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बाबाओं ने किया देश का बेडा गर्क

बाबाओं ने देश का बेडा गर्क करके रख दिया है। पहले आशाराम , परमानंद फिर रामपाल और अब बाबा राम रहीम नंगे होकर सलाखों के पीछे पहुँच गए है। बाबाओं का राजनीति में घालमेल किसी से छिपा नहीं है। राम रहीम के समर्थकों ने हिंसा के पिछले सारे रिकार्ड तोड़ कर आतंक का खूनी खेल खेला जिसमें लगभग 36 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा और सैंकड़ों लोग घायल हो गए। कई राज्यों में बलवे हुए।

भारत में बाबाओं के प्रति आस्था, निष्ठा और अंधभक्ति गजब कमाल की है। आसाराम नाबालिग से यौन शोषण के एक मामले में जेल में बंद है मगर उनके भक्त किसी आरोप को स्वीकार नहीं कर रहे है और हर तारीख पेशी पर न्यायालय पहुँच जाते है दर्शनों के लिए। राम रहीम के लाखों अनुयायी है देशभर में। वे बाबा के लिए मर मिटने को तैयार है मगर आरोप स्वीकार नहीं कर रहे है। बाबा के सुई से पहाड़ बनने की कथा भी निराली है। बाबा का आशीर्वाद पाने के लिए राजनीतिक दल और नेता लालायित रहते है। बाबा अपनी इसी भक्ति की आड़ में संवैधानिक शक्तियों के इतर कुछ भी कर गुजरते है। दुष्कर्म और पंचकूला की हिंसा इसका साक्षात् प्रमाण है जहाँ एक सरकार ने सरेआम अपने घुटने टेक दिए। आरोप है कि हरियाणा सरकार तीसरी दफा नाकाम हुई है। रामपाल प्रकरण, जाट आरक्षण आंदोलन और अब राम रहीम को अदालत द्वारा दोषी करार देने पर हुई हिंसा,आगजनी और खून खराबा ने कानून व्यवथा की सरेआम धज्जियाँ उड़ादी। कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने हरियाणा सरकार को हिंसा रोकने में नाकाम बताते हुए बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है।
दूसरी तरफ बाबा के समर्थकों का मानना है कि बाबा दीन दुखियों की मदद करते है। समाज की गंदगी तक उठाते हैं, खूनदान करते हैं, समाज के भले के लिए हर अच्छा कार्य करते हैं। उन पर लगाया रेप का आरोप झूठा है। सांसद साक्षी महाराज तो न्यायालय को ही कटघरे में खड़ा कर राम रहीम को निर्दोष करार दे रहे है।
राम रहीम को दुष्कर्म के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उनके हिंसक समर्थकों ने भारी उत्पात मचाया और पंचकूला सहित सिरसा और अनेक राज्यों में तोड़फोड़ की। सुरक्षा कर्मी भी कुछ नहीं कर पाए। न्यायालय के निर्देशों के बावजूद हरियाणा सरकार डेरा अनुयायियों की हिंसा और अराजकता नहीं रोक पाई। सरकारी सम्पतियाँ जलाई गई। हिंसक लोगों की भीड़ का शिकार मीडिया के लोग हुए जिनके वाहन जलाये गए और मारपीट की गई। इसके बावजूद रिपोर्टरों और कैमरामैन ने अपनी जान की परवाह नहीं कर अपनी ड्यूटी को अंजाम दिया जिसके लिए वे निश्चय ही बधाई के पात्र है। उनकी लाइव रिपोर्टिंग के कारण ही पूरा देश आतंक और अराजकता के इस खूनी खेल को अपनी आँखों से देख सका। पूरा देश उनके साहस को सलाम कर रहा है।
इसी बीच सिरसा सहित कई स्थानों पर डेरों को खाली करवाकर न्यायालय के आदेशों की पालना में डेरों की सम्पति अटैच की जा रही है। पुलिस ने डेरा समर्थकों से एके 47 सहित घातक हथियार बरामद किया है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने शनिवार को इस मामले में साफ तौर पर हरियाणा सरकार को लताड़ा और राम रहीम के डेरों को तत्काल खाली कराने का आदेश दिया। न्यायालय ने कहा ऐसा लगता है जैसे हिंसा के आगे हरियाणा सरकार ने सरेंडर कर दिया । न्यायालय ने यह भी कहा सब कुछ जानते हुए भी सरकार ने कोई प्रभावी कारवाही नहीं की और अपने राजनीतिक लाभ के लिए शहर को जलने दिया। उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि स्वयंभू बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह के अनुयायियों द्वारा की जा रही हिंसा और आगजनी के कारण हुई क्षति की भरपाई डेरा सच्चा सौदा से करायी जाए। राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के बाद हरियाणा-पंजाब समेत 5 राज्यों में हिंसा, आगजनी और पथराव में पब्लिक प्रॉपर्टी का काफी नुकसान हुआ। इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि डेरा सच्चा सौदा की प्रॉपर्टी जब्त करके इस नुकसान की भरपाई की जाए। इस बीच, राम रहीम को कड़ी सुरक्षा में हेलीकॉप्टर से रोहतक जेल ले जाया गया है। उन्हें 28 अगस्त को सजा सुनाई जाएगी।

