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फिर हुई बारिश से सेब की फसल बर्बाद

शिमला । प्रकृति द्वारा हिमाचल प्रदेश के ऊपरी हिस्से विशेषकर कुल्लू, मनाली और लाहौल स्पीति में मचाई तबाही बेहद भयानक थी। प्रदेश में बाढ़, बारिश और बर्फ से लोगों का जो नुकसान हुआ, वह काफी खतरनाक था। प्रदेश में बर्फबारी से लाहौल स्पीति के बागवानों की कमर टूट गई है। लोगों ने बताया कि सेब की फसल को लेकर कुछ सालों से उन्हें काफी उत्साह और उम्मीदें थी। साथ ही उन्होंने पारंपरिक खेती जैसे आलू, मटर के साथ सेब के बगीचे पर भी काफी मेहनत की थी। यह फसल उनके आय का मुख्य साधन बन सकती है, इस उम्मीद के साथ आगे बढ़ने वाले किसानों ने यह कभी नहीं सोचा था कि सेब की फसल मंडी पहुंचने से महज 10 से 15 दिन पहले ही भारी बर्फबारी के चलते बर्बाद हो जाएगी।
प्रदेश में भी भारी हिमपात की वजह से सेब के पेड़ चंद मिनटों में पूरी तरह से तबाह हो गए। इसके साथ ही भगवानों की 10- 15 सालों की मेहनत भी बर्फ के नीचे दब गई। लाहौल के लोगों ने बताया कि जिन लोगों ने बच्चों की तरह इन पेड़ों को पाला उनके लिए यह दृश्य कितना गमगीन और मार्मिक होगा। बागवानों के अनुसार बर्फबारी में फलदार पेड़ों को लगभग 80 से 90 फीसदी तक नुकसान पहुंचाया है। वहीं बाकी के बचे पेड़ो को पूरी तरह से फल देने के लिए कम से कम 6 या 7 साल और लेंगांगे। हिमाचल में आए इस प्राकृतिक आपदा ने लोगों को सेब की फसल को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंतन के लिए मजबूर कर दिया है।

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