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नॅशनल एजुकेशन दिवस

आज देश नॅशनल एजुकेशन दिवस माना रहा है इसी विषय पर हमारी सहयोगी संस्था, देशी की अग्रणी एजुकेशन थिंक टेंक, सेंटर फॉर एजुकेशन ग्रोत एंड रिसर्च के द्वारा देश के कुछ अच्छे शिक्षा विद एवं कॉर्पोरेट के राय को लिया गया है।  सेंटर फॉर एजुकेशन ग्रोत एंड रिसर्च देश की पहली एजुकेशन थिंक टेंक है जिसके पास ४ इनोवेशन का क्रेडिट है। सी ई जी आर के बारे मैं जानने के लिए, www.cegr.in पर क्लिक करे।

नए प्रतिमान स्थापित करने का समय
किसी भी राष्ट्र के विकास के लिए मार्ग का शिक्षा में एक आवश्यक प्रवेश द्वार है। इस शिक्षा दिवस पर, मैं शिक्षा से जुड़े हर एक के लिए तत्पर होगा कि हमारे लोगों को उस द्वार को पार करने के लिए जितना संभव हो सके सक्षम करने के लिए एक प्रतिज्ञा लेनी चाहिए। आइए हम शिक्षा को बहुत ज्यादा संयोजित न करें। स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, तकनीकी, व्यावसायिक, व्यावसायिक, इत्यादि में व्यवाहारिकता लाने की आवश्यकता है। इसके बजाए, हमें सीमाओं को फैलाने और शिक्षा को एकीकृत करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। आज नए प्रतिमान स्थापित करने का समय है नए परिभाषा गढ़ने की आवश्यकता है जिसे रुपए और डॉलर से तुलना नहीं की जा सकती है। इसलिए शिक्षा के सभी स्तरों के लिए अभिनव और रचनात्मकता आवश्यक है क्रिएटिविविटी पर प्राथमिकता देते हुए परफॉर्मेंस नए प्रतिमान स्थापित होने चाहिए।

-प्रो. के. के. अग्रवाल, कुलपति, के आर मंगलम विश्वविद्यालय

स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता ही बेहतर शिक्षा की ओर ले जाएगा
स्कूल एजुकेशन फाउंडेशन जैसा ही पूर्व नर्सरी और मिडिल स्कूल स्तर शुरू करने की आवश्यकता है। वैश्विक आवश्यकता को पूरा करने के लिए आज इस स्तर पर सीखने की जरूरत है। ज्यादातर नीति उच्चतर शिक्षा स्तर पर पहल होती है जिसके परिणाम से बाहर आने की संभावना है। विद्यार्थी को हर स्तर पर तैयार करने की आवश्यकता है नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए सदा तैयार करना चाहिए। और पाठ्य पुस्तकों में जो लिखा है उसपर प्रायोगिक स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है। नई शिक्षा नीति के चेयरमैन डॉ के कस्तुरीरंगन ने न्यू देहली इस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के 25 वे स्थापना दिवस पर छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आज व्यावसायिक शिक्षा में बेहतर परिणाम के लिए वैश्विक स्तर पर नित्य नए शोध और प्रतिमाणों पर कार्य करने की आवश्यकता है। तभी शिक्षा का महत्व को उपयोग हो पाएगा।

-वीएम बंसल, चेयरमैन, एनडीआईएम

स्किलएवं इनोवेशन सेंटरिक करिक्युलम की ज़रूरत है
देश मैं स्किलएवं इनोवेशन सेंटरिक करिक्युलम की ज़रूरत है जो एम्पॉल्यअबिलिटी स्किल गॅप को कम कर सके एवं नये रोज़गार का सिर्जन कर सके। फॅकल्टी ट्रैनिंग एवं स्टूडेंट ट्रैनिंग पे ज़ोर देने की ज़रूरत है। कॉलेज को फ्लेक्सिबिलिटी ही एक अच्छे एजुकेशन सिस्टम को सामने ला सकती है। करिक्युलम मैं एंट्रेपरेणेउर्शिप को इंकुल्केट करने की ज़रूरत है ताकि देश मैं जॉब क्रियेटर की संख्या को बदाया जेया सके।

