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फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी

शहरीकरण और आधुनिकता के अंधाधुंध अनुकरण से हम स्वयं अब त्रस्त होते जा रहे है । दुनिया के मंच पर अपने आप को साबित करने के प्रयास मे हम अपने नैतिक मूल्यों और संस्कारों को शनै – शनै धूमिल करते जा रहे हैं ।
नारी की जहाँ बात हो वहाँ हर मुद्दा ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है । अब दिल्ली सरकार की बात ले तो जिस निर्भया कांड में न्याय और सुरक्षा के लिए करोड़ों मोमबत्तियों के साथ अपनी माँग रखी गई वहीं आज ” निर्भया फंड ” की 90 प्रतिशत रकम खर्च तक नहीं की है ।

भारत में प्रत्येक 35 वें मिनट पर एक बलात्कार होता है । 2013 से प्रत्येक वर्ष केंद्र सरकार द्वारा निर्भया फंड को एक हजार करोड़ रुपए दिए जा रहे हैं । अब तक 3000 करोड़ रुपए में केवल 300 करोड़ रुपए ही खर्च किए गये हैं । मतलब योजनाएँ , फंड , सब ठंडे बस्ते में चला गया । जो भी हो फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी ।
अब हम जनता तो आलू है चाहे जिस सब्जी में मिला तो सब में मिक्स हो ही जाते हैं । अभी उत्तरप्रदेश में मथुरा की ही बात है । किसानों के मुताबिक इस बार तो बम्पर फसल हुई है , जो सही भी है पर फसल बिक्री हुई ही नहीं और कर्जा 11 लाख रुपए । असल में तथाकथित किसान के अनुसार कुछ रुपए 5 लाख की लागत से बीज , खाद इत्यादि के खर्च जो किसान ने बाहर से उधार लिया और फसल उगाया । फसलों की पैदावार भी बहुत अच्छी रही । फसलों कों कोल्ड स्टोरेज तक ले जाने और वहाँ का किराया देने फिर वहाँ से दुकानों तक ले जाने तक का खर्च तकरीबन 6 लाख रुपए हो गया । कुल मिला कर लगभग 11 लाख रुपए का खर्च और बिक्री 10 रुपए किलो । आलू सब सड़ रहें है । मवेशियाँ खा रही हैं और सरकार मौन है । मुख्य बात यह है कि सरकार ने अब तक आलू की न्यूनतम खरीदी का मूल्य तय ही नहीं किया है । क्यों सरकार इन फसलों को खरीद कर चिप्स , मीड डे मिल में प्रयोग कर रही है । विभिन्न प्रकार के खाद्य सामग्री में व देश के बाहर निर्यात में किया जा सकता है पर सरकार अब तक जागी क्यों नहीं ये समझ से परे है । इन परिस्थितियों में किसान कहाँ मदद की गुहार लगाए । कर्ज कैसे चुकाए । ऐसे में किसान क्या करें । यह प्रश्न विचारणीय है । 25 रुपए पैकेट आलू का चिप्स चलेगा पर आलू को सरकार अनदेखा कर रही है । इन सब में जनता चिप्स खाना कैसे छोड़े ?
अब जो भी हो फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी ।

अब रातों को नींद नहीं आती न दिन में चैन । क्या पता कब हमें डेंगू हो जाए और इलाज का बिल 18 लाख रुपए । घटना ज्यादा पुरानी नहीं है । हम सभी डॉक्टर को देवता का स्थान देते है । जीवन रक्षक के रूप में डॉक्टर का कार्य ईश्वर से कम नहीं आँका जा सकता है । ये घटना दिल्ली से निकट गुरुग्राम के फोर्टिस हॉस्पिटल का है । जिसने डेंगू पीड़ित सात साल की बच्ची के माता – पिता को 18 लाख रुपए का बिल थमा दिया और इसके बावजूद भी डॉक्टर ने इस बच्ची को नहीं बचा पाये ।
बच्ची के माता – पिता ने अपना सब कुछ बेच दिया । यहाँ तक की घर भी गिरवी रखा । जो बिल हॉस्पिटल ने थमाया वो करीब 19 पन्नों का था । इसमें 661 सीरिंज 2700 दास्ताने एवं कुछ और कीमती सामान शामिल था ।
मुद्दे की बात है अब मध्यमवर्गीय परिवार जाए तो जाए कहाँ । धोखा और फरेब अब यदि इंसानियत का गला घोंटे तो इससे ज्यादा शर्मनाक कृत्य और कुछ नहीं हो सकता । हम इंसाफ की उम्मीद करते है और आज भी यह कह रहे हैं फिर भी दिल हिन्दुस्तानी ।

