National Hindi Daily Newspaper
ब्रेकिंग न्यूज़

प्रेम कुमार धूमल होंगे हिमाचल में  मुख्यमंत्री पद के दावेदार

इस वर्ष के अंत में हिमाचल प्रदेश में चुनाव होने हैं। भाजपा यहां ताल ठोक चुकी है और कांग्रेस भीतरघात से जूझ रही है। कई केन्द्रीय मंत्रियों सहित भाजपा अध्यक्ष अमित शाह प्रदेश में चुनावी रणभेरी बजा चुके हैं। राज्य के कई राजनीतिक दिग्गजों के लिए यह चुनाव आखिरी राजनीतिक पारी होगा। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में मौजूदा साल नये राजनीतिक रंग में रंगने को तैयार है। कांग्रेस हाईकमान ने एक बार फिर वीरभद्र सिंह पर दाव लगाया है। लेकिन भाजपा ने अभी तक आधिकारिक रूप से किसी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है लेकिन माना जा रहा है कि प्रेम कुमार धूमल ही मुख्यमंत्री के दावेदार होंगे और अगले कुछ दिनों में पार्टी इसकी आधिकारिक घोषणा कर सकती है। सोशल मीडिया एवं हिमाचल भाजपा में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री घोषित करने पर भाजपा आलाकमान में सहमति बन गई है और अगले कुछ दिनों में पार्टी इसकी विधिवत घोषणा करेगी। चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित करने समेत कई मुद्दों पर पार्टी आलाकमान ने करीब तीन सर्वे किये हैं और सभी सर्वे में यह बात उभर कर आई है कि पार्टी यदि प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में चुनाव लड़ती है तो निश्चित रूप से उसे अधिक सीटें मिलेगी। पता चला है कि गत दिनों पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं राजनाथ सिंह, अरुण जेटली और नितिन गडकरी से हुई मुलाकात में इस बात पर सहमति बनी है कि चुनाव धूमल के नेतृत्व में ही लड़ा जाना चाहिए। इन वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुनाव पूर्व प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित करने की सलाह दी है और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में आम सहमति बन गई है कि चुनाव से पूर्व प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया जायेगा। वैसे भी धूमल पिछले 6 माह से पूरे प्रदेश में घूम-घूमकर पार्टी को मजबूत करने में जुटे हैं और प्रदेश में परिवर्तन यात्रा में धूमल को सुनने के लिए काफी भीड़ जुटती थी। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व देख चुका है कि धूमल का व्यापक जनाधार है और कार्यकर्ताओं पर अच्छी पकड़ है और कार्यकर्ताओं समेत प्रदेश की जनता धूमल को ही मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है। परिवर्तन यात्रा का मुख्य मक़सद ही प्रदेश की जनता की का मूड भांपना था।