राकेश चारिया, जनरल सेक्रेटरी, आइ एम एस ग्रूप ऑफ इन्स्टिट्यूशन्स

रीजनल इमबॅलेन्स को कम करने की ज़रूरत
आज देश के ५-६ राज्य मैं ८०% से ज़यादा टेक्निकल कॉलेज है। दूसरे राज्य के स्टूडेंट को इन राज्य मैं आ के पढ़ना पड़ता है इससे उच्च शिक्षा सिर्फ़ कुछ राज्य मैं सीमित हो गया है। सरकार इन राज्य एवं एकोनमोइकल्ली बॅक्वर्ड डिस्ट्रिक्ट मैं कॉलेज खोलने वाले को परेरित एवं सहयता प्रदान करे। यूनिवर्सिटी के लिए नॅशनल क़ानून बनाने की ज़रूरत है जिससे सारे नये एवं पुराने यूनिवर्सिटी के लिए सीट, रूल्स, कोर्सस एवं मिनिमम स्टॅंडर्ड मेनटेन हो सके। एक तय समय सीमा जैसे ५ साल या ८ साल के बाद ही कोई यूनिवर्सिटी रिसर्च कोर्स करा सके जिससे देश मैं रिसर्च की गुणवाता को बदाया जा सके।

रविश रोशन, डाइरेक्टर, सेंटर फॉर एजुकेशन ग्रोत एंड रिसर्च

उच्च शिक्षा और अनुसंधान के लिए अधिक धन समय की आवश्यकता
अनुसंधान उन्मुख पाठ्यक्रम के आधार पर प्रौद्योगिकी और पारंपरिक शिक्षा प्रणाली का उचित मिश्रण दिन की आवश्यकता है। कक्षा की शिक्षा या प्रत्यक्ष शिक्षा का कोई विकल्प नहीं है इसलिए सक्षम शिक्षकों की नियुक्ति आज की आवश्यकता है जब विश्वविद्यालय में कई पद खाली पड़े हैं। अब जबकि नई शिक्षा नीति पाइप लाइन में है। व्यक्तिगत तौर पर मेरा यह सुझाव है कि विश्वविद्यालय में स्थापित कम से कम एक एकीकृति अनुसंधान विभाग होना ही चाहिए। जहां शिक्षकों को शिक्षा और अनुसंधान के उभरते क्षेत्रों के बारे में जानकारी हासिल होनी चाहिए। आज शिक्षा के लिए अधिक से अधिक संसाधनों को विशेष रूप से उच्च शिक्षा और शोध प्रदान करने की तत्काल आवश्यकता है। इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है.।

–प्रो.एनके सिन्हा, कुलपति हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय

कॉलेज को जयदा अटॉनमी मिले
एजुकेशन सिस्टम को अगर बेहतर बनाना है तो कॉलेज को और जयदा अटॉनमी मिले। कॉलेज को कोर्स, कोर्स ड्यूरेशन, करिक्युलम, फीस, फॅकल्टी एवं स्टूडेंट सेलेक्ट करने की पूरी अटॉनमी मिले। स्किल एजुकेशन को हर स्कूल मैं ज़रूरी किया जाए। अच्छे स्कूल एजुकेशन के बाद हाइयर एजुकेशन की बहुत कम ज़रूरत रह जाती है एवं उसके बाद सीधे बच्चे जॉब कर सकते। अगर कोई जॉब के बाद हाइयर एजुकेशन मैं वापस आना च्चाए तो उसे पूरी फ्लेक्सिबिलिटी मिले।

एस के महापात्रा, डाइरेक्टर, जपुरिया स्कूल ऑफ बिज़्नेस

भारत में कौशल आधारित शिक्षा की आवश्यकता

भारत में शिक्षा प्रणाली को शिक्षा का उद्देश्य को पुनर्परिभाषित करने के लिए संरचनात्मक परिवर्तन की आवश्यकता है। स्कूलों में कौशल शिक्षा की आवश्यकता है। छात्रों को स्वरोजगार की प्रवृत्ति बढ़े इसके लिए शिक्षा देने की आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी कंप्यूटर की प्रशिक्षण, आईसीटी का उपयोग, परीक्षा में सुधार करने की आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी शिक्षा को व्यवहारिक रूप से अपनाने की आवश्यकता है न कि केवल डिग्री तक सीमित किया जाए। शिक्षा में आरक्षण जैसे सिस्टम को हटाकर सबको समान शिक्षा पर जोर देने की आवश्यकता है। निश्चिततौर पर शिक्षा आज डिग्री से हटकर पढ़ने व लिखने सीखने की आवश्यकता है।

