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दिल्ली पुलिस : 33 फीसदी महिला पुलिसकर्मियों की होगी भर्ती

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस में अब जो भी भर्तियां होंगीं, उनमें 33 फीसदी भर्ती महिला पुलिसकर्मियों की होगी। हालांकि दिल्ली पुलिस की मौजूदा नफरी में महिलाओं की भागीदारी देखी जाए तो वह केवल तकरीबन आठ फीसदी है जो 33 फीसदी के आंकड़े से काफी कम है। वैसे राहत की बात यह है कि इस साल रेप और छेड़छाड़ जैसे मामलों में पिछले साल के मुकाबले कमी आई है। स्पेशल कमिश्नर दीपेंद्र पाठक का कहना है कि अगले साल तक भर्ती होने वाले करीब 7300 पुलिसकर्मियों में 33 फीसदी महिलाओं को शामिल किया जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा समय में करीब 76 हजार 500 पुलिसकर्मी हैं। इनमें पुलिस कमिश्नर से लेकर सिपाही आदि तमाम पुलिसकर्मी शामिल हैं। इनमें छह हजार 320 महिला पुलिसकर्मी हैं, जो तकरीबन आठ फीसदी है।

टॉप पोस्ट यानी कमिश्नर तक आज तक कोई भी महिला पुलिसकर्मी नहीं पहुंच सकी है। यही नहीं, 14 जिलों की कमान संभालने वाले डीसीपी में केवल दो ही जिले ऐसे हैं, जिनमें महिला आईपीएस काबिज हैं। इनमें शाहदरा जिले की डीसीपी नुपुर प्रसाद और नॉर्थ-वेस्ट जिले की डीसीपी असलम खान हैं।

पुलिस से मिले आंकड़ों पर गौर किया जाए तो इस साल 30 नवंबर तक रेप के 1 हजार 968 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में 2174 मुलजिमों को गिरफ्तार किया गया। इसी तरह से छेड़छाड़ के तीन हजार 136 मामलों में तीन हजार 373 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पिछले साल के मुकाबले इस बार दोनों ही तरह के अपराध कम हुए हैं। आंकड़ों से पता लगता है कि 2013 से 30 नवंबर 2017 तक रेप के 10 हजार 124 मामले सामने आए, जबकि इस दौरान छेड़छाड़ के 20 हजार 505 मामले दर्ज हुए।

महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा निर्भया फंड के तहत किए जाने वाले खर्चे में इस साल 30 नवंबर तक चार करोड़ 36 लाख रुपया खर्च किया जा चुका है। जबकि 2014-15 में तीन करोड़ के बजट में से दो करोड़ 35 लाख, 2015-16 में दो करोड़ रुपये के बजट में एक करोड़ 96 लाख और 2016-17 में दिल्ली पुलिस को केंद्रीय वित्त मंत्रालय से मिले तीन करोड़ 40 लाख रुपये में से तीन करोड़ 29 लाख रुपये खर्च किए गए। यह खर्चा विज्ञापनों, स्कूल आदि में लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दिलाने के अलावा महिलाओं से संबंधित तमाम तरह की गतिविधियों के तहत यह पैसा खर्च किया जाता है।

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