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‘नमूने’- परेश गनात्रा (चंदू) से एक खास बातचीत

सवालः अपने किरदार के बारे में बतायें?
परेशः पी.एल देशपांडे द्वारा लिखा गया यह किरदार चंदू के नाम से जाना जाता है। वह बहुत ही मजेदार किरदार है; आपको कहीं भी ऐसा इंसान नहीं मिलेगा। जो लोग निःस्वार्थ होते हैं, हमेशा मदद करना चाहते हैं और जरूरत से ज्यादा करते हैं। यह किरदार साधारण-सा है, बिना किसी परत के। वह जमीन से जुड़ा व्यक्ति है, खुशमिजाज और हमेशा मुस्कुराने वाला है। भगवान ने ऐसे इंसान बनाना बंद कर दिया है। ऐसे किरदार निभाना अच्छा लगता है क्योंकि उसके लिये आपको ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं होती है। आपको बस मुस्कुराना है और अपनी लाइनें बोलनी हैं, यह काम कर जाता है।
सवालः कॉमेडी में आपकी प्रेरणा कौन हैं?
परेशः कई सारे हैं, महबूब साहब से लेकर चार्ली चैपलिन और जॉनी लीवर साहब तक। मैं ना केवल उनसे प्रेरणा लेता हूं, बल्कि वह जिस तरह से किरदारों को गढ़ते हैं और उन्हें पेश करते हैं उसे भी सीखता हूं। एक कलाकार के तौर पर आपको केवल कॉमेडी नहीं करना चाहेंगे। इसलिये, मेरा मानना है कि एक अभिनेता के तौर पर आपको यदि अलग-अलग तरह की भावनाएं अभिव्यक्त करने का मौका मिलता है तो आपको उसे बिना किसी परेशानी के लिये निभाना चाहिये।
सवालः क्या कोई चुनौती थी?
परेशः मुझे बस एक ही चुनौती का सामना करना पड़ा कि पी.एल देशपांडे वाकई बहुत बड़ा नाम हैं। पिछले कई सालों में उन्होंने जिस तरह का काम किया और उनके द्वारा लिखे गये चंदू जैसे किरदार के साथ न्याय कर पाना, जोकि पहले ही लोगों के दिलों में अपनी जगह बना चुका है- आप ऐसी गुस्ताख़ी नहीं कर सकते कि उसे स्क्रिप्ट के अनुसार ना निभायें। मुझे लगता है कि जब एक लेखक कोई किरदार गढ़ता है और लोग उससे खुद को जोड़ पाते हैं तो इस तरह के किरदार को निभाने के दौरान आपको जिम्मेदारी लेनी पड़ती है। सबसे पहली बात तो आपको उसे दर्शकों के सामने वास्तविक बनाना पड़ता है और उसके परिणामस्वरूप आप किरदार और अपने अभिनय से बाहर नहीं जा सकते। मुझे लगता है यही एकमात्र चुनौती है। जहां मेरी तैयारी की बात है, मुझे टेक्निकल ट्रेनिंग के अलावा भूमिका के लिये किसी तरह की तैयारी करना पसंद नहीं। शूटिंग के दौरान चीजों को जानना अच्छा लगता है, क्योंकि मुझे लगता है कि यदि आपने पहले से ही किरदार पर काम किया हुआ है और आपकी सोच बंद है तो फिर आप नया लेकर नहीं आ पाते हैं। इसलिये, खासतौर से मुझे किसी भूमिका के लिये तैयारी करना पसंद नहीं।
सवालः आप कुछ एपिसोड की शूटिंग कर चुके हैं? वह कैसे रहे?
परेशः वह शानदार रहे क्योंकि ऐसी मानसिकता वाले व्यक्ति को निभा पाना काफी मुश्किल है, जोकि हमेशा अच्छा बने रहना चाहता है। क्रिएटिव, लेखक, निर्देशक और कलाकारों की टीम में ऐसे लोग हैं जो हमेशा अधिक और बेहतर काम करना चाहते हैं। एक कलाकार के तौर पर आपको लगता है कि आप बेहतर कर सकते हैं। इस शो में लोग सुझाव देने के लिये स्वतंत्र हैं और आपको दूसरा मौका देना चाहते हैं। जब एक ही जगह पर हर कोई बेहतर करना चाहता है तो बेहतर परिणाम सामने आते हैं।
सवालः आपने पहले थियेटर किया है और आप पी.एल. देशपांडे से वाकिफ हैं। क्या आप पर उनके द्वारा लिखे गये किरदारों को निभाने का दबाव था?
परेशः जैसा कि पहले भी मैंने बताया, यह एक चुनौती थी। मैं दवाब में नहीं था क्योंकि मुझे लगता है कि एक कलाकार के तौर पर आपको कोई भी किरदार निभाने के लिये तैयार रहना चाहिये। जब मैंने थियेटर में काम करना शुरू किया था, तो बस केवल एक ही इच्छा थी कि किसी तरह की बाधा नहीं हो। यदि किसी किरदार में कोई बात है तो वह किरदार करता है ना कि परेश गनात्रा। लेकिन हां, यदि कोई किरदार बहुत ही अच्छी तरह लिखा गया है तो आपको जिम्मेदारी महसूस होती है, खासतौर से जबकि वह पू.ला. देशपांडे द्वारा लिखा गया हो।
सवालः आप चंदू से कितना बेहतर जुड़ पाये हैं?