-प्रो. विद्या शेखरी, निदेशक यूजी कैंपस, आईटीएस गाजियाबाद

फॅकल्टी ट्रैनिंग एवं करियर एनहॅन्स्मेंट प्रोग्राम पर ज़ोर देना होगा/
फॅकल्टी शिक्षा व्यवस्था के ड्राइविंग फोर्स है। अच्छे फॅकल्टी ही अच्छे स्टूडेंट का निर्माण कर सकते है इसलिए फॅकल्टी के करियर डेवेलपमेंट एवं एनहॅन्स्मेंट के लिए सभी को ज़ोर देना होगा। देश मैं अकाड़ेमिक लीडर की बहुत कमी है इसके लिए भी सार्थक पर्यास किया जाना चाईए। कॉर्पोरेट को करिक्युलम डिज़ाइन, लेक्चर, वर्कशॉप, बुक एवं रिसर्च पेपर पब्लिकेशन मैं एंगेज करने की ज़रूरत है तभी अकडमीशियन एवं कॉर्पोरेट दोनो एक दूसरे से सीख सकते है। रेग्युलेटिंग बॉडी देश के थिंक टेंक को साथ ले के चले तभी एक अच्छे एजुकेशन सिस्टम देश मैं लागू हो सकता है।

सोनम रोशन, मॅनेजर, सेंटर फॉर एजुकेशन ग्रोत एंड रिसर्च

विद्वजन शिक्षा प्रणाली में सुधार करें
आज शिक्षा को सभी स्तर पर विकास करने की आवश्यकता है। आज छात्रों में कौशल विकास के साथ साथ चरित्र निर्माण पर भी जोर देने की आवश्यकता है। “एक आदमी को एक मछली दीजिए और आप उसे एक दिन खिलाओ, उसे सिखाएं कि मछलियों को कैसे पकड़ना है और आप उन्हें जीवन भर के लिए खाना खिलाते हैं।” मेरा मानना है कि अगर आप एक आदमी को कौशल सिखाना चाहते हैं, तो आप उसे जीवन भर के लिए सक्षम कर सकते हैं। विद्यार्थियों को उसके रचनात्मक, समस्या सुलझाने मूल्यवान मूल शोध, नवाचार से मूल्यांकन करने की जरूरत है न कि उसके नंबर से उसकी योग्यता को परखा जाए। शिक्षा प्रणाली में सुधार करन के ले हमें नेताओं, शिक्षण पदोंमें उद्यमियों की आवश्यकता है। केवल वेतनभोगी बनाने पर आज जोर देने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।

-प्रो. अनुराधा जैन, डीन, विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज

रोजगार कौशल पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता
सरकार अपने निरंतर सुधारों के माध्यम से विस्तार, उत्कृष्टता के लिए प्रतिबद्ध रहा है, संस्थानों के फेरबदल और छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना, राष्ट्र की बढ़ती आकाक्षाएं विशेष रूप से बढ़ते मध्यम वर्ग, रोजगार कौशल सहित को भी पूरा करने की आवश्यकता है
दुर्भाग्य से आज भी शिक्षा प्राथमिक स्तर पर नहीं है यानी अंतिम बैंच पर है। यह भयावह है कि आज भी 45 फीसदी स्नातक नौकरी पाने में असमर्थ हैं। इसके लिए चार्ट तैयार कर सही तरीके से शिक्षा प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना है। एमओओसी को पैमाने पर उद्योग जुटाने वाले प्रमाणीकरण की पेशकश करना सही लोगों को आकर्षित करना और उच्च शिक्षा वाले व्यवसाय के लिए निर्माण क्षमता और शोध और प्रशिक्षम और वितरण पर प्रदर्शन के लिए ट्रैंकिग टूल का उपयोग करने की आवश्यकता है।

-लोकेश मेहरा, निदेशक मिलियन लाइट्स

कौशलयुक्त शिक्षक पर हो जोर
मेरे विचार से शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार किया जाना चाहिए और यह केवल उन्हें जीवन, कौशल और प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए नियमित रूप से उन्नयन के साथ प्रशिक्षण के जरिए ही हो सकता है ताकि कौशलयुक्त शिक्षक का विकास हो सके।
21 वीं सदी के छात्रों को तैयार करने के लिए असाधारण शैक्षणिक वातावरण तैयार करने की आवश्यकता है। एजुकेशन डे पर इस तरह के वातावरण तैयार करने की आवश्यकता है ताकि कौशलयुक्त छात्र भी तैयार कर सके।

-हरप्रीत रंधवा, निदेशक, विन्सपायर ट्रेनिंग व कंसल्टेंट प्रा. लि.

