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पूर्व रेलवे द्वारा निर्बाध और संरक्षित रेल संचालन के प्रबंध

जयपुर। आगामी मानसून सीजन के सक्रिय होने से पूर्व रेलवे द्वारा निर्बाध और संरक्षित रेल संचालन के लिये विषेष प्रबंध किये गये है। उत्तर पष्चिम रेलवे के मुख्य जन सम्पर्क अधिकारी श्री तरूण जैन के अनुसार आगामी मानसून के सीजन को देखते हुये विषेष व्यवस्थाएं की है। इसके लिये सभी मण्डलों को दिषा-निर्देश दिए किये गये है। बारिष के मौसम में रेलवे में कई स्थानों पर तेज बारिष होने की स्थिति में ट्रेक/पुल के नीचे तेज बहाव के कारण मिट्टी निकल जाती है और ऐसी स्थिति में रेल संचालन संरक्षित नहीं रहता है। ऐसे स्थानों की पूर्व अनुभवों के आधार पर पहचान कर चिन्हित किया गया है। ऐसे स्थानों पर पेट्रोलमैन की नियुक्ति करना और इन सेक्षनों में नियमित पेट्रोलिंग करना।
पानी निकासी के स्थानों को साफ कर सुनिष्चित करना की पानी सही तरीके से निकल रहा है अथवा नहीं। पहाडी क्षेत्र जहाॅ चट्टाने खिसकने की घटनाएं होती है वहाॅ विषेष पैट्रोलिंग कर स्थिति का तुरंत जायजा लेकर ही रेल संचालन करना। असामान्य और अधिक बारिष की स्थिति में रेलकर्मियों द्वारा नियमित पेट्रोलिंग।जेसीबी/ट्रेक्टर का पर्याप्त प्रबंध, ताकि असामान्य परिस्थितियांे में तुरंत कार्य प्रारम्भ किया जा सके। रेलवे कर्मचारियों व अधिकारियों द्वारा विषेषतः तेज बारिष की अवधि में फुट प्लेट और मोटर ट्रोली द्वारा निरीक्षण। प्रत्येक मण्डल पर गैंगमैन, कीमैन, पेट्रोलमैन, मेट तथा सुपरवाईजर के लिये बारिष के मौसम में कार्य करने के तरीकों से अवगत करवाने के लिये सेमिनार का आयोजन। संरक्षित रेल संचालन को सुनिष्चित करने के लिये सिगनल उपकरणों जैसे रिले रूम, पाॅवर रूम, बैट्री रूम, एक्सल काउंटर रूम तथा पैनल रूम का निरीक्षण एंव यह सुनिष्चित करना की यहाॅ किसी भी प्रकार का पानी के लिये लिकेज न हो। स्टेषनों पर स्थापित ब्लाॅक उपकरण, एक्सल काउंटर, इलैक्ट्राॅनिक इंटरलाॅकिंग के लिये सही अर्थिगं तथा यह सुनिष्चित करना कि सभी उपकरण यथोचित तरीके से कार्य करें। स्टेशनो पर पाॅवर सप्लाई की वैकल्पिक व्यवस्था के लिये डीजल जैनरेटर, सोलर पैनल की व्यवस्था को सुनिष्चित करना। पानी भरने से ट्रैक सर्किट फेलियर को रोकने के लिये उचित प्रबंध। ट्रैक के आस-पास पेडों के बढने से सिगनल को देखने आने वाली कठिनाई को देखते हुये पेडों की कटाई करना। इंजन में वाइपर, एयर ड्रायर, रूफ क्लेम्प तथा सेंडिंग गियर की कार्यप्रणाली को सुनिष्चित करना। इंजन में नमी की स्थिति के लिये सिलीका जैल, एयर फिल्टर तथा गैसकेट का सही स्थिति में होना। माल लदान सुरक्षित हो इसके लिये वैगन को तिरपाल से ढकने का प्रावधान। माल लदान में सामान को दरवाजों से थोडा दूर करके रखना। कवर्ड षैड की मरम्मत ताकि पानी से किसी प्रकार की क्षति न हो। मानसून अवधि में चिन्हित स्थानों पर पर्याप्त मात्रा में मिट्टी के कट्टे, गिट्टी, गार्डर, रस्सी इत्यादि को रखा जाता है, साथ ही सामान को वैगन में भी लोड करके रखा जाता है ताकि कटाव/बहाव वाले स्थान पर जल्द से जल्द पहुंच कर रेल संचालन बहाल किया जा सके।
