National Hindi Daily Newspaper
ब्रेकिंग न्यूज़

फिल्म समीक्षा : रिबन

कलाकार : कल्कि कोचलिन, सुमित व्यास
निर्देशक : राखी शांडिल्य
मूवी : टाइप ड्रामा
अवधि : 1 घंटा 48 मिनट

वर्किंग कपल की रोजमर्रा की लाइफ ऑफिस से शुरू हुई टेंशन इनकी पर्सनल लाइफ में अनजाने में ही सही अक्सर एंटर कर ही जाती है और यहीं से शुरू होता है इनमें एक ऐसा तकरार जो इन्हें यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि क्या करियर और पर्सनल लाइफ को लेकर लिया उनका हर फैसला सही है! इस हफ्ते रिलीज़ हुई रिबन में डायरेक्टर राखी ने इस टॉपिक को ईमानदारी के साथ सिल्वर स्क्रीन पर पेश करने की अच्छी कोशिश की है। हालांकि चालू-मसाला और टाइम पास करने के मकसद से थिअटर का रुख करने वाले दर्शक निराश हो सकते हैं। मुंबई की एक मिडल क्लास कपल के इर्दगिर्द घूमती इस कहानी में डायरेक्टर ने जहां वर्किंग कपल के मुद्दे को पेश करने के साथ बच्चों के यौन उत्पीड़न के मुद्दे को भी कहानी का अहम हिस्सा बनाकर पेश किया है।

स्टोरी प्लॉट: करण मेहरा (समित व्यास), साहना मेहरा ( कल्कि कोचलिन) अब पूरी तरह से मुंबई में सेट हो चुके हैं। करण एक बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी में साइट इंजिनियर है तो वहीं साहना भी एक कॉर्पोरेट कंपनी में स्ट्रैटिजी मैनेजर है। मुंबई की एक सोसाइटी के एक फ्लैट में अपनी लाइफ जी रहे इस हैप्पी कपल की लाइफ उस वक्त डिस्टर्ब हो जाती है जब सहाना को पता चलता है कि वह मां बनने वाली है। सहाना से यह खबर सुनकर जहां करण बेहद खुश होता है वहीं सहाना अपनी प्रेग्ननेंसी की खबर से अपसेट है। दरअसल, सहाना को लगता है कि लाइफ के जिस मोड़ पर अब वह और करण हैं उन्हें बच्चे के लिए अभी कम से दो से तीन साल का इंतजार करना चाहिए। ऐसे में सहाना सबसे पहले अबॉर्शन के बारे में सोचती है। करण सहाना को समझाता है कि आने वाले बच्चे की जिम्मेदारियां वह दोनों एकसाथ आपस में हैंडल कर लेंगे, तब जाकर साहना मां बनने का फैसला करती हैं। सहाना अपने ऑफिस से तीन महीने की छुट्टी लेती है, लेकिन सहाना को अंदर ही अंदर यह डर भी सता रहा है कि प्राइवेट क्या इन तीन महीनों में कंपनी में उसकी जॉब और पोजिशन बरकरार रह पाएगी! इसी बीच सहाना एक प्यारी सी बच्ची की मां बन जाती है। तीन महीने की मैटरनिटी लीव के बाद जब सहाना ऑफिस लौटती है तो ऑफिस में अब सब कुछ पहले जैसा नहीं है। इन तीन महीनों में सहाना की पोजिशन बॉस ने किसी दूसरे को दे दी है, इन हालात में काम कर पाना सहाना को मंजूर नहीं, सो वह अपनी नई जॉब की तलाश में लग जाती है। सहाना को अब एक दूसरे ऑफिस में अच्छी नौकरी मिली जाती है, लेकिन तभी करण को अपनी जॉब के सिलसिले में मुंबई से दूर शिफ्ट होना पड़ता है। खैर किसी तरह सहाना इन हालात का सामना करती है। सहाना की बेटी अब स्कूल जाने लगी है। एक दिन स्कूल बस का कंडक्टर जब बेबी को लेने नहीं आता तो करण बेटी को स्कूल बस में छोड़ने लिफ्ट में आता है, लिफ्ट में नन्हीं अर्शी एक चॉकलेट की चाह में कुछ ऐसा करके दिखाती है कि सुमित भौंचक्का रह जाता है। जल्दी ही उसकी समझ में आ जाता है कि उनकी करीब चार साल की बेटी के साथ कोई बहुत गलत कर रहा है।

ऐक्टिंग: कल्कि कोचलिन ने एकबार फिर कमाल की ऐक्टिंग की है, सहाना के किरदार को कल्कि ने अपने लाजवाब अभिनय से जीवंत कर दिखाया है। वहीं एक फैमिली के लिए समर्पित हज्बंड और पिता के किरदार में सुमित व्यास खूब जमे हैं। पूरी फिल्म में सुमित और कल्कि की गजब की ऐक्टिंग है। ‘चरखा घूम रहा है’ कई म्यूजिक चार्ट में टॉप टेन में शामिल हो चुका है। डायरेक्टर राखी ने बेशक कहानी और स्क्रिप्ट से कहीं समझौता नहीं किया, लेकिन इंटरवल से पहले फिल्म की बेहद स्लो दर्शकों के सब्र का इम्तिहान लेती है, वहीं फिल्म का क्लाइमैक्स सवालिया है जो दर्शकों की बड़ी क्लास को पसंद नहीं आएगा।

क्यों देखें: मुंबई जैसे महानगर में वर्किंग कपल की जिंदगी को डायरेक्टर ने असरदार ढंग से पेश किया है, वहीं अंत तक पूरी फिल्म एक ट्रैक पर है। अगर आपको चालू-मसाला फिल्मों की भीड़ से दूर हटकर बनी अलग जॉनर की फिल्में पसंद आती हैं तो इस फिल्म को मिस न करें।

Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar