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नानक देव के नाम पर पाकिस्तान न कर दे कोई खेल

निश्चित रूप से यह खुशनुमा अहसास है कि गुरु नानकदेव जी के जन्मोत्सव पर पाकिस्तान स्थित दरबार साहिब में अब सालभर भारत से श्रद्धालु जा सकेंगे। भारतीय सीमा से महज चार किलोमीटर दूर इस पवित्र स्थली पर सरहदी बंदिशें फिलहाल हट गयी हैं। भारत सरकार ने तनावपूर्ण माहौल के बीच अपनी ओर से किसी तरह की हीलाहवाली भी नहीं की। पाकिस्तान पहले से ही दावा करता रहा है कि उसने अतिरिक्त बजट रखकर गलियारे के काम को तय समय पर पूरा किया है। हालांकि यह बात किसी से नहीं छिपी है कि अतीत में पाकिस्तान ने खालिस्तान का खुलकर समर्थन किया है। उसने इसकी आड़ में आतंकवाद को प्रश्रय दिया है। पाकिस्तान से हमें सतर्क रहने की जरूरत है। करतारपुर गलियारे को लेकर जहां उत्साह का माहौल है, वहीं सीमापार से बार-बार विवादों का उठना भी बेहद चिंताजनक है। इस गलियारे की परियोजना की घोषणा के बाद से ही कभी बयानों के जरिये तो कभी फैसलों से पाकिस्तान विवाद खड़ा करता रहा है। कभी उसकी ओर से ऐसा संदेश आया कि वह श्रद्धालुओं की एंट्री के मामले में अपना नियंत्रण चाहता है। कभी वह श्रद्धालुओं पर फीस की बात पर अड़ता है। हालांकि 20 डॉलर प्रति श्रद्धालु लेने पर पाक अड़ा हुआ है। भारत ने उस बात का भी जबर्दस्त विरोध किया जब उसे पता चला कि पाकिस्तान ने अपने 10 सदस्यीय पैनल में कुछ खालिस्तानी विचारधारा के लोगों को भी शामिल कर लिया है। भारत ने पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में उनके नामांकन पर एतराज जताया है। अब पाकिस्तान की ओर से जारी वीडियो में खालिस्तानी नेता रहे भिंडरांवाला को दिखाया गया है। इस पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। असल में पाकिस्तान की ओर से जारी वीडियो की एक क्लिप में अलगाववादी और खालिस्तानी नेता जरनैल सिंह भिंडरांवाला, मेजर जनरल शाबेग सिंह और अमरीक सिंह की तस्वीरें नजर आ रही हैं। बता दें कि ये अलगाववादी नेता जून 1984 में अमृतसर में स्वर्ण मंदिर में हुए ऑपरेशन ब्लूस्टार में भारतीय सेना द्वारा मारे गये थे। वीडियो के बैकग्राउंड में ‘खालिस्तान 2020’ लिखा है। जानकारों की राय है कि पाकिस्तान फिर से भारत के साथ शातिराना साम्प्रदायिक सियासत खेल रहा है। करतारपुर कॉरिडोर प्रस्ताव की घोषणा के बाद उस पर अमल लाने के मामले में पाकिस्तान ने श्रद्धालुओं की तादाद, प्रवेश के तौर-तरीकों आदि पर बखेड़ा करना शुरू कर दिया है। उसने ऐसी भी मंशा जाहिर कर दी थी जिसमें वह सिर्फ सिखों की एंट्री के लिए इच्छुक दिखता है, हिंदुओं का सीमा में प्रवेश उनके शक के घेरे में है। यहां बता दें कि अक्सर विवादित बयानों से सुर्खियों में रहने वाले पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद अहमद ने तो पिछले दिनों स्थानीय नेताओं से अपील तक कर डाली की वे खालिस्तान समर्थक नेताओं का स्वागत करें।

अमनचैन के ख्वाहिशमंद अब यही दुआ कर रहे हैं कि दरबार साहिब के लिए खुले करतापुर गलियारे पर अब सरहदी बंदिशों और सियासत की ‘काली छाया’ न पड़े। यही नहीं अमन के दुश्मन भी इस फिराक में हैं कि गलियारे पर चल पड़ी श्रद्धा की बयार का रुख मोड़ा जाये। इस पर चौकस रहने की बहुत जरूरत है। अब तक दूरबीन के जरिये इस गुरुघर में मन से श्रद्धा अर्पण करने वाले हजारों श्रद्धालु अब सीधे शीश भी नवा सकेंगे।