भाजपा ने उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में चुनावी जीत के तुरंत बाद ही हिमाचल फतह के लिए कमर कस ली थी। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनाव के लिए तैयार करने की फूलप्रूफ रणनीति बनाई गई है । पहले प्रदेश के विभिन्न जिलों में त्रिदेव सम्मेलन आयोजित कर फील्ड की जानकारी ली गई। इसी दौरान नगर निगम शिमला के चुनाव की भी तैयारी साथ-साथ की गई और 30 वर्षों में पहली बार शिमला नगर निगम में भाजपा काबिज हुई है। भोरंज विधान सभा सीट का उपचुनाव भी पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न था। परिसीमन के बाद प्रेम कुमार धूमल का गृह क्षेत्र इसी विधान सभा को अंदर आता है और पूर्व में भाजपा के पूर्व शिक्षा मंत्री ईश्वर दास धीमान पिछली पांच बार से यहां का प्रतिनिधित्व कर रहे थे लेकिन उनके निधन से यह सीट खाली हुई थी, जहां से अब उनके पुत्र अनिल धीमान विधायक हैं। भाजपा के लिए यह सीट आसान नहीं थी क्योंकि कांग्रेसनीत सरकार ने यहां अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी और भाजपा की ही एक बागी कार्यकर्ता भी मैदान में था। यह सीट धूमल की प्रतिष्ठा से जुड़ी थी क्योंकि अनिल धीमान अपने पिता के निधन के बाद ही सरकारी नौकरी छोड़कर पार्टी में शामिल हुए थे और वह राजनीति से दूर थे लेकिन धूमल और पार्टी कैडर के बल पर वह सीट बचाने में कामयाब रहे और धूमल का रुतबा कायम रहा।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के लिए उम्मीदवार घोषित न करने का बयान इसलिए देना पड़ा था क्योंकि राज्य में भाजपा कार्यकर्ता दो अलग-अलग गुटों में बंटे थे। इससे पहले पार्टी कार्यकर्ता पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार और धूमल के साथ दो गुटों में बंटे थे और टिकट बंटवारे में भी अलग-अलग राय थी, जिसका खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ा था। इस बार भी पार्टी पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के गुटों में बंटी हुई थी और जे.पी. नडडा जब भी हिमाचल के दौरे पर जाते थे तो गाहे-बगाहे पार्टी का एक धड़ा उन्हें भावी मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करने लगता था लेकिन अब इसपर लगाम लग चुकी है और प्रदेश में हाल ही में सम्पन्न हुई परिवर्तन यात्रा के बाद स्वयं जे. पी. नडडा ने यह कहकर विराम लगा दिया है कि वह केन्द्र में खुश है। अब गुटबाजी खत्म हो चुकी है और अमित शाह के निर्देश पर पार्टी अब एकजुट है। पहले कहा जा रहा था कि भाजपा में 75 वर्ष की आयु निर्धारित की गई है, जो प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल के मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनने में आड़े आ रही है लेकिन गत सप्ताह भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपने मध्य प्रदेश के दौरे के दौरान भोपाल में स्पष्ट किया है कि केन्द्रीय नेतृत्व मे राज्यों के लिए कोई आयु सीमा निर्धारित नहीं की है। अत: यह स्पष्ट हो गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करने में आयु आड़े नहीं आयेगी। प्रेम कुमार धूमल के लिए राहत का बात यह है कि इस बार पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार भी उनका समर्थन कर रहे हैं।

भाजपा के लिए जीत के हिसाब से यह विधान सभा चुनाव काफी आसान माना जा रहा है। वीरभद्र सिंह  85 वर्ष के होने वाले हैं और शारीरिक तौर पर कुछ कमजोर हुए हैं। कांग्रेस हाईकमान ने उनके नेतृत्व में ही चुनाव लड़ने का ऐलान किया है जबकि वह पार्टी की अंदरूनी कलह से इतना दुखी हैं कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया है। वैसे भी आयु अधिक होने और आय से अधिक संपत्ति के मामले में यदि अदालत का फैसला उनके खिलाफ आता है तो वीरभद्र सिंह की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। वीरभद्र सिंह अपने बेटे विक्रमादित्य सिंह को राजनीति में स्थापित करने के लिए खूब पसीना बहा रहे हैं।  विक्रमादित्य को राजनीति में स्थापित करने का वीरभद्र सिंह के पास यह आखिरी मौका है। वीरभद्र सिंह इस बार विक्रमादित्य को शिमला की अपनी पारम्परिक सीट से चुनाव लड़ाकर विधान सभा में पहुंचाना चाहते हैं। वीरभद्र सिंह  यदि इस बार विक्रमादित्य को विधानसभा पहुंचाने में सफल नहीं होते हैं तो आगे उनके राजनैतिक सफर मुश्किल हो जाएगा।

विधान सभा चुनावों से ठीक पहले वीरभद्र सिंह कर्मचारी वर्ग को खुश करने के लिए नित नई घोषणाएं कर रहे हैं। प्रदेश के आम बजट के माध्यम से बेरोजगारी भत्ते जैसी बड़ी घोषणा कर खासकर युवाओं को लुभाने का प्रयास किया है। लेकिन बार-बार कर्ज लेकर कर्मचारियों और पेंशनरों को आखिर कब तक भुगतान किया जा सकता है। प्रदेश सरकार पिछला कर्ज और उसका ब्याज चुकाने के लिए नया कर्ज ले रही है और राज्य कर्ज तले दबता जा रहा है। खाली खजाने से चुनावी साल में प्रदेश के मतदाताओं की आकांक्षाओं को पूरा करना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन है। प्रदेश पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है और राज्य में बढ़ते अपराध और नशाखोरी, माफियाराज  भी सरकार के लिए सिरदर्द बना हुआ है। चुनावी साल में सरकार जहां चुनावी रेवड़ियां बांटने में मशगूल है, वहीं भाजपा सरकार की नाकामियों, बढ़ते अपराध, नशाखोरी और भ्रष्टाचार को मुद्दा बना रही है।