रेलवे द्वारा बारिष के दौरान संरक्षित संचालन के पर्याप्त प्रबंध किये जा रहे है, ताकि इस मौसम में गाड़ियों का संचालन संरक्षित तरीके से किया जा सकें। रेलवे प्रषासन द्वारा अतिरिक्त यात्री यातायात के दबाव को देखते हुए यात्रियों की सुविधा हेतु 02 रेलसेवाओं में 01-01 थर्ड एसी डिब्बें की अस्थाई बढोतरी की। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री तरूण जैन के अनुसार गाडी संख्या 12720/12719, हैदराबाद-जयपुर-हैदराबाद द्वि-साप्ताहिक एक्सप्रेस में हैदराबाद से दिनांक 02.07.18 से 30.07.18 तक एवं जयपुर से दिनांक 04.07.18 से 01.08.18 तक 01 थर्ड एसी श्रेणी के डिब्बें की अस्थाई बढोतरी की गई है। इस बढोतरी से इस गाडी के मार्ग के मुख्यतः सिकन्दराबाद, निजामाबाद, पूर्णा जं., अकोला जं., भोपाल, उज्जैन, मंदसौर, नीमच एवं अन्य स्टेषनों के यात्रियों को प्रत्येक फेरे में थर्ड एसी श्रेणी की 64 बर्थ अधिक उपलब्ध हो पायेगी। गाडी संख्या 02731/02732, हैदराबाद-जयपुर-हैदराबाद साप्ताहिक स्पेषल में हैदराबाद से दिनांक 06.07.18 से 27.07.18 तक एवं जयपुर से दिनांक 08.07.18 से 29.07.18 तक 01 थर्ड एसी श्रेणी के डिब्बें की अस्थाई बढोतरी की गई है। इस बढोतरी से इस गाडी के मार्ग के मुख्यतः सिकन्दराबाद, निजामाबाद, पूर्णा जं., अकोला जं., भोपाल, उज्जैन, मंदसौर, नीमच एवं अन्य स्टेषनों के यात्रियों को प्रत्येक फेरे में थर्ड एसी श्रेणी की 64 बर्थ अधिक उपलब्ध हो पायेगी। जयपुर मण्डल के सभी रेलवे क्वार्टर तथा स्ट्रीट लाइट एलईडी से रोषन उत्तर पष्चिम रेलवे का प्रथम मण्डल बिजली की बचत के लिये इस रेलवे पर ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग किया जा रहा हैं। ऊर्जा दक्ष उपकरणों में रेलवे द्वारा एलईडी आधारित उपकरणों का अधिकाधिक प्रयोग किया जा रहा है। स्टेषनों पर एलईडी लाइट, बोर्ड, हाई मास्ट टावर इत्यादि लगाये गये है। एलईडी आधारित उपकरणों से प्रकाष की क्वालिटी बेहतर प्राप्त होती है साथ ही इनसे बिजली की भी बचत होती है। उत्तर पष्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री तरूण जैन के अनुसार उत्तर पष्चिम रेलवे के जयपुर मण्डल पर सभी रेलवे क्वार्टर तथा स्ट्रीट लाइटों को 100ः एलईडी युक्त कर दिया गया है। इनको एलईडी युक्त करने से 363.5 किलोवाट लोड की बचत होगी तथा 110 लाख राजस्व की बचत होगी उत्तर पष्चिम रेलवे पर पर 100ः एलईडी लाइटो का उपयोग किया जा रहा है और इस रेलवे पर 83,391 एलईडी फीटिग्स को रेलवे कार्यालयों, स्टेषनों, भवनों, रेलवे क्वार्टरों इत्यादि में लगाया गया। इससे प्रतिवर्ष 57 लाख यूनिट की बचत के साथ लगभग 4 करोड के राजस्व की बचत की जा रही है। एलईडी लाइट के उपयोग में उत्तर पष्चिम रेलवे भारतीय रेलवे के अग्रणी जोन में सम्मलित है।

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