अब पद्मावती फिल्म को इतिहासकारों ने करोड़ों का फायदा पहुँचाने वाला फिल्म बना दिया है । न जाने कितने संस्थाओं ने अपना आक्रोश और आक्रामक रुख व्यक्त किया । विरोध तो अमर्यादित दृश्यों का होना चाहिए । इतिहास के रक्षक भूल रहे हैं कि यह वही देश है जहाँ हर आधे घंटे में एक.बलात्कारी पैदा हो जाता है । जो अश्लील दृश्य देखकर भी अश्लीलता की हदें पार नहीं करता । उस पर गंदे और भद्दे व्यंग्य करने में अपनी शान समझता है । राजनीतिक दल भी इन मुद्दों में अपनी कलाबाजियाँ दिखा ही जाता है ।
कुछ दिनों में सब शांत हो जायेगा और भूल जायेगी जनता क्योंकि दिल है हिन्दुस्तानी ।

अगली बार सरकार चाहे जो भी आये , हम जनता पीस रहें हैं और समर्थन के साथ आगे भी पिसने की तैयारियाँ कर रखी हैं । रोजगार है नहीं । छँटनी लगातार अपना दंश मार रही है । नारी बेआबरू होती और फंड का मुरब्बा बना रहा है राज्य । गुजरात चुनाव में अटकलें और फँसमफास की तैयारी जोर – शोर से चल रही है । इधर कश्मीर मुद्दा पता नहीं कब तक डंक मारता रहेगा । चीन ने भी अपनी हरकतें बंद नहीं की है । आँख दिखाने को हमेशा तैयार ही रहता है । काला धन कब आयेगा । आँख बिछाए हम सब राह जोह रहें हैं । अभी तो जी एस टी का उलट फेर बाकी है । बिक्री भी मंदा चल रहा है । किसानों की स्थिति में बस थोड़ा सा सुधार हुआ है । कुल रकम 1रुपए 50 पैसा कर्ज माफ किया गया है सरकार की तरफ से । प्रदूषण तो सर चढ़कर बोल रहा है और राज्य सरकार कुँआ खोदकर तेल निकलने में लगी.है । दिल्ली अब दिल वालों की नगरी नहीं रही । ऑड – ईवन का फार्मूला बनकर रह गया है । चुनावी सरगर्मी तेज़ हुई जा रही है और वादों में आरक्षण को भी शामिल किया जा रहा है । अब संत भी बयान देने से नहीं चूक रहे हैं । केरल में लव जेहाद का गरमाहट की आँच तेज़ हो रही है और प्रद्युमन की हत्या से हम सब सदमे में है । देश का भविष्य हम बच्चों के कंधे फर डाल रहे हैं और उसी कंधे को हम मजबूती प्रदान नहीं कर पा रहें हैं । तभी तो ये शिक्षाकर्मी अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले गये हैं ।

जो भी हो हम सब यही मान रहे हैं कि देश आगे बढ़ रहा है । आतंकी मारे जा रहे हैं । माना नक्सली हमलों में जवान शहीद हो रहे हैं । आतंकी हमलों का शिकार भी हो रहे हैं । कैसलेश इंडिया और डिजिटल इंडिया की आश में हम जी रहे हैं । स्वच्छ भारत अभियान में अपना योगदान दे रहे हैं । साहित्यकार अपनी रचना में उत्कृष्टता ला रहे हैं । शांतिपूर्ण नीति का संचालन यद्यपि सरकार कर रही है पर खाली पेट न होय भक्ति नंदलाला का कथन भी तो सार्थक हो रही है ।

अनेकता में एकता हम बचपन से पढ़ते आ रहे हैं । हिंदु , मुस्लिम , सिक्ख , ईसाई हम सब हैं भाई – भाई । आखिर अंगूर तो अपनी देशी है , खट्टा कैसे होगा । खट्टा हुआ भी तो काला नमक मिला कर खाने योग्य बनाने में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे । थोड़ा और इंतज़ार सही क्योंकि दिल है हिंदुस्तानी । फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी ।

मल्लिका रुद्रा ” मलय – तापस “
बरतुंगा , चिरमिरी , छत्तीसगढ़

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