इसके लिए तीन वर्ष की जेल की सजा और जुर्माने का भी प्रावधान है। विधेयक के अनुसार यदि किसी महिला को तीन तलाक दिया जाता है तो वह अदालत में जा सकती है और अपने तथा आश्रित बच्चों के लिए भत्ता और नाबालिग बच्चों की देखरेख का अधिकार मांग सकती है ।
विधेयक के अनुसार तलाके बिद्दत ‘गैर कानूनी और निरस्त’ माना जाएगा।

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