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत एक गुमनाम खत से हुई। यह खत सन् 2002 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपायी को लिखा गया था। इस खत में एक साध्वी ने डेरा सच्चा सौदा, सिरसा में बाबा राम रहीम के हाथों अपने यौन शोषण की वारदात की जानकारी दी थी। यह वो पत्र है जिसने राम रहीम को जेल की कोठरी में पहुंचा दिया। साध्वी की तरफ से दिए गए पत्र को आधार मानते हुए उसकी सत्यता प्रमाणित करने के लिए सिरसा के सेशन जज को जिम्मेदारी सौंपी गई । सेशन जज ने अपनी रिपोर्ट में शिकायत को सही पाया और इसके बाद राम रहीम पर धारा 376, 506 और 509 के तहत केस दर्ज करने का आदेश दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए राम रहीम पर लगे यौन शोषण के आरोप की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। जांच का जिम्मा सीबीआई अफसर सतीश डागर पर था उन्होंने भरसक प्रयास के बाद लगभग दो साल बाद उस साध्वी को तलाशने में सफलता प्राप्त कर ली, जिसका यौन शोषण हुआ था। सीबीआई ने शिकायत मिलने के लगभग चार साल बाद सीबीआई की अदालत में मामले की चार्जशीट दाखिल की। फिर अंबाला से यह केस पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत में भेज दिया गया। चार्ज शीट फाइल करने के एक साल बाद केस का ट्रायल शुरू हुआ और डेरा प्रमुख राम रहीम के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए। तीन साल बाद इस केस में ट्रायल शुरू हुआ, जिसमें वकीलों की बड़ी फौज ने राम रहीम का बचाव करने की कोशिश की। यह ट्रायल 2016 में जाकर पूरा हुआ। मामले की सुनवाई के दौरान 52 गवाह पेश किए गए, इनमें 15 वादी थे और 37 प्रतिवादी थे।
डेरा प्रमुख बाबा राम रहीम के सलाखों के पीछे पहुंचने की कहानी काफी रोचक , रहष्यमय और लंबी है। इसमें बलात्कार की शिकार उन दो महिलाओं को भी याद रखना होगा, जिनके लंबे संघर्ष की वजह से ही राम रहीम गुनहगार साबित हुए। बलात्कार होने के करीब दस साल बाद तो इन पीड़ित महिलाओं के बयान 2009 और 2010 में दर्ज किए गए। इन महिलाओं ने अपने बयान में उस असहनीय पीड़ा और अपमान का जिक्र किया है, जिसका उन्हें बाबा के आश्रम में सामना करना पड़ा। सीबीआई जज के सामने शपथ लेकर दिए बयान में साध्वियों ने पूरे घटनाक्रम का जिक्र किया है। बताया है कि किस तरह शक्तिशाली बाबा उनका और डेरे की अन्य महिलाओं का अपने गुफा में रेप किया करता था। आश्रम में बाबा का आवास गुफा कहलाता है। बयानों के मुताबिक, पीड़ितों ने बताया कि बाबा किस तरह अपने रसूख का बखान करते हुए खुद को भगवान बताते थे। साध्वियों ने यह भी खुलासा किया बाबा के चेले बलात्कार के लिए माफी शब्द का इस्तेमाल करते थे। वहीं, जहां बाबा रहते थे, वहां सिर्फ महिला अनुयायियों की तैनाती ही हुआ करती थी। पीड़ित महिलाओं ने अपने बयान में बताया कि अधिकतर लड़कियां डेरे में इसलिए भी रहने के लिए मजबूर थीं क्योंकि उनके परिवार वाले बाबा के अंध भक्त थे। शिकायतों के बावजूद घरवाले उनकी एक नहीं सुनते थे।

बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
क्.32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
9414441218

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