पहले त्रिदेव सम्मेलन फिर परिवर्तन यात्रा, दलित सम्मेलन और अब युवा हुंकार रैली भाजपा की चुनाव तैयारियों को दर्शाने के लिए काफी है। बड़े-बड़े केन्द्रीय नेताओं सहित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान परिवर्तन यात्रा में शामिल होकर यह संदेश दे चुके हैं कि भाजपा इस बार पूरी तरह से संगठित होकर चुनाव मैदान में उतरेगी। भाजपा जहां पहले 50+ का टारगेट लेकर चल रही थी इस परिवर्तन यात्रा के बाद उसका मनोबल बढ़ गया है।  पार्टी  55 से 60 के साथ परिवर्तन का नारा दे रही है। इस परिवर्तन यात्रा के दौरान एक बात साफ हो गई है कि सबसे ज्यादा लोकप्रिय नेता और मुख्यमंत्री पद के लिए प्रेम कुमार धूमल ही नेताओं और जनता की पसंद हैं और शायद स्थिति को भांपकर ही केन्द्रीय मंत्री जगत प्रकाश नडडा को यह बयान देना पड़ा कि वह केन्द्र में ही खुश हैं। हालांकि गाहे-बगाहे पार्टी कार्यकर्ता और स्वयं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मुख्यमंत्री उनको भाजपा का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बताने से नहीं चूकते थे और इसके पीछे उनकी मंशा प्रदेश भाजपा को लड़ाना और विरोधी गुट को उकसाने की रही है।

भाजपा में सार्वजनिक रूप से कोई किसी से नाराजगी व्यक्त नहीं कर रहा या फिर धड़ेबंदी को प्रोत्साहित नहीं कर रहा है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने गुटबाजी करने वालों के खिलाफ सख्ती करने की चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री कौन होगा, यह पार्टी हाईकमान  तय करेगा और अभी तक किसी को भी चेहरा न बनाने का फैसला पार्टी ने सोची-समझी रणनीति के तहत लिया है ताकि कार्यकर्ता गुटबाजी में न उलझें। लेकिन परिवर्तन यात्रा के बाद पार्टी रणनीति बदलने पर विचार कर रही है और सारे कयासों पर विराम लगाकर 55 से 60 का आंकड़ा छूना चाहती है। विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि शीर्ष  स्तर पर पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने पर सहमति बन गई है। प्रेम कुमार धूमल की सरल जीवनशैली और कर्मठ कार्यशीलता के सिर्फ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही कायल नहीं हैं बल्कि संघ के नेताओं की भी वह पसंद हैं और यही कारण है कि प्रादेशिक नेताओं और कार्यकर्ताओं से विचार-विमर्श के बाद यह साफ हो गया है कि प्रेम कुमार धूमल ही भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे. उन्हें उम्मीदवार घोषित करने से पार्टी को लाभ होगा। भाजपा यदि अपना 55 से 60 सीट का लक्ष्य पूरा करना चाहती है तो उसे मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करके चुनाव लड़ने से फायदा होगा और यदि प्रदेश में केवल नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के चेहरे पर चुनाव लड़ा गया तो भाजपा को जबर्दस्त नुकसान उठाना पड़ सकता है और वैसे भी हिमाचल का मतदाता पढ़ा लिखा और काफी समझदार है, वह भेड़चाल, जात-पात या धर्म के आधार पर वोट नहीं करता है बल्कि विकास को तवज्जो देता आया है।

विजय शर्मा

WZ-430 A, Nanakpura, Hari Nagar

New Delhi-110064.

.

 

Print Friendly, PDF & Email
Tags:
Skip to toolbar