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बागी कांग्रेस और भाजपा के लिए बन रहे सिरदर्द

शिमला। हिमाचल प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ खड़े हो गये 20 से अधिक बागी प्रत्याशियों को मनाने के लिए कड़ी मशक्कत
करनी पड़ रही है।
इन बागियों को पार्टी ने टिकट नहीं दिये तो वे अपने उच्च कमान के फैसले को दरकिनार करते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में कूद पड़े। राज्य की लगभग प्रत्येक सीट पर दो या तीन उम्मीदवार ही चुनाव मैदान में हैं।
कांग्रेस और भाजपा ने बागियों को समझाने का भरसक प्रयास किया कि वे अपने पर्चे वापस ले लें लेकिन उन्हें खास कामयाबी नहीं मिली। नामांकन पत्र वापस लेने की आज अंतिम तिथि है।
गौरतलब है कि कांग्रेस के 13 बागी उम्मीदवार हैं जबकि भाजपा को 11 सीटों पर ऐसे प्रत्याशियों से जूझना पड़ रहा है। सोलन, शिमला, कुल्लू, हमीरपुर और मंडी सीट पर बागी उम्मीदवार कांग्रेस का सिरदर्द बन गये हैं जबकि सिरमौर, चांबा, ऊना और कांगड़ा विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के लिए पार्टी के उसके पुराने कार्यकर्ता ही चुनौती बन रहे हैं।
भाजपा को शिमला में संजीव ठाकुर, कासुम्पटी में प्रेम ठाकुर, चोपल में सीमा मेहता और जुब्बल में नीलम सारकैक को मनाने में सफलता मिल गयी है। रेणुकाजी से हरदिया राम और पालमपुर सीट से प्रवीण शर्मा बागी बनकर पार्टी के सामने खड़े हो गये हैं।
हिमाचल प्रदेश भाजपा प्रभारी मंगल पांडे, पार्टी के सह-प्रभारी थावर चंद गहलोत और प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सती इन बागियों को मनाने में एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं लेकिन बागी झुकने को तैयार नहीं हैं।
कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को शिमला, रामपुर, नालागढ़ और भोरांज सीट पर पार्टी के प्रत्याशियों के सामने चुनौती बन रहे बागी उम्मीदवारों को मनाने में अभी तक सफलता नहीं मिल पायी है। मुख्यमंत्री के समर्थक हरीश जनरथ ने मंगलवार को शिमला सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा दाखिल
कर दिया। पूर्व विधायक हरभजन सिंह भाजी और श्री सिंघी राम रामपुर से वर्तमान विधायक नंद लाल के विरुद्ध चुनाव लड़ रहे हैं।
श्री हरदीप सिंह बाबा नालागढ़ से कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं जबकि श्री इंदर ठाकुर दारांग से वर्तमान विधायक एवं कैबिनेट मंत्री कौल सिह के विरुद्ध ताल ठोंक रहे हैं। श्री प्रेम काहौल भोरांज से प्रोमिला देवी के विरुद्ध बागी बनकर चुनाव मैदान में उतर गये हैं।
यदि बागियों ने अपने पर्चे वापस न लिए या चुनावी मैदान से न हटे तो दोनों पार्टियों को कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले से दो-चार होना पड़ेगा और कुछ सीटों पर उन्हें पराजय का सामना करना पड़ सकता है।
राज्य में नौ नवंबर को मतदान होगा और 18 दिसम्बर को मतों की गिनती की जायेगी। प्रदेश में 68 विधानसभा
क्षेत्र हैं। इन सीटों पर 426 उम्मीदवारों पर्चें दाखिल किये हैं।

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