इंजिनियरिंग शिक्षा में मानविकी व सामाजिक विज्ञान को जोड़ने की आवश्यकता
वैश्वीकरण के बाद भारत में इंजीनियरिंग शिक्षा में वृद्धि का अनुभव किया है। 1990 में केवल 302 इंजीनियरिंग डिग्री स्तर के कॉलेज थे जो 2016-17 मे बढ़कर 3224 हो गए हैं। इंजीनियरिंग शिक्षा का विकास मानव विकास के लिए एक संकेतक माना जा सकता है। लेकिन कम गुणवत्ता और क्षेत्रीय असंतुलन के लिए इसकी आलोचना की जा रही है। लंबे समय में मानविकी और सामाजिक क्षेत्र की उपेक्षा होती रही है। आम भाषा में कहे तो इंजीनियरिंग समाज के लिए विज्ञान का एक अनुप्रयोग है और समाज को समझने के बिना कल्याण को अधिकतम करने के लिए विज्ञान का उपयोग करने के लिए इंजीनियरिंग जनशक्ति को प्रशिक्षित नहीं किया जा रहा है। जबकि विज्ञान तटस्थ स्थान पर है एक तकनीक अत्यधिक जगह है और लोगों को व्यक्तिपरक है। जो भी तकनीक यूरोप के लिए विकसित की गई है वह सांस्कृतिक, आर्थिक और भौगोलिक अंतर के कारण भारत में प्रभावी नहीं होगा। देश के संस्कृति के अनुसार यहां शिक्षा में सुधारात्मक उपाय करने की तत्काल आवश्यकता है।

-डॉ. सीमा सिंह, मानविकी विभाग, दिल्ली टेक्नोलॉजिकल विश्वविद्यालय।

शिक्षा को प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता
भारत में शिक्षा क्षेत्र तकनीकी परिवर्तन के एक शिखर पर खड़ा है। आज देश के विकास के लिए नई प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की आवश्यकता है। यह पूर्व स्कूल के स्तरों पर शुरू करने की जरूरत है और प्रारंभिक साक्षरता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। हमें पूरे सार्वजनिक शिक्षा में नवाचार को प्रोत्साहित करना चाहिए। आज उन स्कूलों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है जो अलग हटकर शिक्षा के विकास के उन्नोत्तर लगे हुए हैं।

-नीतू सेतिया, सहायक प्रोफेसर, गुरु तेग बहादुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी

क्वालिटी हाइयर एजुकेशन के लिए ग्लोबल लिंकेजस की ज़रूरत
देश मैं क्वालिटी हाइयर एजुकेशन को बढ़ने के लिए हाइयर एजुकेशन को इंटरनॅशनल यूनिवर्सिटी एवं रिसर्च सेंटर्स से जोड़ने की ज़रूरत है। इंटरनॅशनल फॅकल्टी को देश मैं आने के लिए सही माहौल बनाना होगा। इंटरनॅशनल स्टूडेंट एवं फॅकल्टी का एक्सचेंज प्रोग्राम को सरकार सहयोग दे ताकि कल्चरल एक्सचेंज हो सके एवं इंटरनॅशनल लर्निंग हो सके।

 

कुलनीट सूरी, वाइस प्रेसीडेंट, सी ई जी आर, देल्ही काउन्सिल

इंडस्ट्री अकडीमिया कोलॅबोरेशन पर ज़ोर देना होगा
शिक्षा एक सेवा है और क्वालिटी एजुकेशन के लिए ईगो भूल कर सब को एक साथ बैठना पड़ेगा। इंडस्ट्री और अकडीमिया सभी इसी सेवा भाव से एक दूसरे के साथ बैठ कर करिक्युलम डिज़ाइन करे एवं एक दूसरे का मार्ग दर्शन करे। फॅकल्टी डेवेलपमेंट के लिए भी इंडस्ट्री को सामने आना पादगे एवं इंडस्ट्री की ज़रूरत को बताना पड़ेगा। फॅकल्टी को अपने नेटवर्किंग एवं लर्निंग लगातार बढ़ाना पड़ेगा

 

संदीप त्रिपाठी, हेड, रिसर्च, एन आइ एम एस यूनिवर्सिटी

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