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नवरात्रि : श्रद्धा व भक्ति का पर्व

शम्भू पंवार
हिंदू धर्म में नवरात्रि के पर्व का विशेष महत्व है। पूरे भारत देश में नवरात्रि का पर्व बड़े उत्साह व श्रद्धा से मनाया जाता है।देश मे माता रानी के नवरात्रि के 9 दिनों में श्रद्धा एवं भक्ति की बयार बह रही है।
बंगाल में षष्टि से नवमी तक दुर्गा पूजा उत्सव बड़े विशाल स्तर पर मनाया जाता है।बंगाल में दुर्गा उत्सव की बहुत मान्यता है।बंगाल का प्रमुख पर्व के रूप में मनाया जाता है।इस अवसर पर बंगाल व महाराष्ट्र में गरबा का भी बहुत जोर रहता है।
वर्ष में 2 गुप्त नवरात्र आते है। वैसे प्रमुख रूप से दो नवरात्रि आते हैं, एक चैत्रीय नवरात्रि व शारदीय नवरात्रि। शारदीय नवरात्रि का अधिक महत्व माना गया है।
नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। हर दिन की पूजा का अलग महत्व है।
प्रथम नवरात्रि को घट स्थापना जिसे कलश स्थापना भी कहा जाता है की जाती है। तत्पश्चात माता रानी का आह्वान किया जाता है कि है जगत जननी माता, सब का कष्ट हरने वाली आप मेरे घर पधारे, इन 9 दिनों में सच्चे मन और श्रद्धा भाव से मां दुर्गा की आराधना की जाती है तो माता रानी का आशीर्वाद से उनकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। घर परिवार में सुख समृद्धि का वास होता है पूजा अर्चना के साथ साथ व्रत भी रखा जाए तो अधिक फलदायक होता है।
इस बार शारदीय नवरात्र 29 सितंबर से शुरू होकर 7 अक्टूबर तक है व 8 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा। कुछ लोग अष्टमी पूजा पूजा करके कन्याओं एवं एक भैरू जी के स्वरूप में एक बच्चे को भोजन कराएं कराते हैं, तो कुछ लोग नवमी को कन्याओं को माता का स्वरूप मानकर पूजा करके भोजन कराते है,उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इन 9 दिनों में माता के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है प्रथम दिन शैलपुत्री द्वितीय ब्रह्मचारिणी तृतीय चंद्रघंटा चतुर्थ कूष्मांडा पंचम स्कंदमाता,षष्ठम कात्यानी, सप्तम कालरात्रि ,अष्टम को महागौरी एवं नवमी को सिद्धिधात्री माता की पूजा आराधना की जाती है।

माता को भोग किसका लगाए
शैलपुत्री : सफेद मिठाई
ब्रह्मचारिणी : शक्कर
चंद्रघंटा : खेल, खीर
कूष्मांडा : मालपुए
स्कंदमाता : माता के ले
कात्यानी : शहद
कालरात्रि : गुड
महागौरी : नारियल
सिद्धिदात्री : नारियल
का भोग लगाएं,माता रानी प्रसन्न होंगी।

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