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न्यू इंडिया बनाने में शिक्षा और शिक्षकों का योगदान

वर्तमान में देश में शिक्षा की दुर्गति देख यह यकीन कर पाना मुश्किल है कि ये वही भारत है जहां तक्षशिला व नालंदा जैसे विश्वविद्यालय विश्व के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में से एक माने जाते थे। जो देश चाणक्य और रामकृष्ण परमहंस जैसे महान शिक्षकों का आदर्श रहा हो और जिन्होंने चन्द्रगुप्त मौर्य और स्वामी विवेकानंद का निर्माण किया हो, उसी देश में शिक्षा व शिक्षकों की दयनीय स्थिति सबसे बड़ी विडंबना को इंगित करती है। शिक्षक अपने उद्देश्य और लक्ष्यों से भटककर प्रलोभन के मद में चकनाचूर हो गये है और शिष्य अंगूठा काटकर देने की परंपरा के विपरीत अंगूठा दिखा रहे है। आज स्कूलों के नाम पर बिल्डिंगों का निर्माण, रिजल्ट का विज्ञापन और मैरिट टॉपर्स के बैनर लगाकर जनसाधारण का ध्यान आकर्षित करनी की अंधी प्रतिस्पर्धा छायी हुई है। यह कहे तो भी अतिश्योक्ति नहीं होगी कि शिक्षण संस्थान ज्ञान की तक्षशिला की जगह अंक उत्पादन की फैक्ट्री बनते जा रहे है।
हम अक्सर अपने देश की शिक्षा की तुलना विदेशी शिक्षा से करते है। विदेशी शिक्षा व तकनीकी उपकरणों पर आधारित शिक्षा की वकालात करते हुए हमारे मुंह दर्द नही करते ! लेकिन, हम अपनी वैदिक एवं प्राचीन शिक्षा पद्धति का इतिहास भूलते-बिसरते जा रहे है। आज जो चीन हमें धमकी दे रहा है, उसी चीन के लोगों को भयंकर महामारी की चपेट से भारतीय गुरु बोधिधर्मन ने बचाया था। महान चिकित्सक को चीन के लोगों ने भगवान का दर्जा दिया। चीन के लोगों को बोधिधर्मन कौन है और उन्होंने क्या किया, सब पता है। लेकिन, हम में से अधिकत्तर भारतीयों ने उनका नाम भी नहीं सुना होगा ! यही दुःख की बात है कि जो ज्ञान भारत का था, आज उसी ज्ञान और हुनर का सहारा लेकर हमारे ही हथियारों से हमें पड़ोसी मुल्क मार रहे है।
स्कूलों से नामांकन कम होने पर देश का नीति आयोग शिक्षा सुधार के उपाय खोजने की बजाय निजी हाथों में देनी की बात करता है। इससे शिक्षा का व्यापारवाद और पैसे कमाने की प्रतिस्पर्धा ही जन्म लेगी। इन महंगी फीस वाले स्कूलों में रईसों की संताने क ख ग की जगह ए बी सी डी सिखेंगी। लेकिन, गरीब और आमजन के नौनिहालों के शिक्षा को लेकर भविष्य का क्या होंगा ? आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न्यू इंडिया बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। न्यू इंडिया बनाने के लिए हमें नये सिरे सोचना होंगा। यदि शिक्षा में बदलाव करें व शिक्षक अपनी जिम्मेदारी समझे तो न्यू इंडिया बनाने का सपना साकार होते देर नहीं लेगा।

– देवेंद्रराज सुथार

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