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बिजनेस रैंकिंग में भारत की स्थिति और सुधार की संभावनाएं

देश में कारोबारी सुगमता यानी ‘इज ऑफ डूइंग’ बिजनेस रैंकिंग में भारत ने 30 स्थानों की जबरदस्त छलांग लगाते हुए, 100 वें स्थान पर अपनी जगह बनाई है। आसानी से कारोबार शुरू करने की स्थिति में भारत ने बहुत बड़ा सुधार किया है। वर्ल्ड बैंक द्वारा जारी इज ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट में भारत की रैंक में सबसे ज्यादा सुधार देखने को मिला है। हर वर्ष जारी होने वाली इस रिपोर्ट में भारत की स्थिति में इतना सुधार पहले कभी नहीं देखा गया है। भारत की रैंक में 30 पॉइंट्स का सुधार हुआ है। दुनिया के 189 देशों के लिए जारी होने वाली इस रिपोर्ट में सबसे बड़ी छलांग भारत ने ही लगाई है। यह इज ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट यह दर्शाती है, कि कौन से देशों में व्यापार करना कितना आसान है। पिछले बर्ष इस रैंकिंग में भारत 130 वें पायदान पर था। बड़ी बात यह है, कि दुनिया के 189 देशों की लिस्ट में भारत 100 वें पायदान पर पहुंच गया है। अब सवाल यह है कि दुनिया के ऐसे कौन से देश हैं। जिनमें व्यापार करना सबसे ज्यादा आसान है। इस मामले में न्यूजीलैंड प्रथम स्थान पर है, दूसरे पर सिंगापुर, तीसरे पर डेनमार्क तथा चौथे स्थान पर दक्षिण कोरिया है। अमेरिका और इंग्लैंड भी टॉप 10 देशों की लिस्ट में शामिल है। अगर भारत के सीमावर्ती पड़ोसियों की स्थिति देखे तो इस इज आफ डूइंग रिपोर्ट में चीन की स्थिति भारत से बहुत बेहतर है। चीन इस इंडेक्स में 78वें क्रमांक पर है, और पिछले वर्ष 84 वें क्रमांक पर था। इसके अतिरिक्त नेपाल 105 वें क्रमांक पर, श्रीलंका 111 वें और पाकिस्तान 147 वें स्थान पर है। यह रिपोर्ट महत्वपूर्ण इसीलिए है, क्योंकि जब कोई निवेशक किसी देश में निवेश करता है, तो सबसे पहले यह देखता है, कि इस देश में कारोबार करना कितना आसान है। इस रिपोर्ट में विभिन्न देशों की रैंकिंग तय करने के लिए विभिन्न प्रकार की कसौटियां तय की गई हैं। इन्हीं में से एक मापदंड है। बिजली की उपलब्धता और क्षमता, भारत बिजली देने की क्षमता के मापदंड में 29 वें क्रमांक पर आ गया है। भारत में किसी कंपनी को बिजली का कनेक्शन मिलने में औसतन 47 दिन लगते हैं। जबकि पूरी दुनिया में सबसे जल्दी बिजली का कनेक्शन देने के मामले में यूएई प्रथम स्थान पर है। यूएई में सिर्फ 10 दिन में बिजली का कनेक्शन मिल जाता है। पैसा मिलने के मामले में भारत की रैंकिंग में बड़ा सुधार आया है। इसमें भी भारत की रैंक 29 वें क्रमांक पर रही है। पिछले वर्ष भारत इस श्रेणी में 44 वें स्थान पर था। टैक्सेशन में भी भारत को बड़ा जंप मिला है। इस श्रेणी का निर्धारण इस आधार पर होता है, कि दुनिया के किस देश में टैक्स चुकाना कितना आसान और सरल है। पिछले वर्ष भारत इस श्रेणी में 172 वें क्रमांक पर था। जबकि इस वर्ष 53 रेन्कस के सुधार के साथ भारत 119 वें स्थान पर आ गया है। इसका मतलब यह है, कि भारत को अभी अपनी टैक्स प्रणाली और नीतियों में बड़ा सुधार करने की आवश्यकता है। और 119 वें क्रमांक से बहुत ऊपर जाने की आवश्यकता है। क्योंकि कंपनियां व्यापार और निवेश करने के लिए आसान टैक्स प्रणाली चाहती हैं। तथा निवेश करने से पहले कंपनियां इसको भी अपने दृष्टिकोण का आधार बनाती हैं। भारत में किसी कारोबारी को टैक्स की प्रक्रियाएं पूरा करने में औसतन 55 घंटे लगते हैं, और 1 वर्ष में औसतन 214 घंटे लगते हैं। इस मामले में सबसे अच्छी स्थिति लक्जमबर्ग की है, तथा नया कारोबार शुरु करने में लगने वाले समय के मामले में भारत दुनिया में 156 वें क्रमांक पर है। इससे प्रदर्शित होता है, कि भारत में कारोबारियों के लिए नया कारोबार शुरू करना अब भी आसान नहीं हैं। भारत में नया बिजनेस शुरू करने में औसतन 29.5 दिन लगते हैं। जबकि न्यूजीलैंड में कोई कारोबारी सिर्फ आधे दिन में ही नया कारोबार शुरु कर सकता है। भारत में निवेशकों को नया बिजनेस शुरू करने के लिए 12 प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है ।जबकि न्यूजीलैंड में सिर्फ एक प्रक्रिया होती है। इसलिए शायद न्यूजीलैंड दुनिया में व्यापार करने के मामले में प्रथम स्थान पर है ।इसके अलावा भी बहुत सारी श्रेणियां हैं, जिनमें भारत की स्थिति में सुधार हुआ है। रिजाल्विंग इनबोल्वेन्सी में भी भारत की रैंकिंग 136 से 103 वें क्रमांक पर आ गई है। इस आधार पर तय किया जाता है, कि कोई कंपनी किसी देश में कितनी आसानी से अपना कारोबार बंद कर सकती है। भारत में किसी कंपनी या कारोबारी को अपनी कंपनी हटाने या कारोबार समेटने में औसतन 4.3 वर्ष लग जाते हैं। जबकि आयरलैंड में किसी कंपनी को अपना कारोबार समेटने में औसतन 5 महीने लगते हैं। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन ऑफ प्रॉपर्टी के अंतर्गत भारत की स्थिति देखें, तो इसमें भारत अब भी बहुत पीछे है। क्योंकि भारत में किसी कारोबारी को अपनी प्रॉपर्टी रजिस्ट्री कराने में औसतन 53 दिन लग जाते हैं। तथा भारत की इसमें 154 भी रैंक है। जबकी दुनिया में ऐसे बहुत सारे देश है, जहां संपत्ति की रजिस्ट्री 1 दिन में भी करा सकते हैं। इज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा है, कि उनकी सरकार ने पिछले 3 वर्षों में देश को सुधार, प्रदर्शन और बदलाव का मंत्र दिया है, और यह रैंकिंग इसी का प्रतीक है। कुल मिला कर देखा जाए तो भारत का 100 वें क्रमांक पर आना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अब भी बहुत सुधार करने की आवश्यकता है। भारत के लिए अभी बहुत बड़ी चुनौतियां है। इसके लिए सरकारी तंत्र में मौजूद भ्रष्टाचार बहुत हद तक जिम्मेदार है। जब तक यह स्थिति नहीं सुधरेगी भारत में कारोबार करना आसान नहीं होगा।

अश्विनी शर्मा
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
पत्रकारिता एवं जनसंप्रेषण
M. A. Journalism And Mass Communication
[email protected] 08502053658

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