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नोटबंदी की सालगिरह पर. . . . ’पब्लिक डिमांड’

जयपुर में 8 नवम्बर आज सुबह से ही आम जनता व मौजूदा प्रशासन ‘डीमोनेटाईजेषन’ की पहली वर्ष गांठ को अलग अलग तरह से मना रहा था, सेलीब्रेट कर रहा था या यूं कहिये कि नोटबंदी से प्रशासन ने और हमने क्या खोया और क्या पाया, क्या नफा-नुक़्सान रहा। बीजेपी, जयपुर के मुख्यालय में केन्द्र से श्री सुरेष प्रभु भी आये और गत वर्ष से अब तक की मौजूदा सरकार की उन्होंने उपलब्धियां भी गिनाईं। ‘लैसकैश इकॉनॉमी’ बनने के सफर में अहम रही नोटबंदी, यह श्री सुरेश प्रभु का कहना था।
आतंकवाद और नक्सलवाद की कमर ज़रुर टूटी मगर बाकी और परेषानियों का सामना आम जनता को ही करना पड़ा। जनता की एक कॉमन आवाज के अनुसार ’राजनीति से काले धन का सफाया हो सके और राजनीतिज्ञों के लिए भी नियम कानून समान हो।’ जो वास्तव में अभी तक नहीं हुआ है।
इन सब बातों को मद्देनजर रखते हुए इस ’एंटी ब्लैक मनी डे’ को अलग-अलग अंदाज से लोगों ने ‘विरोध दिवस’, ‘काला दिवस’ के रुप में मनाया। आम आदमी पार्टी तथा आरटी आई एक्टीविस्टों व वकीलों ने ’रोजेरी डे’ यानि धूर्तता दिवस, कांग्रेस ने ’काला धन विरोधी दिवस’, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ने मनाया ’जवाब देही दिवस’, इत्यादि।
एक सवाल यह भी उठता है कि जहां श्री मोदी जी के पास लाखों रुपए महीने की तनख्वाह के उच्चाधिकारी काम करते हैं। वहां उन सबमें से किसी के दिमाग में ये नहीं आया कि नोट मुद्रण के हजारों करोड़ रुपये के खर्च को बचाने का कोई उपाय निकाला जाय और देष को इस अचानक आए आर्थिक भार से कैसे बचाया जाए। एक तरीका था कि पुराने नोटों पर ही एक ऐसी मोहर बनाकर लगा दी जाती जिससे छापी गई उनकी नई कीमत पर वही करेंसी दुबारा से चला दी जाती। इससे हजारों करोड़ की जगह कुछ ही करोड़ में छपाई, कागज, निस्तारण को खर्च बचाया जा सकता था। और कॉलबैक की गई पुरानी मुद्रा को समेट कर अंतिम रूप देने का झंझट भी समाप्त हो जाता।

 

लियाक़त ए. भट्टी
16-ए, ’’फ्लावर हाउस’’, ग्राउन्ड फ्लोर, गेट नं. 2 के अन्दर,

मिशन कम्पाउन्ड, सी-स्कीम, जयपुर-३०२००१ संपर्क 098281-35454

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