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त्वरित न्याय प्रणाली को दुरुस्त करना जरूरी : कोविंद

नयी दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने त्वरित न्याय प्रणाली को दुरुस्त करने और देश की अदालतों में लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए विवाद निपटान के वैकल्पिक उपाय पर बल देने की आज सलाह दी। राष्ट्रीय विधि दिवस पर नीति आयोग और विधि आयोग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो-दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए श्री कोविंद ने कहा कि यह सूचना प्रौद्योगिकी का युग है और न्यायिक प्रणाली में भी इसका भरपूर इस्तेमाल करके मुकदमों के त्वरित निपटारे की व्यवस्था की जानी चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि देश की अदालतों में मुकदमों का अंबार लगा है और इसके निपटारे के लिए विवाद निपटान की वैकल्पिक व्यवस्था (एडीआर) पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए।
राष्ट्रपति ने देश की न्याय व्यवस्था को और अधिक अनुकूल बनाने की आवश्यकता जताते हुए कहा कि न्यायपालिका, खासकर निचली अदालतों में मानव संसाधनों को सक्षम बनाना समय की मांग है।

The President, Shri Ram Nath Kovind at the inaugural function of the National Law Day Conference jointly organised by the Law Commission of India and NITI Aayog, in New Delhi on November 25, 2017.
The Speaker, Lok Sabha, Smt. Sumitra Mahajan and the Chief Justice of India, Justice Shri Dipak Misra are also seen.

उन्होंने अदालतों में बेवजह सुनवाई स्थगित करने के लिए वकीलों के अनुरोध की बढ़ती प्रवृत्ति को सुगम और त्वरित न्याय उपलब्ध कराने के रास्ते का रोड़ा बताया और आवश्यक कारणों को छोड़कर इस तरह की प्रवृत्ति से दूर रहने की वकीलों को सलाह भी दी।
राष्ट्रपति ने कहा कि न्याय की आस लगाये गरीब और वंचित लोग पैसों के अभाव में न्याय हासिल नहीं कर पाते हैं। उन्होंने वकीलों से अपील की कि वे ऐसे गरीबों और वंचितों को मुफ्त कानूनी सेवाएं उपलब्ध करायें। इस अवसर पर उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि संविधान प्रदत्त मूलभूत अधिकारों की सुरक्षा करना न्यायपालिका का परम कर्तव्य है।
इस सम्मेलन के समापन समारोह को कल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सम्बोधित करेंगे। सम्मेलन में न्यायिक समीक्षा और संसदीय लोकतंत्र पर चर्चा के लिए चार सत्र होंगे।
सम्मेलन में ‘अधिकारों में संतुलन बनाये रखने’, ‘उच्चतम न्यायपालिका में नियुक्तियां: कॉलेजियम प्रणाली की बाध्यता एवं प्रस्तावित सुधार’, ‘न्याय मिलने में होने वाले विलम्ब से निपटने के लिए ढांचागत सुधार’ और न्यायिक शक्तियां एवं न्यायिक सक्रियता जैसे विभिन्न पहलुओं पर भी विचार विमर्श किया जायेगा।
सम्मेलन के अंत में एक अनौपचारिक रिपोर्ट भी तैयार की जायेगी।

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