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बढता वायु प्रदूषण, संवेदना हीन तन्त्र

भारत में हर वर्ष होने वाली लगभग 11 लाख लोगों की मौत का कारण आतंकवादी हमले या कैंसर जैसी बीमारी नहीं है। बल्कि यह आंकड़ा सिर्फ प्रदूषित वायु में सांस लेने के कारण है। मगर दीपावली के समय पटाखों से निकलने वाले धुएं से यह प्रदूषण कई गुना बढ़ जाता है। कुछ पल की खुशी और पैसे के दिखावे के आगे लोग आंखें मूंदे रहते हैं। इन पटाखों में इस्तेमाल किए जाने वाले खतरनाक रसायनों (मैग्नीशियम, सोडियम, जिंक, नाइट्रेट, नाइट्रॉइट) के मिश्रण से निकलने वाले जहरीले धुएं के कारण श्वास नली में रुकावट, गुर्दे में खराबी, त्वचा संबंधी बीमारियां, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, आदि समस्यायें प्रमुखता से उत्पन्न होती हैं। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार भारत में बच्चों की मृत्यु दर की सबसे बड़ी वजह वायु प्रदूषण है। स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2017 की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है। कि भारत में 2015 में वायु प्रदूषण से 10. 90 लाख लोगों की मौत हुई है। 1990 से अब तक भारत में प्रदूषण से मौतों की दर 48 फीसदी बड़ी है। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज की रिपोर्ट के अनुसार भारत में रोजाना 1640 लोगों की प्रदूषण के कारण मौत होती है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तो हालत बहुत खराब हैं। दिल्ली में बेहद सूक्ष्म प्रदूषक कण पीएम 2.5 और पीएम 10 का औसत 178 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया है। जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार खतरनाक स्तर पर है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार दुनिया के 100 सबसे प्रदूषित शहरों में 30 भारतीय शहर हैं। पर्यावरण इंडेक्स में भी भारत 178 देशों में 155 वें स्थान पर है। इस मामले में भारत की तुलना में पाकिस्तान, नेपाल, चीन, श्रीलंका, बेहतर हालात में हैं। प्रदूषण के इतने खतरनाक स्तर के बावजूद हम पर्यावरण को लेकर कितने जागरुक हैं। यह हालात खुद बयां कर रहे हैं। इसका शायद कारण है। कि विभिन्न सरकारों को पर्यावरण में वोट बैंक नजर नहीं आता है और नागरिक इसके अदृश्य विनाशकारी दुष्प्रभावों के बारे में जागरुक नहीं हैं। प्रदूषण का 33 फीसदी हिस्सा वाहनों के जीवाश्म ईंधन के कारण होता है। इसलिए सरकार को 2000 cc से ज्यादा की गाड़ियों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक को प्रभावी रुप से पालन करना चाहिए। वाहनों से निकलने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार को वाहनों के लिए एमिशन का बी एस वी आई नियम जल्दी लागू करना चाहिए। पर्यावरण मंत्रालय और विभिन्न प्रदूषण नियंत्रक एजेंसियों को मिलकर जन सहभागिता के साथ दूरगामी योजना और पॉलिसी निर्माण की आवश्यकता है। बाहरी हवा के साथ घर के भीतर की प्रदूषित हवा भी लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है। इस आंतरिक प्रदूषण के लिए अशुद्ध जीवाश्म ईंधन को जिम्मेदार माना जाता है। लोगों को खाना पकाने के लिए ईंधन न उपलब्ध करा पाने वाले देशों की सूची में भारत शीर्ष स्थान पर है। ग्रामीण भारत में आज भी काफी लोग भोजन पकाने और गर्म करने के लिए लकड़ी जलाते हैं। जो बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। इसके लिए भी जागरुकता के साथ भारत सरकार को उचित कदम उठाने की आवश्यकता है।

अश्विनी शर्मा
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
पत्रकारिता एवं जनसंप्रेषण

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