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पिंकसिटी पर मंडराए हादसों के बादल

राजस्थान की राजधानी जयपुर में इन दिनों सड़क हादसों के बादल मंडरा रहे है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक प्रतिदिन इसकी चपेट में आरहे है। यातायात मार्गों पर अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो रही है। दो पहिया हो या चार पहिया  किसी को भी जिंदगी की परवाह नहीं है। एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगी है। यातायात नियमों की सरेआम धज्जियाँ उड़ रही है। नियमों की पालना नहीं होने से दुर्घटनाओं के अम्बार लग रहे है। बताया जाता है कि गत वर्ष नियमों का उल्लंघन करने पर लगभग तीन लाख वाहनों के राजधानी में चालान काटे गए फिर भी व्यवस्था में कोई सुधार परिलक्षित नहीं हुआ। इस साल के आंकड़ों पर नजर डाले तो साढ़े तीन लाख से अधिक चालान अब तक काटे जा चुके है। सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ में तेजी से वृद्धि हो रही है। दुर्घटनाओं में मौतें और घायल होने के समाचार प्रतिदिन पढ़ने और देखने को मिल रहे हैं।   राजधानी में प्रत्येक माह लगभग तीन दर्जन लोगों की मौत सड़क हादसों में हो रही है। सैंकड़ों लोगों के घायल होने के समाचार देखने और पढ़ने को मिल रहे है। सड़क दुर्घटनाओं से अखबार भरे रहते हैं। राजधानी के यातायात मार्ग तो जाने-अनजाने मौत के मार्ग बन गये हैं। सबसे बुरी स्थिति टोंक रोड पर बी-2 बाईपास, जे.एल.एन. मार्ग पर ओ.टी.एस. चैराहा, जगतपुरा पुलिया, झालाना मार्ग, अजमेर रोड, न्यू सांगानेर रोड, सिरसी रोड, राजापार्क में गोविन्द मार्ग, अजमेरी गेट, विश्वविद्यालय मार्ग, घाट की गुणी की है।       सड़क सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है, आम जनता में खासतौर से नये आयु वर्ग के लोगों में अधिक जागरुकता लाने के लिये इसे शिक्षा, सामाजिक जागरुकता आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जोड़ा गया है। सड़क दुर्घटना, चोट और मृत्यु आज के दिनों में बहुत आम हो चला है। सड़क पर ऐसी दुर्घटनाओं की मुख्य वजह लोगों द्वारा सड़क यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा उपायों की अनदेखी है। गलत दिशा में गाड़ी चलाना, सड़क सुरक्षा नियमों और उपायों में कमी, तेज गति, नशे में गाड़ी चलाने आदि । सड़क हादसों की संख्या को घटाने के लिये उनकी सुरक्षा के लिये सभी सड़क का इस्तेमाल करने वालों के लिये सरकार ने विभिन्न प्रकार के सड़क यातायात और सड़क सुरक्षा नियम बनाये हैं। हमें उन सभी नियमों और नियंत्रकों का पालन करना चाहिये जैसे रक्षात्मक चालन की क्रिया, सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल, गति सीमा को ठीक बनायें रखना, सड़क पर बने निशानों को समझना आदि। जान लेवा सड़क हादसों को रोकने के लिए जरूरी है कि सड़कों की स्थिति अच्छी हो, जन कल्याणकारी सरकार का यह दायित्व है कि वह उच्च गुणवत्ता युक्त सड़कों का निर्माण करें और क्षत-विक्षत सड़कों को दुरस्त करें ताकि वाहन किसी दुर्घटना का शिकार नहीं होवे। नगर निकायों और एजेन्सियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिये। घटिया निर्माण पर तुरन्त कार्यवाही हो तथा यातायात और टैªफिक की वर्तमान स्थिति में जनभावनाओं के अनुरूप सुधार हो। आम आदमी को राहत प्रदान करने के लिए निर्माण कार्यों में पारदर्शिता का होना अत्यावश्यक है।

बाल मुकुन्द ओझा, वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकारडी-32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर मो.- 9414441218

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