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दलगत राजनीति से उठकर विश्व कल्याण हेतू करें कार्य  : शंकराचार्य सरस्वती

फरीदाबाद। बघौला गांव के लक्ष्मी नारायण मंदिर के प्रागंण में एक धर्मसभा का आयोजन किया गया। अध्यक्षता गोवर्धनमठ पुरी पीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती जी महाराज ने की। श्रीकृष्णायण सेवा सदन पलवल की ओर से आयोजित इस धर्मसभा में शंकराचार्य महाराज का पहुंचने पर ग्रामीणों ने रजत मुकुट, फूल माला एवं चंदन माला से स्वागत किया।  मंदिर परिसर में शंकराचार्य ने अनादि जनकल्याण सेवा समिति की ओर से बनाई गई पुस्तकालय का दीप प्रज्जवलित कर उद्घाटन किया। जहां से भारत माता की जय, गौ माता की जय के उद्घोषों के बीच शंकराचार्य जी महाराज धर्मसभा स्थल पहुंचे। मंच संचालन शेषमणी शुक्ला ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान नारायण का पादुका पूजन तथा संस्कृत छात्रों वेदप्रकाश, लव वशिष्ठ, अमित दीक्षित, दीपक एवं देवकीनंदन की ओर से किए गए वैदिक मंगलाचरण से हुआ।  इस मौके पर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने सनातन धर्म के आधार स्तंभ उनके मान बिंदुओं एवं अस्तित्व की रक्षा हेतु अपने विचार व्यक्त किए। शंकराचार्य ने कहा कि वैदिक सनानत रीति में श्रद्धा रखते पालना करना चाहिए। पत्नी के लिए पति मरमेश्वर है।  पुत्र के लिए उसका पिता भगवान है। माता ही जगतजननी है।  भारत कर्म की भूमि है। यह जन्म भूमि स्वर्ग है। इसकी सेवा जीवन का ध्येय होना चाहिए। वर्तमान परिपेक्ष्य में महायंत्रों के निरंकुश निर्माण  से दूरगामी परिणाम पर विचार करने की जरुरत है। शंकराचार्य जी ने लोगों को दलगत राजनीति से उठकर विश्व कल्याण हेतु कार्य करने के लिए विशेष आह्रवान किया। इसके बाद शंकराचार्य  ने पंडित चिम्मन लाल के निवास पर आयोजित प्रश्नोत्तरी गोष्ठी में श्रीमद्भागवत के 18 वें अध्याय का वर्णन करते हुए तमोगन से होने वाले नुकसान का वर्णन किया।  धर्मसभा में हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ के पूर्व प्राचार्य गुंजेश्वर चौधरी, प्राचार्य पशुपति नाथ एवं अन्य विद्वानों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ के प्राचार्य डा. पशुपतिनाथ मिश्र ने धर्म व संस्कृति भाषा की वैज्ञानिता का विश्लेषण किया। साथ ही हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ बघौला को राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान नई दिल्ली से सम्बंध केंद्रीय परिसर बनाने हेतु शंकराचार्य जी को ज्ञापन दिया।   इस मौके पर महाराज जी के दर्शन एवं प्रवचन सुनने हेतु विभिन्न स्थलों से अनेक संत महात्मा दंडी सन्यासी तथा अखिल भारतीय ब्राह्मण संभा, सांवरिया सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने दल बल के साथ उपस्थित थे।

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