सिख आस्था का यह बड़ा केंद्र इस बार और भी खास हो गया है क्योंकि पूरा विश्व गुरु नानकदेवजी का 550वां जन्मोत्सव मना रहा है। सालभर से इसकी तैयारियां चल रही हैं। सिखों के संगठनों के अलावा भारत सरकार एवं राज्य सरकारों ने कई नये कार्यों को अंजाम दिया। इनमें एक महत्वपूर्ण है पंजाब के सुल्तानपुर लोधी तक नेशनल हाईवे का नाम गुरु नानकदेवजी मार्ग किया जाना है। कुछ समय पूर्व केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सड़क यातायात एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से इसका अनुरोध किया गया था जो उन्होंने मान ली। पंजाब सरकार भी इसके लिए जरूरी कार्यवाही में जुट गयी।

यहां गौर योग्य बात है कि यह गलियारा भारत के पंजाब में डेरा बाबा नानक गुरुद्वारे को करतापुर स्थित दरबार साहिब से जोड़ेगा जो अंतर्राष्ट्रीय सीमा से महज चार किलोमीटर दूर पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के नरोवाल जिले में स्थित है। पूरे मुद्दे पर अहम पड़ाव तब आया जब बड़ी जद्दोजहद के बाद पिछले दिनों समझौते पर हस्ताक्षर हुए। नरोवाल में भारत-पाकिस्तान सीमा पर करतारपुर जीरो प्वाइंट पर आयोजित एक कार्यक्रम में भारत की तरफ से केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव एससीएल दास ने, जबकि पाकिस्तान की तरफ से पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने समझौते पर दस्तखत किए। गुरुद्वारा दरबार साहिब में सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव ने अपने जीवन के अंतिम 18 वर्ष बिताए थे। समझौते के तहत श्रद्धालु सुबह के समय यहां पहुंचेंगे और गुरुद्वारा दरबार साहिब के दर्शन कर शाम तक लौटेंगे। हर दिन कम से कम 5,000 श्रद्धालुओं को बिना वीजा के इस पवित्र स्थल तक आने की अनुमति का समझौता हुआ है। प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि भारतीयों का पासपोर्ट नहीं लगेगा लेकिन आर्मी के जनरल ने कहा है कि भारतीयों का पासपोर्ट लगेगा।

सियासत और नफरत के साथ ही सरहदी बंदिशों को दरकिनार कर बात करें तो पाकिस्तान के हिस्से में आये सिखों के इस पवित्र स्थल के आसपास की छटा देखते ही बनती है। सिखों के लिए पावन इस क्षेत्र में हर धर्म के लोग सेवा देते हैं। कहा जाता है कि गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर कुदरत का बनाया अद्भुत स्थान है। पाकिस्तान में सिखों के और भी धार्मिक स्थान हैं- डेरा साहिब लाहौर, पंजा साहिब और ननकाना साहिब उन गांव में हैं जो भारत-पाक सीमा के क़रीब है। अमनचैन का संदेश देने वाली गुरु की यादगार स्थली से खुशनुमा बयार यूं ही बहती रहेगी, इसकी कामना सब करें।

चिंताओं पर भी हो गौर जश्न और खुशी की इस गुनगुनी धूप के बीच आशंकाओं के बादल भी उमड़-घुमड़ रहे हैं। भाजपा एवं कांग्रेस समेत कई दलों के नेताओं ने आगाह किया है कि पाकिस्तानी चाल से बचा जाए। राज्यसभा सदस्य व भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने तो कुछ समय पूर्व यहाँ तक कह दिया था कि करतारपुर कॉरिडोर का काम बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान इस गलियारे के जरिये अपने आतंकी मंसूबों को भी आगे बढ़ा सकता है। उनके अलावा पंजाब के मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कैप्टन अमरेंद्र सिंह शुरू से सतर्क रहने की सलाह देते रहे हैं। अब भी वह इस पर अपनी ऐसी ही राय दे रहे हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान बाज नहीं आने वाला। हालांकि उन्होंने श्रद्धालुओं की अपनी सरकार की ओर से हर तरह की मदद का आश्वासन दिया है। यहां गौर योग्य है कि कैप्टन अमरेंद्र ही गुरु नानकदेव जी के 550वें जन्मोत्सव समारोहों की अगुवाई करेंगे।

आर के सिन्हा
(लेखक राज्यसभा सांसद हैं।)
1/22 हुमायूं रोड, दिल्ली

 

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