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देश में प्रमुख फसलों के उत्पादन में महिलाओं की भागीदारी 75 फीसदीः मंत्री राधामोहन 

नई दिल्ली । केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने एनएएससी कॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली में महिला किसान दिवस समारोह में उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र के विकास में महिलाओं का अहम योगदान है। आर्थिक रूप से सक्रिय 80 प्रतिशत महिलाएं कृषि क्षेत्र में कार्यरत हैं। इनमें से लगभग 33 प्रतिशत मजदूरों के तौर पर और 48 प्रतिशत स्व-नियोजित किसानों के तौर पर कार्य कर रही हैं। एनएसएसओ की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लगभग 18 प्रतिशत खेतिहर परिवारों का नेतृत्व महिलाएं ही करती हैं। कृषि कार्यों के साथ साथ महिलाएं बागवानी, मछली पालन, कृषि वानिकी, पशुपालन और मधुमक्खी पालन जैसे कार्यों में भी बखूबी अपना योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से नौ राज्यों में किये गये एक अनुसंधान से पता चला है कि प्रमुख फसलों के उत्पादन में महिलाओं की भागीदारी 75 फीसदी तक रही है। बागवानी में यह आंकड़ा 79 प्रतिशत और फसल कटाई के बाद के कार्यों में 51 फीसदी तक भागीदारी ग्रामीण महिलाओं की है। इसके अलावा, पशुपालन और मछली उत्पादन में यह आंकड़ा 95 प्रतिशत तक है। कृषि मंत्री ने कहा कि महिलाओं को कृषि की मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा विभिन्न स्कीमों में महिलाओं के लिए बजट संबंधी वचनबद्धता को सुनिश्चित करने हेतु विभिन्न प्रमुख योजनाओं /कार्यक्रमों और विकास संबंधी गतिविधियों के अंतर्गत महिलाओं के लिए 30% से अधिक धनराशि का आवंटन किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कृषि महिला संसाधन केंद्र द्वारा पुरुष कार्यक्रम संचालकों की मानसिकता और व्यवहार में बदलाव लाने के लिए एक महिला संवेदनशील मॉड्यूल भी विकसित किया गया है। इसके माध्यम से वर्ष 2017-18 के दौरान कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग के मैनेज, ई.ई.आई,समेती और अन्य संस्थानों द्वारा 222 कार्यक्रमों के माध्यम से कुल 5645 लोगों को प्रशिक्षित किया है। साथ ही ‘आत्मा’ कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक 98.14 लाख से अधिक महिला किसानों को भी प्रशिक्षित किया जा चुका है।

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