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दो साल बाद मिली लापता पाकिस्तानी पत्रकार, कर रही थी भारतीय कैदी की मदद

लाहौर। पाकिस्तानी महिला पत्रकार जीनत शहजादी की कहानी आपको फिल्म वीर जारा की सामिया सिद्दीकी की याद दिलाएगी जो कि पाकिस्तानी जेल में बंद एक भारतीय कैदी की मदद करने वाली एक पाकिस्तानी वकील थी। यहां अंतर केवल इतना है कि शहजादी एक पत्रकार है और एक भारतीय कैद की मदद करने की कोशिश में उसकी जिंदगी पूरी तरह से बदल गई।

26 साल की यह रिपोर्टर तब डेली नई खबर और मेट्रो न्यूज चैनल काम करती थी और 19 अगस्त, 2015 से लाहौर से लापता हो गई थी और अब दो सालों बाद वापस मिली है। पाकिस्‍तान के लापता लोगों की कमिटी के प्रमुख व रिटायर जस्‍टिस जावेद इकबाल ने शुक्रवार को बताया कि जीनत का अपहरण दुश्‍मन एजेंसियों ने किया था और उन्‍हें पाकिस्तान-अफनागिस्तान के बॉर्डर से ढूंढा गया।

उन्‍होंने आगे कहा, ‘बलूचिस्‍तान और खैबर पख्‍तूनख्‍वा ने जीनत को ढूंढने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है और उन्‍हें पाक-अफगान सीमा के पास से बुधवार को खोज लिया गया है।’

जीनत के परिवार और मानवाधिकार संगठनों का कहना था कि उनके अनुसार जीनत का अपहरण पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसी ने किया है। 25 वर्षीय जीनत एक फ्रीलांस रिपोर्टर है, जिसने लापता लोगों के लिए आवाज उठाई थी। सोशल मीडिया के जरिए जीनत लापता भारतीय हामिद अंसारी की मां फौजिया अंसारी के सम्पर्क में आ गई थी।

इसके बाद जीनत ने फौजिया की तरफ से पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की मानवाधिकार सेल में निवेदन देकर हामिद को खोजने के लिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की। परिणाम स्‍वरूप सुरक्षा एजेंसियों ने आयोग के समक्ष स्‍वीकार किया कि हामिद उनके हिरासत में था।

शहजादी के परिवार के लोगों ने मानवाधिकार कार्यकर्ता को बताया कि जीनत के लापता होने से पहले भी सुरक्षा बलों ने उसे चार घंटे के लिए हिरासत में लिया था और उससे हामिद के बारे में पूछताछ की थी। 2015 में हामिद को जासूसी के आरोप में सैन्‍य अदालत ने तीस साल की कैद की सजा सुनाई। इसी साल शहजादी भी लापता हुई थी। शहजादी के 17 वर्षीय भाई सद्दाम की खुदकुशी की खबर के बाद शहजादी की गुमशुदगी सुर्खियों में आयी।

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