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नेता पुकारे चुनाव किनारे !

नेताजी को बड़ी चिंता सता रही थी । चार – पांच साल बाद फिर वही टंटा ! वोटों की खातिर उन्हें घर – घर जाकर भीख मांगनी पड़ेगी । हाय रे ! यह कैसा लोकतंत्र ! ये चुनाव आते ही क्यों हैं ? इसी उधेड़बुन में ; क्या करें कि क्या न करें !!! उन्होंने एयर कंडीशनर तेज किया । एक घूंट अमृत – सोमरस का खींचा । कन्या को अब हल्के हाथों से सिर दबाने का इशारा किया और लगे सोचने । क्या किया जाए कैसे किया जाए ? एकाएक तीव्र झटके से उठ गए नेताजी । उन्होंने नमकीन कन्या और बोतल को एक किनारे रखा और अपने मुख्य चम्मच को फोनियाना शुरू किया । नेताजी ने कहा – “सुनो मुझे नालेपार झोपड़पट्टी के गंदे बच्चे को गोद में उठाना है । कहीं से एक बच्चे की व्यवस्था करो । एक अच्छे मेकअप मैन व ड्रेस डिजाइनर को बुक कर लो । बच्चे को ऐसा सजा दो कि वह मरियल , भुखमरा और महागंदा लगे ; लेकिन उसके शरीर से बदबू नहीं आनी चाहिए । ऐसी ड्रेस तैयार करो कि भिखमंगे की ड्रेस भी धोखा खा जाए । समझे ! …और हां । दो-चार फोटोग्राफरों और चैनल वालों को तैयार कर लो । धांसू प्रचार होना चाहिए । समझे !” नेता जी ने सरक कर कन्या वह बोतल को फिर से गले लगाते हुए फोनंफोन मंत्र मारा – “… और सुनो ! परसों शहर के सुंदर नगर के कचरे का उद्घाटन करना है । उद्घाटन मतलब उठावना । तुम्हें पता है ना ! मुझे बदबू से एलर्जी है । तुम उस कचरे में दो ड्रम सेंट मिला देना । जिस परात और फावड़े से मुझे कचरा भरकर प्रतीक रूप में ट्रकों में डालना है ; उस परात और फावड़े को रात भर सेंट के ड्रम में डुबोकर रखना । तुम्हारे उन्हीं चैनल – चैनल गुंजित करते इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वालों को पकड़ लाना । कचरा उठाते , दलितों , गरीबों , किसानों के घर जाते , गंदे बच्चों को उठाते हुए आदि से संबंधित डॉक्यूमेंट्री फिल्में हर एक चैनल व हर एक सोशल मीडिया में गुंजायमान होनी चाहिए । सभी अखबारों में ये तस्वीरें भी प्रकाशित होनी चाहिए । समझे !”
नेता जी ने अपने हाईकमान के पोस्टर के नीचे फिर से रसपान जारी रखा । मुख्य चम्मच को निर्देशित किया – “… और हां ! परसों अमृत नगर में एक नाले का सफाई समारोह करना है । नाले में इत्र बहाना तुम्हारा काम है । मैं उसे साफ करूंगा । इसकी भी करारी – कुरकुरी फिल्में बननी चाहिए । सब काम ठीक से हो जाना चाहिए । इस काम के लिए ‘एवन भीड़ सप्लायर’ से 40 – 50 हजार की भीड़ बुक करा लेना । नारे लगाने वाले व जयकार करने वाले भी कमबख्त अपनी मजदूरी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं । 10 – 20 रुपये बढ़ा देना । वह विपक्षी गंजू भी उसी ‘एवन भीड़ सप्लायर’ से ही भीड़ खरीदता है । कहीं वह पहले भीड़ न ले जाए । तू जल्दी जाना । समझे ! …और हां पार्टी हाईकमान ने अपने हिस्से की शराब व शस्त्र मेरे पास भिजवा दिए हैं । कार्यकर्ताओं में बंटवा देना । भूल मत करना । रुपयों की चिन्ता भी मत करना ।” नेता जी ने फोन डिस्कनेक्ट किया और एक सुकून के साथ कन्या मय बोतल से टोटल कनेक्ट किया ।

रामविलास जांगिड़, 18, उत्तम नगर , घूघरा , अजमेर (305023) राजस्थान

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