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थाली से  प्याली तक मिलावट ही मिलावट

बाल मुकुन्द ओझा

खाने के सामान में मिलावट एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। हमारे दैनिक प्रयोग में आने वाली वस्तुओं का आजकल शुद्ध और मिलावट रहित मिलना मुश्किल हो गया है। मिलावट का कहर सबसे ज्यादा हमारी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर ही पड़ रहा है। लोगों में यह धारणा बनती जा रही है कि बाजार में मिलने वाली हर चीज में कुछ न कुछ मिलावट जरूर है। आज समाज में हर तरफ मिलावट ही मिलावट देखने को मिल रही है। पानी से सोने तक मिलावट के बाजार ने हमारी बुनियाद को हिला कर रख दिया है। पहले दूध में पानी और शुद्ध देशी घी में वनस्पति घी की मिलावट की बात सुनी जाती थी, मगर आज घर-घर में प्रत्येक वस्तु में मिलावट देखने और सुनने को मिल रही है। मिलावट का अर्थ प्राकृतिक तत्त्वों और पदार्थों में बाहरी, बनावटी या दूसरे प्रकार के मिश्रण से है। जनसामान्य की यह चिंता निराधार नहीं है। एक सर्वे के अनुसार भारत में खुले में जितनी चीजें बिकती हैं, उनमें करीब 64 प्रतिशत खाने-पीने की चीजों में मिलावट होती है। कई चीजों में तो हानिकारक केमिकल तक मिलाया जाता है। इनमें दूध, खाद्य तेल, दाल और सब्जियां शामिल हैं। इस सर्वे ने एक बार फिर ये साबित कर दिया है कि भारत में मिल रहे खाद्ध पदार्थों में मिलावट बहुत ही साधारण सी बात हो गई है। मार्केट सर्वे एजेंसी विनायक रिसर्च और उद्योग मंडल एसोचैम के अलग-अलग सर्वे में यह बात सामने आई है। विनायक रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य वस्तुओं की जांच में पाया गया कि 60 से 65 फीसदी खुले खाने-पीने के तेल में बड़े पैमाने पर मिलावट होती है। एसोचेम के एक ताजा सर्वे के मुताबिक भारत का परंपरागत मिठाई बाजार करीब 50 हजार करोड़ रुपए का है लेकिन अधिकांशत असंगठित यह बाजार दूध, मक्खन, चीनी व सूखे मेवे जैसे कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के खतरों से हमेशा जूझता है। यही वजह है कि त्योहारों के दौरान बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए कई मिठाई कारोबारी कीमतें नीचे रखने के लिए मिलावट का सहारा लेते हैं। दीपावली हमारे देश का सबसे बड़ा और प्रमुख त्यौहार है। इस दिन घर घर में मिठाई बनना सामान्य बात है। इसके साथ ही बहिन बेटियों को मिठाई का उपहार दिया जाता है। यह मिठाई हम बाजार से खरीद कर लाते है। बाजार रंग बिरंगी मिठाइयों से भरा पड़ा है। इनमें से कौनसी  मिठाई शुद्ध है और कौनसी  अशुद्ध इसका पत्ता करना हमारे लिए बेहद कठिन है। ऐसे में हम आँख मीचकर मिठाई का डिब्बा खरीद लाते है।  मिठाइयों में सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले तत्त्वों की मिलावट के डर और कम चिकनाई वाली चीजें खाने की बढ़ती इच्छा के कारण दुग्ध उत्पादों की मांग में 50 फीसद तक गिरावट आई है।  इस दीपावली पर विभिन्न किस्मों के मेवायुक्त बिस्कुट, केक और कम कैलोरी वाले अन्य बेकरी उत्पादों की मांग में करीब 30 फीसद की वृद्धि होने का अनुमान है। इससे देश में बेकरी उत्पादों के करीब 25 हजार करोड़ रुपए का कारोबार और फलने-फूलने की प्रबल संभावना है। सस्ते और विविधतापूर्ण किस्मों के कारण अब बेकरी उत्पाद पहली पसंद बनकर उभर रहे हैं। त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ ही मिलावटखोर भी सक्रिय हो जाते हैं और सस्ती मिठाइयां बेचकर ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में आमजन के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हैं।   सामान्य तौर पर एक परिवार अपनी आमदनी  का लगभग 60 फीसदी भाग खाद्य पदार्थों पर खर्च करता है। खाद्य अपमिश्रण से अंधापन, लकवा तथा टयूमर जैसी खतरनाक बीमारियाँ हो सकती हैं। सामान्यत रोजमर्रा जिन्दगी में उपभोग करने वाले खाद्य पदार्थों जैसे दूध, छाछ , शहद, हल्दी, मिर्च, पाउडर, धनिया, घीं, खाद्य तेल, चाय-कॉफी, मसाले, मावा , आटा आदि में मिलावट की सम्भावना अधिक  है। बाजार में मिलने वाली सब्जियों और फलों को रसायन के माध्यम से रंग-बिरंगा कर उपभोक्ताओं को आकर्षित किया जाता है। मटर और परवल को हरे रंग से हरा भरा किया जाता है। तरबूज में इंजेक्शन तो आम बात हो गई है। आम, केले, मुसंबी तक को सरे आम रसायन और इंजेक्शन से पकाया और तैयार किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है।  मिलावटी पदार्थों से बचने हेतु नागरिकों को  जागरूक होना चाहिये। उपभोक्ता को चाहिये कि वे खुली खाद्य सामग्री न खरीद कर  सील बन्द तथा डिब्बे वाली खाद्य सामग्री ही खरीदें। हमेशा मानक प्रमाण चिह्न (एगमार्क, एफ.पी.ओ., हालमार्क) अंकित सामग्री की खरीद की जनि चाहिए। हालाँकि मिलावटियों के कहर से ये चीजे भी अछूती नहीं है। मिलावट एक संगीन अपराध है। मिलावट पर काबू नहीं पाया गया तो यह ऐसा रोग बनता जा रहा कि समाज को ही निगल जाएगा। सरकार को कानून के प्रावधानों को और सशक्त बनाने के साथ निगरानी तंत्र को मजबूत करना चाहिए। मिलावट के आतंक को रोकने के लिए सरकार को जन भागीदारी से सख्त कदम उठाने होंगे।
– बाल मुकुन्द ओझावरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार क्.32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुरमो.- 9414441218

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