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निगम सदन की बैठक में छाए रहे सफाई व्यवस्था, अधूरे विकास कार्य व दूषित पेयजल के मुद्दे

मनोज तोमर/विजय न्यूज ब्यूरो

फरीदाबाद। जिले में सफाई व्यवस्था, रुके हुए विकास कार्य, अधिकारियों की लापरवाही, निधि का जारी नहीं होना आदि मामलों को लेकर आज नगर निगम सभागार में आयोजित हुई सदन की बैठक काफी हंगामेदार रही। जहां पार्षदों ने अपने-अपने वार्डाे में रुके हुए विकास कार्यों के लिए कई अधिकारियों के खिलाफ सदन अध्यक्ष से कार्रवाई की मांग वहीं पेयजल, सीवरेज आदि विषयों पर पार्षदों के तीखे सवालों का जवाब देना अधिकारियों को मुश्किल हुआ। गर्मागर्म नोक-झोंक और बहस के बीच पार्षदों ने सदन में 100 मदें प्रस्तुत कीं। इनमें से अधिकतर स्वीकृत हुईं जबकि कुछ का निर्णय कमेटी पर छोड़ा गया और कुछ को मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजना तय हुआ।  बैठक में  पार्षद सतीश चंदीला ने शहर में जगह जगह लगे कूड़े के ढेर और गंदगी की जानकारी देते हुए कहा कि निगम के दस्तावेज में चार हजार सफाई कर्मी हैं। वार्डांे में तीन हजार से भी कम कर्मचारी तैनात हैं। अन्य पार्षदों ने उनका साथ देते हुए कहा यह सफाईकर्मी काम ही नहीं करते, इनकी कोई जवाबदेही नहीं हैं। सतीश चंदीला ने जानना चाहा कि बाकी 11 सौ सफाईकर्मी कहां हैं, अधिकारी इसका जवाब नहीं दे सके। आरोप लगा कि यह कर्मचारी अधिकारियों के घर में तैनात हैं इसलिए जनता का काम नहीं करते। पार्षदों ने सफाईकर्मियों की हाजिरी बायोमीट्रिक मशीन से लगवाने की मांग की। आरोप लगाया कि अधिकारियों ने जानबूझ कर हाजिरी की बायोमीट्रिक मशीनें खराब की हैं जबकि पूरे हरियाणा में इनका इस्तेमाल हो रहा है। वरिष्ठ उपमहापौर देवेंद्र चौधरी ने कहा कि यदि बायोमीट्रिक सिस्टम लागू किया तो सफाईकर्मी काम ठप कर देंगे, क्या पार्षद यह स्थिति झेलने को तैयार हैं। उनके जवाब पर अधिकतर पार्षद भडक़ उठे, बोले कि इसका अर्थ तो यह हो गया कि कर्मचारियों की मंशा सरकार के आदेश से भी ऊपर है, उपमहापौर मनमोहन गर्ग ने किसी तरह बात संभाली।   पार्षदों को सबसे ज्यादा शिकायत अतिरिक्त निगमायुक्त पार्थ गुप्ता से थी। सभी पार्षद इस बात पर एकमत थे कि पार्थ गुप्ता किसी भी विकास की फाइल को स्वीकृति नहीं देते, चाहे वह सीएम घोषणा, एससीबीसी की हो या स्वर्ण जयंती योजना की। पार्षद जयवीर खटाना ने कहा कि सीएम साहब घोषणा करते हैं पार्थ गुप्ता ऑब्जेक्शन लगाते हैं। जब सीएम साहब विकास के लिए इतना पैसा दे रहे हैं तो अधिकारी क्यों ऑब्जेक्शन लगाते हैं, काम क्यों नहीं हो रहा, यह अधिकारी ही सरकार को बदनाम कर रहे हैं। एक पार्षद ने बताया कि ट्यूबवेल की फाइल पास हो गई और टेंडर के बाद ठेकेदार से निगोसिएशन भी हो गया। निगोसिएशन के बाद स्वीकृति के लिए भेजी गई पार्थ गुप्ता ने उस पर भी ऑब्जेक्शन लगा दिया, स्वीकृति के बावजूद ऑब्जेक्शन क्यों। अन्य पार्षदों का आरोप था कि उन्हें चुनकर आए एक साल हो गया लेकिन पार्थ गुप्ता ने एक भी विकास की फाइल पास नहीं की। वार्ड नंबर 7 के पार्षद बीर सिंह नैन ने अपने वार्ड में सफाई व्यवस्था, सीवरेज ओवरफ्लो होने के मुद्दों को जोरशोर से उठाया और कहा कि चुनाव के समय जनता से जो उन्होंने विकास के वायदे किए थे, अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही के चलते वह पूरे नहीं हो पा रहे है, जिससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है। बैठक में अतिरिक्त निगमायुक्त ने कहा कि अगले सप्ताह से वह पार्षदों से मिलकर वार्डवार विकास की फाइलें देखेंगे और पास करेंगे, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि जो फाइल ऑब्जेक्शन लगाने वाली होंगी उन्हें आपत्ति खत्म होने तक अनुमति नहीं देंगे।

पार्षदों ने बैठक में काटा जमकर बवाल
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