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बढ़े दाम दो, वरना बंद करेंगे केजीपी का काम

फरीदाबाद। कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (केजीपी) एक्सप्रेस-वे ईस्टर्न पेरीफेरल के लिए अधिग्रहण की गई जमीन का जिला राजस्व अधिकारी (डीआरओ) की अदालत द्वारा घोषित मुआवजा दिए जाने की मांग को लेकर किसानों ने सेक्टर-12 लघु सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस मामले में बुधवार को अदालत में पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई की जानी थी। अब इस मामले की सुनवाई 11 अक्टूबर को होगी। केजीपी के लिए फरीदाबाद और पलवल के 24 गांवों के किसानों की भूमि अधिग्रहण की गई है। किसानों को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने शुरुआत का मुआवजा तो दे दिया है, लेकिन उसके बाद के मुआवजे को लेकर जिला राजस्व अधिकारी की अदालत में किसानों की दायर याचिका पर सुनवाई की गई। अदालत ने किसानों का मुआवजा बढ़ा दिया। अब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने अदालत में दोबारा से पुनर्विचार याचिका दायर की है। प्राधिकरण के वकीलों का कहना है कि अदालत ने मुआवजा का जोड़ और गणना ठीक नहीं की है। बढ़े हुए मुआवजे को लेकर अदालत दोबारा से गणना और जोड़ करे, जिसका भुगतान किया जा सके। इस मामले की बुधवार को अदालत में सुनवाई के लिए किसानों और प्राधिकरण के वकील पेश हुए। अदालत ने पुनर्विचार याचिका पर 11 अक्टूबर को सुनवाई के लिए कहा है। मामले की सुनवाई के दौरान फरीदाबाद और पलवल के सैकड़ों किसान सेक्टर-12 लघु सचिवालय के बाहर जमा थे। किसान संघर्ष समिति केजीपी के प्रधान राजेश भाटी का कहना है कि अदालत ने जो पहले मुआवजे की गणना और जोड़ किया है, उसका प्राधिकरण भुगतान करे। यदि प्राधिकरण ने अदालत का फैसला नहीं माना तो हम भी फैसले को नहीं मानेंगे। अब तो किसानों को पहले फैसले के अनुसार प्राधिकरण को मुआवजा देना होगा। यदि फैसले में प्राधिकरण ने बदलाव कराया तो 11 अक्टूबर से किसान केजीपी का काम बंद करा देंगे। काम बंद होने की जिम्मेवारी राजमार्ग प्राधिकरण की होगी।

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