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नंदन नीलेकणि की इंफोसिस में वापसी, बनाए गए चेयरमैन

नई दिल्ली। नंदन नीलेकणि को गुरुवार को इंफोसिस का चेयरमैन नियुक्त कर दिया गया। विशाल सिक्का के इस पद को छोड़ने के कुछ दिनों बाद ही नीलेकणि की इंफोसिस में वापसी हो गई। इंफोसिस के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में इस नियुक्ति का फैसला किया गया। नीलेकणि की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से गैर कार्यकारी, गैर स्वतंत्र निदेशक और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के चेयरमैन के रूप में की गई है। नीलेकणि 2002 से 2007 तक इंफोसिस के सीईअो रहे थे। नीलेकणी की 10 सालों बाद इंफोसिस वापसी के साथ ही मैनेजमेंट में बड़े बदलाव भी हुए हैं। नीलेकणि की नॉन एक्जिक्यूटिव चेयरमैन बनाया गया है। वहीं आर. शेषशायी और वेंकेंटेशन के इस्तीफे मंजूर हो गए हैं। नीलेकणि ने कहा है कि वो इंफोसिस में वापसी से खुश हैं और कंपनी के बोर्ड सदस्यों के साथ मिलकर काम करेंगे। नीलेकणि ने वादा किया कि वे कंपनी के क्लाइंट्स, शेयरधारक और कर्मचारियों को कारोबार के नए मौकों का फायदा देंगे। नीलेकणि ने सीईओ के तौर पर विशाल सिक्का की सेवाओं के लिए उनका धन्यवाद किया। साल 2009 में नीलेकणि को जब यूडीएआई का चेयरमैन बनाया गया तब उन्होंने इंफोसिस को अलविदा कहा था। आधार नंबर देने का श्रेय नंदन नीलेकणि को जाता है। नंदन नीलेकणि वर्ल्‍ड इकोनॉमिक फोरम की सलाह समिति में भी रह चुके हैं। साल 2014 में नंदन नीलेकणि कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए थे और उन्होंने बेंगलुरू साउथ सीट से चुनाव भी लडा था। इसके साथ ही नारायणमूर्ति की अगुआई में चल रही बोर्ड में पूरी तरह बदलाव की प्रमुख मांग भी पूरी हो गई है। ज्यादातर सदस्यों के जाने के बाद अब निदेशक बोर्ड का कायाकल्प होगा। मूर्ति ने देश की इस दूसरी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी में कॉरपोरेट गवर्नेंस जैसी खामियों को दूर करने की मांग उठाई थी। खास बात यह है कि नीलेकणि भी कंपनी के छह संस्थापकों में शामिल हैं। इन सभी ने मिलकर वर्ष 1981 में यह आइटी कंपनी बनाई थी। इनकी कंपनी में करीब 12 फीसद हिस्सेदारी है।

नए एमडी व सीईओ की तलाश जारी

नीलेकणि ने कहा कि वे इन्फोसिस में दोबारा आकर खुश हैं। कंपनी अब भी नए एमडी व सीईओ की तलाश जारी रखेगी। फिलहाल यूबी प्रवीण राव अंतरिम सीईओ के तौर पर काम कर रहे हैं। कंपनी शुक्रवार को शाम चार बजे एक प्रेस कांफ्रेंस करेगी। इसके अलावा शेयरधारकों के साथ 1-1 घंटे की इन्वेस्टर कॉल भी होगी। नंदन की वापसी बीते दिन ही लगभग तय हो गई थी, क्योंकि संस्थापकों के साथ ही उनकी नियुक्ति के पक्ष में 20 फीसद हिस्सेदारी रखने वाले संस्थागत निवेशक भी खुलकर आ गए थे।

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