परेशः आंशिक रूप से हां। चंदू कुछ ज्यादा ही स्वार्थरहित है और वास्तविक जीवन में मैं इतना स्वार्थरहित नहीं हूं। आज के समय में दोस्त, परिचित और जानने-पहचाने वाले लोग और रिश्ते ज्यादातर लेन-देन पर टिके हैं।
सवालः सोनी सब पर लौटकर कैसा महसूस हो रहा है?
परेशः सच कहूं तो मैं सोनी सब से कहीं नहीं गया। आखिरी शो जो मैंने किया था, वह ‘चिड़ियाघर’ था, जोकि 1 अक्टूबर को बंद हुआ था। इसके बाद मैंने दो फिल्में कीं। सोनी सब टीवी एक घर की तरह है। मैं कहीं नहीं गया।
सवालः कॉमेडी के लिये मशहूर होने के कारण, आपको किस चीज से इस भूमिका को करने के लिये प्रेरित किया? कोई खास वजह?
परेशः जब प्रोडक्शन हाउस ने मुझे कॉल किया और मुझे पू.ला देशपांडे पर शेा के बारे में बताया तो मैंने किरदार के बारे में पूछे बिना हां कर दिया और मैंने उसे निभाने के लिये हामी भर दी। यह उनका काम, उनका व्यक्तित्व है। पी.एल देशपांडे के नाम से इसे मजेदार बना दिया। मैं उनका एक किरदार निभाने जा रहा हूं और इस शो को हां कहने के लिये वही मेरे लिये काफी था। लोगों ने कहा कि आप कॉमेडियन के तौर पर अधिक जाने जाते हैं, लेकिन मैं एक कलाकार से अधिक खुद को साबित करना चाहता था। क्योंकि मैं सोचता हूं कि मैं कॉमेडी से ज्यादा काफी कुछ कर सकता हूं। इस किरदार ने मुझे कुछ अलग करने का मौका दिया है।
सवालः आपने पहले जिस तरह की भूमिकाएं की हैं, उनसे यह कितना अलग है?
परेशः किस्मत से मैंने जो भी भूमिकाएं निभाई हैं, वह काफी अलग रहे हैं। मैंने हमेशा ही अलग तरह की भूमिकाएं निभाने की कोशिश की है, लेकिन उनमें से ज्यादातर का रुख कॉमेडी की ओर ही था। यह किरदार वास्तविक जीवन में से एक है, जोकि साठ और सत्तर के दशक में काफी आम थे, लेकिन आज भी प्रासंगिक हैं। आप ऐसे लोगों से मिलते होंगे जो अति-उत्साही और मदद करने को आतुर रहते हैं। आप उन्हें पसंद करते हैं, उनसे प्यार करते हैं और उनकी तरह होना चाहते हैं। इसलिये, जब आप टेलीविजन पर इस तरह का किरदार निभाते हैं तो आपको यह समझना होगा कि यह कॉमेडी नहीं है। आपको किरदार और स्थिति के अनुसार चलना होगा। लोग हंस रहे हैं या नहीं, यह वाकई बहुत महत्व नहीं रखता है। आपको उस पर टिके रहना है, जिस तरह किरदार लिखा गया है।
सवालः क्या दर्शक आपके अलग पहलू को देख पायेंगे?
परेशः हां, आप देखेंगे कि परेश अलग होने की कोशिश कर रहा है, चंदू के रूप में नहीं बल्कि एक कलाकार के रूप में। यही बात मेरे लिये महत्व रखती है। इसलिये, यदि मैं 50 एपिसोड कर रहा हूं और मुझे एक भी सीन अलग तरह से करने और अलग-अलग खूबियों को दर्शाने का मौका मिलता है तो मैं खुश हूं। इस शो में एक या दो सीन में दर्शक महसूस कर पायेंगे कि मैंने कुछ अलग किया है।
सवालः आपको क्या लगता है कि दर्शकों को किस बात का इंतजार रहेगा?
परेशः यह शो सरल और वास्तविक है। मैं दर्शकों के चेहरे पर मुस्कुराहट लेकर आऊंगा और यह मेरे लिये यही काफी है। पी.एल देशपांडे के साथ आप शो का नाम किरदारों पर नहीं रख सकते, क्योंकि हर कोई उनके बारे में जानता है। लोग बस उसकी प्रस्तुति देखना चाहते हैं, जो आसान है उसके लेखन की तरह। मुझे लगता है कि लोगों को यह शो पसंद आयेगा और उन्हें इसे परिवारों के साथ देखने में अच्छा लगेगा। वे लोग इससे खुद को जोड़ पायेंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि बड़े-बूढ़े इसे अपने नाती-पोतों को दिखाना चाहेंगे और उनसे कहेंगे कि ‘देखो कैसा होना चाहिये।’ आज के जमाने में, यह मुश्किल है लेकिन यदि हम एक या दो चीज भी ले पाये तो मुझे लगता है कि बहुत अच्छी बात होगी।

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